कोरोना के खौफ में दशानन तो नहीं जलेंगे, लेकिन 10 बुराईयों रूपी रावण को दिल से जलाएं

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2020 02:17 AM IST
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कोरोना का खौफ ऐसा है कि इस बार हमारे यहां दशानन नहीं जलेंगे, लेकिन समाज में व्याप्त उन 10 बुराइयों रूपी रावण का हम अंत कर सकते हैं। कारण कि इन बुराइयों के पीछे की वजह भी हम खुद हैं और इसका अंत भी हमें ही करना होगा। ऐसे में विजयदशमी के पर्व पर भगवान राम से हम सबकी प्रार्थना होनी चाहिए कि वे हमें ऐसी शक्ति प्रदान करें, कि हम अपने समाज, बेटियों और अन्नदाता की सुरक्षा करते हुए हर बुराई पर विजय प्राप्त करें। जिले के 117 सालों के इतिहास में पहली बार बिना रावण दहन के दशहरा मनाने के इस पर्व पर पढ़ें, बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए प्रेरित करती अमर उजाला की ये स्पेशल रिपोर्ट...
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ये हैं दस बुराइयां, जिनके पीछे की वजह भी हम और सुधार भी हम...
1. कोरोना : भीड़ से बचें, अभी लड़ाई जारी है..
कोविड-19 के जिले में 8173 मामले सामने आए, 116 की मौत हुई, जबकि 7825 ठीक होने के बाद 232 मरीज अभी संक्रमित हैं। हमारे मन से कोरोना का खौफ घटता जा रहा है, त्योहारी खुशी में हम हर जगह शामिल भी हो रहे। लेकिन जागरूक हो भीड़ से बचें, क्योंकि कोरोना खत्म नहीं हुआ। लड़ाई जारी है।
2. भरोसा बनाएं : क्योंकि अभी रोजाना हो रह ठगी
आपसी व्यवहार के कारण ही समाज में एक दूसरे से भरोसा उठ रहा है। ऐसे में जागरूक हो व्यवहार बदलना होगा। पिछले तीन साल में जिले में ठगी के 313 मामले सामने आए, लेकिन 43 ही ट्रेस हो पाए।
3. -भ्रूण हत्या : लिंगानुपात अभी 952 ही है..
भ्रूण हत्या के प्रति सुधार आया है, लेकिन सोच में अभी बदलाव की जरूरत है। जुलाई माह का लिंगानुपात 952 के साथ प्रदेश में शीर्ष पर था, लेकिन पहले नंबर पर आने में अभी और सुधार करना होगा।
4. -स्वच्छता : क्योंकि हम अभी देश में 17वें स्थान पर..
स्वच्छता के मामले में थोड़ी जागरूकता से हम देश में 17वें स्थान पर हैं, लेकिन अगर व्यवहार में और परिवर्तन किया, तो पहले पर भी आएंगे। देश के सबसे स्वच्छ शहर में कचरा ना फैलने के प्रति हर कोई जागरूक है।
5. पेयजल : जलस्तर गिर रहा, इसे व्यर्थ बहाने से बचाना होगा
जिले में कई जगहों पर पेयजल किल्लत भी होने लगी है। काफी क्षेत्र डार्क जोन में आ गया। इस घटते भू-जल के पीछे हमारे द्वारा खुले छोड़े नल हैं। रोजाना कई हजार लीटर पानी गाड़ियों को धोने में भी व्यर्थ होता है। इसे ड्राई वाश करके बचाएं।
6. सड़क सुरक्षा : यातायात नियम माने, क्योंकि हादसों में प्रदेश में तीसरे स्थान पर
हादसों के मामले में प्रदेश में करनाल तीसरे स्थान पर है, यहां पिछले दो साल में 1234 हादसों में 623 मौत और 992 लोग घायल हुए। वहज सड़कों की खामियां और यातायात नियमों की अवहेलना है। यदि प्रशासन और हम प्रयास करें। तो हादसों और मौत का ग्राफ कम हो।
7. प्रदूषण : पराली जलाने से रोकना होगा, नहीं तो घुट जाएगा गला
फसल अवशेष जलाने की प्रथा भी रोकनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया, तो उठने वाला धुआं ही हमारा गला घोट देगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हर साल पराली जलने से 400 तक एक्यूआई पहुंचता है। और आगजनी के मामले भी सैंकड़ों में हैं।
8. महिला अत्याचार : छेड़छाड़ और दुष्कर्म के मामलों को रोकना होगा
महिला अत्याचार भी कम नहीं। सरकार ने कई कानून बनाने के साथ-साथ महिला थाने भी बनाए। लेकिन छेड़छाड़ और दुष्कर्म का अनुपात पहले के मुकाबले कम नहीं हो रहा। इसे अंजाम देने वाले भी हमारे समाज के लोग हैं। सोच बदलनी होगी।
9. किसान और खेती : तीन नए कानूनों के बाद भी एमएसपी की लड़ाई जारी
सरकार की ओर से तीन कृषि नए कृषि कानून बनाए गए। लेकिन फसलों के एमएसपी की लड़ाई अभी जारी है। दावा तो पूरा रेट मिलने का होता है। लेकिन हकीकत में पूरे पैसे ना मिलने से अन्नदाता की परेशान है।
10. मिलावट खोरी : त्योहार पर हर साल नकली मिठाई
त्योहार पर हर साल नकली मिठाई बाजार में आती है। जो पर्व की मिठास को फीका करती है। इस बार भी सीएम फ्लाइंग के छापों से लगातार मामले सामने आ रहे हैं। यदि हम थोड़े फायदे के लिए मिठाई में जहर घोलना बंद कर दें, तो हर व्यक्ति स्वस्थ रहे।
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