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डेली जा रही तीन जान, एकमो मशीन बन सकती हैं वरदात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 02:15 AM IST
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में वेंटिलेटर तो अच्छी संख्या में हैं, लेकिन ये मरीजों के लिए संजीवनी साबित नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में वेंटिलेटर सपोर्ट देने के बावजूद औसतन तीन मरीज प्रतिदिन दम तोड़ रहे हैं। सितंबर माह के आंकड़े तो यही बता रहे हैं। लेकिन एकमो ईसीएमओ (एक्सट्राकोरपोरियल मेमब्रेन आक्सीजीनेशन) की सुविधा से ऐसे मरीजों की जान बचाई जा सकती है, जो रोहतक पीजीआई समेत कई अन्य कोविड अस्पतालों में मौजूद है। कल्पना चावला मेडिकल कालेज में भी इसके लिए छह माह पहले सरकार से अनुमति मिल चुकी है पर आज तक ये मशीनें नहीं पहुंच पाई हैं।
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मेडिकल कालेज में पहले कुल 12 वेंटिलेटर थे, लेकिन केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से 63 के करीब नये वेंटिलेटर भेजे गए। ऐसे में फिलहाल कालेज में 75 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इसमें मात्र 15 के करीब ही प्रयोग में आ रहे हैं। यह वेंटिलेटर भी गंभीर मरीजों की जान नहीं बचा पा रहे हैं, जिस कारण करनाल में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो जिन मरीजों की हालत में वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद भी सुधार नहीं हो रहा है, उनके लिए ईसीएमओ (एक्सट्राकोरपोरियल मेमब्रेन आक्सीजीनेशन) जीवनदायिनी साबित हो सकती है। मेडिकल कालेज को फिलहाल दो ईसीएमओ मशीनों की दरकार है। एक एकमो मशीन की कीमत 30 से 40 लाख रुपये बतायी जा रही है।

हृदय और फेफड़ों को देती है आराम, खुद करती है काम
बता दें कि वेंटिलेटर कृत्रिम सांस देता है, लेकिन इसमें फेफड़ों को आराम नहीं मिलता है। जबकि एकमो (ईसीएमओ) से मरीज के हार्ट और फेफड़ों को बाईपास करके कृत्रिम सांस दिया जाता है। ऐसे में आराम के बाद दोबारा से फेफड़े और हृदय काम करने लग जाते हैं। ये सुविधा पीजीआई रोहतक, रोहतक के ही कारनोस अस्पताल, गुरुग्राम के मेदांता समेत कुछ निजी बड़े अस्पतालों में है।
किडनी के मरीजों को आ रही परेशानी, नहीं पहुंची सीआरआरटी मशीन
उन मरीजों को भी दिक्कत आ रही है, जो किडनी के मरीज हैं और उनको कोरोना हो गया है। कालेज में कोई डायलिसिस सेंटर नहीं है। रोहतक पीजीआई बेडों की दुहाई देकर इन मरीजों को लेने से इंकार कर रही है। कालेज ने ऐसे मरीजों के डायलिसिस के लिए सीआरआरटी (कंटीन्यूस रीनल रिपलेसमेंट थैरेपी) मशीन की दरकार है, जिसकी डिमांड अप्रैल माह में ही भेजी गयी थी, लेकिन मंजूरी मिलने के बाद भी आज तक ये मशीन नहीं पहुंची है। मशीन की खासियत ये है कि इसको किडनी के मरीज के बेड के साथ लगा दिया जाता है और मरीज को बेड से उठकर दूसरे स्थान पर जाने की जरूरत नहीं होती है। इसकी कीमत करीब 20 लाख रुपये है।
मशीनें जल्द मिलने की संभावना : डा. दुरेजा
मशीनों और उपकरणों को लेकर सरकार को मांग भेजी गई थी, सरकार की तरफ से इनकी मंजूरी भी मिल चुकी है। हम लगातार उच्चाधिकारियों के संपर्क में हैं। संभावना है कि जल्द ही कालेज को ये मशीनें मिल सकेंगी और कोरोना के मरीजों का और बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा। तब तक डायलिसिस के लिए निजी सेंटरों से टाइअप कर रहे हैं। -डा. जेसी दुरेजा, केसीजीएमसी, निदेशक

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