बुराइयां मिटाने के लिए धार्मिक संगठनों को एक होने की जरूरत

Karnal Updated Mon, 17 Jun 2013 05:31 AM IST
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कुरुक्षेत्र। पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल हॉल में ‘श्रीमद्भगवद्’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन के दौरान ‘अहिंसा परमो: धर्म:’ पर भी मंथन किया गया। कार्यक्रम में ब्रह्म कुमारी से जुडे़ कई राज्यों से आए अनुयायियों ने शिरकत की। चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समाज में व्याप्त बुराइयों और कुरीतियों को खत्म करने के लिए आध्यात्मिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों को एक साथ काम करने की जरूरत है। प्रतिस्पर्धा के इस जमाने में लोग सहयोग की भाषा कम समझने लगे हैं, जबकि बुराइयां अपनाने के लिए प्रतिस्पर्धा की कतार में खड़े दिखते हैं, जोकि सभ्य समाज की संरचना पर कुठाराघात है। लोगों की ऐसी मनोदशा को सही दिशा में परिवर्तित करने के लिए उनके मानस पटल को परिवर्तित करने की जरूरत है और यह कार्य आध्यात्मिक संस्थाएं हीं कर सकती हैं। राज्यपाल पाटिल ने कहा कि आज समूची दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है लेकिन यह भी सच्चाई है कि सभी देश एक-दूसरे से युद्ध करने से बचते हैं। संभावनाएं इस बात की अधिक हैं कि भविष्य में युद्ध नहीं होंगे और यदि होंगे तो बहुत कम होंगे। चूंकि विश्व के कई देश अनचाहे युद्धों का परिणाम भली-भांति जानते हैं। राम और कृष्ण को भी युद्ध करना पड़ा लेकिन ऐसा नहीं कि वे किसी भी प्रकार के युद्ध के पक्ष में थे। उन्होंने बढ़ते आतंकवाद पर कहा कि आतंकवाद दिशाहीन परिस्थितियों का परिणाम है। आतंकवाद के बढ़ने के कई कारण हैं। आतंकवाद को अकेले हथियारों के बल पर समाप्त नहीं किया जा सकता। आतंकवाद को खत्म करने के लिए इस दिशा में संलिप्त लोगों के जहन को बदलने की जरूरत है और यह कार्य करने के लिए विभिन्न प्रकार की संस्थाएं, जो सुधार के कार्य में दिन-रात जुटी हैं, वे लोगों की नब्ज समझकर बेहतर कार्य कर सकती हैं। समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनके दृष्टिगत बढ़े-बढ़े अपराधी भी मुख्यधारा में लौटे और उन्होंने समाजसेवा का व्रत धारण करते हुए अनुकरणीय कार्य किए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गीता ज्ञान द्वारा हिंसामुक्त समाज की स्थापना करना है। कोई भी धर्म लोगों को सामाजिक व्यवस्था पर आधारित मर्यादाएं और वर्जनाएं तोड़ने की बात नहीं कहता लेकिन राह से भटके लोगों को सही रास्ते पर लाने के लिए आध्यात्मिक सहजता का दामन हमेशा कारगर रहता है। हिंसा युद्ध में ही नहीं होती, बल्कि विचारों, आचरण, व्यवहार और शाब्दिक बाणों में भी झलकती है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज के समुचित संवर्धन और राष्ट्र के विकास के लिए समाज के हर व्यक्ति को अपने स्वभाव में बदलाव लाकर आपसी समन्वय, सामंजस्य के समायोजन के साथ वृहत पैमाने पर काम करने की जरूरत है। राज्यपाल पाटिल सहित सभी संप्रदायों और संगठनों के प्रतिनिधियों को ब्रह्मा कुमारी संस्था की ओर से स्मृति चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मेलन में इससे पूर्व महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी शाश्वतानंद गिरि ने मूल विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि अहिंसा परमो: धर्म: और श्रीमद्भगवद् गीता विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन की सार्थकता के महक रूपी संदेश को समझने की जरूरत है और जो लोग सम्मेलन में भाग लेने आए हैं, उन्हें चाहिए कि वे बाहर जाकर इस दिशा में बेहतर प्रचार करें। सम्मेलन में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नवाब सिंह, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वी. ईश्वर्या, महामंडलेश्वर स्वामी हरिओम गिरि, माउंट आबू से आई ब्रह्मा कुमारी ऊषा बहन, जबलपुर से डॉ. पुष्पा पांडे, बहन आशा और राष्ट्रीय समन्वयक देवी चंद्र कौशिक ने भी सम्मेलन में विचार रखे। ब्रह्मा कुमार बृजमोहन ने सम्मेलन के प्रथम दिन सभी मेहमानों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में लड़कियों की ओर से मूल विषय पर कंठबद्ध मनमोहक भजन प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर कुलपति डॉ. डीडीएस संधू, रजिस्ट्रार पीके जैन, एसडीएम एके बंसल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी गगनदीप सिंह, डीआईपीआरओ धर्मवीर सिंह उपस्थित रहे।
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