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दिवाली पर पटाखे जलाये तो गैस चैंबर बन जाएगा करनाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2020 02:11 AM IST
if the firecrackers are burnt, a gas chamber will be formed in karnal
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गगन तलवार

पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं से हवा में जहर घुल गया है। यदि हमने दिवाली पर खुद को पटाखे जलाने से नहीं रोका तो स्मॉग से शहर गैस चैंबर में तब्दील हो सकता है और लेना भी मुश्किल हो जाएगा। यह हम नहीं बल्कि राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के आंकड़े बता रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार जितना वायु प्रदूषण पिछले साल दिवाली पर था, उससे काफी ज्यादा एक्यूआई अक्तूबर में तीन बार दर्ज किया जा चुका है। 27 अक्तूबर 2019 को दिवाली की रात हुई आतिशबाजी के बाद 28 अक्तूबर का एक्यूआई में पीएम-10 298 दर्ज किया गया, जबकि इस साल इतना एक्यूआई 24 अक्तूबर को था, इससे पहले 22 अक्तूबर को 300 और 15 अक्तूबर को 344 भी दर्ज किया जा चुका है। 3 नवंबर को भी एक्यूआई 300 तक पहुंचा। विशेषज्ञों के अनुसार अभी हम सुधारात्मक स्थिति में हैं यानी आगजनी रोक दें और दिवाली पर पटाखे न जले, तो दो चार दिन में ही शहर की आबोहवा साफ हो जाएगी।

बॉक्स
476 एक्यूआई के साथ दिवाली से 10 दिन बाद तक गैस चैंबर रहा करनाल
2019 में दिवाली से अगले दिन जहां एक्यूआई 298 दर्ज किया गया। आतिशबाजी से हवा में जहर जब पूरी तरह घुल गया तो एक्यूआई का लेवल 476 तक पहुंचा। अगले 10 दिन में एक भी ऐसा नहीं था, जब एक्यूआई 300 से कम दर्ज किया गया हो। उन दिनों प्रशासन की ओर से फायरब्रिगेड द्वारा शहर भर में पानी का छिड़काव कराने का अभियान भी चलाया गया था।
2019 में इन दिनों ये थी स्थिति
तिथि एक्यूआई
29 अक्तूबर 336
30 अक्तूबर 396
31 अक्तूबर 383
01 नवंबर 398
02 नवंबर 376
03 नवंबर 476
04 नवंबर 314
05 नवंबर 300
06 नवंबर 409
जानिये, स्मॉग और हवा की क्वालिटी की स्थिति-
1. ऐसे बनता है स्मॉग : स्मॉग वायु प्रदूषण की एक अवस्था है। जो स्मोक और फॉग के मिलने से बनता है। धूल, धुआं और कुहासे का यह मिश्रण धुआंसा (स्मॉग) कहलाता है। वाहनों, औद्योगिक कारखानों, पराली, और पटाखों का धुआं, धूल व अन्य हानिकारक रसायन जब धुंध के संपर्क में आते हैं, तो स्मॉग का निर्माण होता है। बरसात या तेज हवा ही इस स्थिति से निजात दिला सकती है।
2. पीएम-10 और पीएम-2.5 की स्थिति : हवा की क्वालिटी पीएम-10 और पीएम-2.5 से मापते हैं। मात्रा प्रति घन मीटर में। एक घन मीटर एरिया में पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीएम-2.5 की अधिकतम मात्रा 50 होनी चाहिए।
-पीएम-10 में 10 माइक्रोमीटर के धूलकण।
-पीएम-2.5 में 2.5 माइक्रोमीटर के धूलकण।
इतने एक्यूआई पर वायु प्रदूषण की यह होती है स्थिति-
एक्यूआई रैंक हेल्थ पर प्रभाव
0-50 अच्छा न्यूनतम प्रभाव
51-100 संतोषजनक संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ
101-200 मध्यम लोगों को सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा व दिल को नुकसान
201-300 खराब ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है
301-400 बहुत खराब लंबे समय तक रहे तो सांस की बीमारी हो सकती है
401-500 भयावह स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता है, बीमार लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
15 अक्तूबर के बाद इस दिन 200 से ज्यादा दर्ज किया गया एक्यूआई-
तिथि एक्यूआई
15 अक्तूबर 344
20 अक्तूबर 241
21 अक्तूबर 274
22 अक्तूबर 300
23 अक्तूबर 277
24 अक्तूबर 298
25 अक्तूबर 216
26 अक्तूबर 282
28 अक्तूबर 267
30 अक्तूबर 233
31 अक्तूबर 276
01 नवंबर 258
02 नवंबर 268
03 नवंबर 300
विशेषज्ञों के अनुसार, 200 से ज्यादा एक्यूआई पर सांस के रोगियों की दिक्कतें बढ़ती हैं।
अक्तूबर में पराली जलाने की घटनाएं ज्यादा हुईं, इसलिए एयर क्वालिटी भी खराब हुई है। लोगों को जागरूक होना होगा। यदि यूं ही पराली जलती रही या दिवाली पर ज्यादा आतिशबाजी हुई तो एक्यूआई और बढ़ेगा, जिससे आमजन की दिक्कतें भी बढ़ेंगी।
-शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग करनाल।

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