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तिहरे हत्याकांड के बाद ग्रामीणों ने रातों रात काट ली विवादित जमीन से गेहूं की फसल

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Tue, 23 Apr 2019 12:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। गांव सीतामाई में स्थित सीता माता के मंदिर की जमीन को लेकर चचेरे भाइयों में हुए तिहरे हत्याकांड के बाद से गांव सीतामाई में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव में पुलिस जरूर तैनात है, लेकिन सिविल प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कुछ नहीं कर पाया है। प्रशासन की ओर न तो इस विवादित जमीन के कागजात किसी से मांगे गए हैं और न ही किसी अधिकारी ने गांव का मुआयना किया है। हालांकि, प्रशासन की संभावित कार्यवाही के चलते रातों रात किसानों ने खेतोें से अपनी फसलें काट ली हैं। जो शेष रह गए हैं उनके खेतों में कंबाइन लगी हुई हैं।
बता दें कि सीतामाई गांव में सीता माई मंदिर के नाम करीब 1200 एकड़ जमीन थी, मंदिर के महंत बशेशर दास ने आधा हिस्सा 619 एकड़ ग्रामीणों को आवंटित कर दिया गया था और बाकी पर मंदिर का कब्जा था। यह मामला हाईकोर्ट में चला हुआ है। इसके अलावा, वर्ष 2005 प्रशासन की ओर से करीब 71 एकड़ जमीन के गांव व अन्य लोगों को आवंटित कर दी गई। इस मामले की भी ग्रामीणों ने सीएम को शिकायत दी थी, जिसकी विजीलेंस जांच चल रही है। इस मामले में ग्रामीणों ने बशेशर दास पर अपने चहेतों को जमीन देने के आरोप लगाए थे। ऐसे में यह मामला जिला अदालत में चला गया। जिला अदालत के आदेश पर वर्ष 2003 में तत्कालीन डीसी आरएस दून ने इस मामले में गंभीरता दिखाई और गांव की 619 जमीन पर कब्जा कार्रवाई करके इसकी बोली कराई थी। एक बार बोली होने के बाद दोबारा किसानों ने सरकार को इस जमीन के लिए कोई पैसा नहीं दिया और जबरदस्ती खेती कर रहे हैं। हर साल किसान यहां पर फसल उगाते हैं। मंदिर के पास इस समय केवल 27 एकड़ जमीन है, जिसकी बोली कराई जाती है, शेष जमीन पर ग्रामीण अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए हैं। अब जमीन को लेकर हुए तिहरे हत्याकांड के बाद ग्रामीणों ने आनन फानन में जमीन से फसल काटनी शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने बताया कि कब्जाधारियों ने रातों रात खेतों में कंबाइन शुरू कराकर फसल उठा ली है। उधर, प्रशासन इस पर कोई फैसला नहीं ले पा रहा है।

अवैध है ग्रामीणों का कब्जा : पटवारी
इस बारे में ग्राम सीतामाई के पटवारी कर्म सिंह का कहना है कि ग्रामीण जबरदस्ती जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं और हर साल इस पर खेती करते हैं। इस मामले में समय समय पर आला अधिकारियों को रिपोर्ट दी जाती है। मंदिर के नाम पर केवल 27 एकड़ जमीन बची है, जिसकी बोली कराई जाती है। इसके अलावा, 72 दुकानों से किराया वसूला जाता है।

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