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बस संचालकों ने श्रमिकों को बस से उतार कर पीटा, हंगामा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2020 02:08 AM IST
bus operators beat labour
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ट्रेवल एजेंसियों के प्राइवेट बस स्टैंड में तब्दील होती करनाल की अनाज मंडी में कार सवार दबंग बस मालिकों ने कम किराये पर अन्य बसों में बैठे बिहार के श्रमिकों के साथ मारपीट कर घायल कर दिया। कुछ देर बार श्रमिक मौके पर एकत्र हो गए और उनका आक्रोश देख कार सवार दबंग भाग निकले। इसके बाद श्रमिकों ने उनकी बसों को भी घेर लिया। मौके पर पहुंची पुलिस दो बसों को अपने साथ ले गई। जिला प्रशासन ने शिकायत मिलने पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

छठ पूजा और दिवाली के लिए अनाज मंडी से बिहार लौटने के लिए सीधे परिवहन की सुविधा नहीं है। जिसका लाभ उठाते हुए निजी बस मालिकों व ट्रेवल एजेंसी संचालकों ने करनाल से बिहार के समस्तीपुर, बेगूसराय, अररिया, दरभंगा आदि जिलों का किराया 1200 से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रति यात्री कर दिया है। बताया जा रहा कि कुछ बस संचालकों ने 1800 रुपये प्रति सवारी बुकिंग करके अपनी बस लगा दी। जैसे ही इनमें श्रमिक सवार होने लगे नमस्ते चौक के आसपास की ट्रेवल एजेंसी के दबंग बस मालिक कार में सवार होकर मंडी पहुंच गए और 200 रुपये कम रेट कर यात्रियों को बैठा रहे बस संचालकों को दौड़ा दिया। उनकी बसों में बैठे श्रमिकों को जबरन बाहर निकालकर गाली-गलौच कर पीटने लगे। जिसमें कमलेश्वर यादव व प्रदीप कुमार आदि कई लोग घायल हो गए। मौके पर मजदूर संघ के प्रधान राम कुमार महतो, ठेकेदार सुरेंद्र कुमार आदि भी पहुंचे। वहां एकत्र हुए श्रमिकों ने जमकर हंगामा कर भागती बसों को घेर लिया और चालकों-परिचालकों को भी बाहर निकालने की कोशिश की। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह उन्हें शांत कराया। बाद में पहले से बुकिंग के आधार पर बसों को रवाना किया गया।

मालिक हरियाणा के, बसें यूपी नंबर की
दबंग ट्रेवल एजेंसियों ने अनाज मंडी में ही कार्यालय खोले हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ मालिकों ने मंडियों को बांट लिया है, ताकि एकाधिकार से मनमाना किराया वसूला जा सके। ये मालिक हैं तो हरियाणा के लेकिन यूपी के आरटीओ कोड पर बसें ले रखी हैं। जिन्हें बिहार भेजा जाता है। क्योकि बिहार जाने के लिए यूपी के एक बडे़ हिस्से को पार करना होता था। यूपी का नंबर होने के कारण वह यूपी में आसानी से पार हो जाते हैं। बताया जाता है कि कई बसों का हरियाणा में परमिट नहीं हैं लेकिन पुलिस व मंडी प्रशासन से साठगांठ करके मुनाफा कमा रहे हैं। अनाज मंडियों में अधिकांश श्रमिक बिहार के हैं, जो छठ पूजा व दिवाली के लिए घर लौट रहे हैं। न ट्रेनों में सीटें हैं न परिवहन की बसें उपलब्ध हैं। ऐसे में निजी ट्रेवल एजेंसियों ने इन दिनों अनाज मंडियों को बस स्टैंड में तब्दील करके जगह-जगह बसें खड़ी करके बुकिंग शिविर लगा दिए हैं। जहां से बिहार के श्रमिक अपने जिलों को जाने वाली बसों में टिकट लेकर बैठ रहे हैं, लेकिन अब यहां दबंग बस मालिकों ने किराया बढ़ा दिया है, जो बस संचालक कम किराये पर बुकिंग करता है उसके साथ मारपीट की जाती है।
पिछले साल व लॉकडाउन के दौरान बिहार जाने का प्रति व्यक्ति किराया 1200 रुपये था। इस बार बस मालिकों ने 2000 रुपये कर दिए हैं। कुछ बस मालिकों ने प्रतिस्पर्धा के तहत 1800 रुपये में बुकिंग कर ली थी तो दबंग बस संचालकों ने उनसे मारपीट की। श्रमिकों को भी सरेआम पीटा। पुलिस भी बस मालिकों का साथ देती है। हरियाणा सरकार को यहां से रोडवेज की बसें भेजनी चाहिए, जिससे श्रमिक भी कम किराये पर पहुंच जाएंगे और सरकार को भी आमदनी हो जाएगी। निजी बस चालक स्लीपर में एक के स्थान पर चार-चार लोगों को बैठाते हैं।
-राम कुमार महतो, प्रधान भारतीय मजदूर संघ अनाज मंडी करनाल
आज शाम को मेरे संज्ञान में मामला आया है। पुलिस सूचना पर पहुंची थी। श्रमिकों को लिखित शिकायत देनी चाहिए। इस मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रही बात रोडवेज बस भेजने की तो प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
-आयुष सिन्हा, एसडीएम करनाल

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