अनाज मंडियों में धान की खरीद और लिफ्टिंग

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2020 02:26 AM IST
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जिले में सरकारी खरीद एजेंसियों की ओर से की गई धान खरीद एक करोड़ क्विंटल से ऊपर निकल गई है। खरीद शुरू हुए आज एक महीना पूरा हो गया है। अब मंडियों में धान की आवक भी घटकर आधी रह गई है, लेकिन जिलेभर के किसी किसान को अभी तक भुगतान नहीं मिल सका है, जबकि सरकार की ओर से 72 घंटे में भुगतान का दावा किया गया था। फिलहाल खरीद एजेंसियां 400 करोड़ रुपये का भुगतान जारी करने का दावा कर रही हैं, लेकिन इसमें कुछ भुगतान तो गलत खातों में ट्रांसफर हो गया है, शेष रकम आढ़तियों के खातों में हैं। कुल मिलाकर नवरात्र पर किसानों की जेब खाली रही। त्योहारी सीजन शुरू हो चुकी है लेकिन अभी किसान भुगतान के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।
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धान का सीजन अब उतार पर हैं, हालांकि अभी बासमती की कई प्रजातियां मंडियों में आनी शेष हैं। रविवार को खरीद नहीं होती है, इसलिए सोमवार को अधिक आवक मंडियों में होती है, 12 अक्तूबर को करनाल मंडी में एक दिन की आवक 1.90 लाख क्विंटल थी। 19 अक्तूबर को भी आवक करीब 1.50 लाख क्विंटल के करीब रही थी। यहां एक दिन में अधिकतम धान की आवक दो लाख क्विंटल तक रही है, लेकिन शनिवार को आवक घटकर 80 हजार क्विंटल रह गई। जिलेभर की सभी मंडियों में शनिवार तक धान खरीद एक करोड़ क्विंटल से अधिक हो गई है। मोटे तौर पर देखा जाए तो एक करोड़ क्विंटल धान का भुगतान ही 1888 करोड़ रुपये होता है, जबकि खरीद शुरू होने के 30 दिन बाद धान खरीद एजेंसिया 400 करोड़ रुपये जारी करने की बात कहकर अपनी पीठ थपथपाने में जुटी है। जिस 400 करोड़ को जारी करने की बात कही जा रही है, उसमें करोड़ों की धनराशि गलत खातों में चली गई तो शेष राशि आढतियों के खातों में पड़ी है, अभी तक किसानों को भुगतान नहीं मिल सका है।
इन मंडियों में इतनी हुई खरीद-
-असंध मंडी में 112242 मीट्रिक टन, बल्ला में 4882 मीट्रिक टन, ब्याना में 8376 मीट्रिक टन, घरौंडा में 139229 मीट्रिक टन, घीड़ में 34091 मीट्रिक टन, इंद्री में 113490 मीट्रिक टन, जुुंडला में 61740 मीट्रिक टन, करनाल में 229092 मीट्रिक टन, कुंजपुरा में 48318 मीट्रिक टन, निगदू में 29514 मीट्रिक टन, नीलोखेड़ी में 11784 मीट्रिक टन, निसिंग में 103510 मीट्रिक टन तथा तरावड़ी मंडी में 143362 मीट्रिक टन धान की आवक हुई। इस तरह जिले में धान की खुल खरीद एक करोड़ 3 लाख 96 हजार 300 क्विंटल हो गई है। सामान्य किस्म की 274260 क्विंटल तथा ग्रेड ए 10122040 क्विंटल धान शामिल है।
धान खरीद में खाद्य आपूर्ति नंबर-वन
-जिले में चार खरीद एजेंसियां धान की खरीद कर रही हैं। जिसमें 24 अक्तूबर तक की गई खरीद में खाद्य आपूर्ति विभाग ने सर्वाधिक 7073340 क्विंटल, दूसरे नंबर पर हैफेड ने 2005040 क्विंटल व तीसरे नंबर पर हरियाणा वेयर हाऊसिंग 1298010 क्विंटल व भारतीय खाद्य निगम ने सिर्फ 19910 क्विंटल धान खरीदा गया है। खास बात यह है कि जिले में सालवन व समानाबाहू में एक-एक किलो की भी खरीद नहीं हुई है।
मंडियों से 85 प्रतिशत धान की लिफ्टिंग हुई
-रविवार की शाम तक जिलेभर की सभी अनाज मंडियों में खरीदे गए धान में से 8840530 क्विंटल धान की लिफ्टिंग करा दी गई है, जो 85 प्रतिशत है। एफसीआई ने अभी तक कोई लिफ्टिंग नहीं कराई है।
यूपी-हरियाणा से पंजाब चला गया धान
-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के स्टेट प्रधान हंस राज सिंगला बताते हैं कि पंजाब में धान विलंब से मंडियों में आता है, जबकि वहां सरकारी खरीद पहले से ही शुरू हो चुकी थी। इधर, हरियाणा सरकार का पोर्टल किसानों, आढ़तियों व राइस मिलर्स के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। किसान अधिक इंतजार नहीं करते थे, इसलिए हरियाणा की जो सीमा पंजाब से सटी है, वहां की मंडियों में आने वाला 50 प्रतिशत से अधिक धान पंजाब चला गया है। यूपी के धान का भी एक बड़ा हिस्सा पंजाब चला गया है, जो जिसे हरियाणा के राइस मिलर्स व आढ़ती खरीदते थे।
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-जिले की सबसे बड़ी मंडियों में करनाल मंडी शामिल है लेकिन अभी तक यहां के आढ़तियों व किसानों को एक रुपया भी भुगतान नहीं दिया गया है। ई-खरीद पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। पंजीकरण के लिए शेष रह गए किसानों को पोर्टल भी बंद है। इन दिनों को धन की सख्त जरूरत है लेकिन सरकार अपने मनमानी पर उतरी हुई है। ना आढ़तियों के पास धन रह गया है और किसानों के पास कुछ बचा है। जिसका असर बाजारों पर भी पड़ रहा है।
-रजनीश चौधरी, चेयरमैन हरियाणा प्रदेश अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन।
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