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अनाज मंडियों में चल रहा बड़ा खेल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 02:30 AM IST
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इन दिनों जिले की ही वहीं बल्कि पूरे सूबे की अनाज मंडियों में एक बड़ा खेल चल रहा है। हरियाणा स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर राइस मिलर्स हड़ताल पर होने की बात कहकर पीआर प्रजाति का धान नहीं खरीद रहे हैं लेकिन इन्हीं अनाज मंडियों से बारीक धान की जबरदस्त खरीदारी भी कर रहे हैं। यही कारण है कि 1509 धान के भाव में पिछले चार दिनों में तीन 300 से 400 रुपये तक का उछाल आ गया है। आढ़तियों द्वारा भी किसानों द्वारा सर्वाधिक उत्पादित पीआर प्रजाति की खरीद में ही असहयोग किया जा रहा है।
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सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि मोटे और महीन धान का खेल क्या है। 1509 आदि बासमती प्रजाति महीन धान की श्रेणी में आती है, जबकि पीआर-126 व 114 आदि प्रजाति मोटे धान की श्रेणी में हैं, जिसकी खरीद सरकार करती है। क्योंकि यह वह धान है जिसके भाव नीचे जाने की संभावना रहती है, इस कारण सरकार इसे एमएसपी पर खरीदती है। हरियाणा स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन से जुड़े राइस मिलर्स मोटे धान की प्रजाति को सरकार को सीएमआर चावल देने के लिए खरीदते हैं और महीन धान को अपने निजी कारोबार के लिए। अब राइस मिलर्स भले ही इस साल राइस मिलों को बंद रखने की चेतावनी सरकार को दे रहे हैं लेकिन राइस मिलर्स चाहकर भी ऐसा कर नहीं पाएंगे क्योंकि राइस मिल को तो उन्हें चलाना ही होगा, भले ही सीएमआर चावल के ना सही, अपने निजी कारोबार क लिए चलाएं। यही कारण है कि राइस मिलर्स लगातार जून के महीने से ही 1509 व अन्य बारीक धान की खरीद में जुटे हुए हैं। करनाल अनाज मंडी से भी करीब तीन लाख क्विंटल से अधिक 1509 प्रजाति की खरीद हो चुकी है। जब से सरकार ने सरकारी खरीद का आदेश जारी किया है, तभी से अब सिर्फ चार दिनों में ही 1509 धान के प्रति क्विंटल भाव में 300 से 400 रुपये तक ही बढ़ोत्तरी हो गई है। जो धान चार दिन पहले तक 1700-1800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, वह आज 2000 से 2100 रुपये प्रति किंवटल बिक रहा है। चावल की खरीद में देरी करने की एक मुख्य बजह यह भी है कि ज्यों ज्यों खरीद आगे बढ़ रही है, त्यों त्यों धान की नमीं घट रही है। जिसका सीधा फायदा राइस मिलर्स को ही होगा। कुल मिलाकर राइस मिलर्स सरकार पर शर्ते मानने के दबाव तो बना रहे हैं लेकिन अपने निजी चावल कारोबार को कोई नुकसान नहीं होने दे रहे हैं। हरियाणा सरकार भी सीमावर्ती राज्यों से आने वाले मोटे धान को ही रोक रही है, बारीक धान पर सरकार की भी कोई पाबंदी नहीं है।

जब से सरकारी धान खरीद का ऐलान हुआ है, तब से 1509 धान का भाव 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गया है। अब तक तो राइस मिलर्स बारीक धान को काफी सस्ता खरीद रहे थे। किसान भी हड़ताल की बात सुनकर खरीद को लेकर भयभीत था, इसलिए सस्ते में ही बेच रहा था।
-गुरजीत सिंह किसान तरावड़ी
-अधिकांस राइस मिलर्स आढ़ती भी हैं, ऐसे में वह सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं कि सरकार उनकी शर्तो पर धान खरीदे, ताकि उन्हें फायदा हो सके। वैसे तो बारीक धान तो खरीदा ही जा रहा है। धान खरीद शुरू होने से पहले राइस मिलर्स बड़ी मात्रा में बारीक धान खरीद लेते हैं।
-जय भगवान, किसान तरावड़ी

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