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खतरनाक मोड़ छीन रहे जिंदगियां

Karnal Updated Mon, 11 Feb 2013 05:31 AM IST
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कैथल। जिले की कई सड़कें अब खूनी बन गई हैं। दर्जन भर से अधिक स्थानों पर ऐसे खतरनाक मोड़ हैं जो जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले दो दिन में ही सड़क हादसों में छह लोगों की जान चली गई। आंकड़ों के अनुसार एक साल में जिले में 350 से अधिक सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 161 लोगों की मौत हो गई। इतने हादसों के बावजूद जिला प्रशासन बेपरवाह है। हालांकि स्टेट हाईवे अथॉरिटी की ओर से कुछ प्वायंट पर सांकेतिक चिन्ह तो लगा दिए गए हैं, लेकिन और कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। वाहनों की तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा सका। सबसे ज्यादा इन्हीं कारणों से हो रहे हैं।
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जिले में खतरनाक मोड़
दो साल पहले कैथल में तैनात तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सिमरदीप सिंह ने यमुनानगर की एक संस्था से सर्वे करवाया था। इस संस्था ने सर्वे करके जिले भर की सड़कों के खतरनाक प्वायंट की जानकारी उपलब्ध कराई थी। इसमें कैथल-अंबाला रोड पर 12 किलोमीटर तक दस खतरनाक प्वायंट बताए थे। सर्वे में बताया गया था कि 82 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं का कारण सड़क की गड़बड़ी, तीखे मोड़ और लापरवाही है। सर्वे में सामने आया था कि बिजली के खंभे, तीखे मोड़, सड़कों के मोड़ पर खड़े पेड़, बोर्ड या अन्य रुकावटें, अतिक्रमण, डिवाइडर और लाइटिंग की कमी के कारण ज्यादातर हादसे हो रहे हैं। इसके अलावा सड़कों का रखरखाव सही ढंग से न होने की खामी भी पाई गई थी। सर्वे के मुताबिक नेशनल हाईवे पर 95 प्रतिशत क्षेत्र में सांकेतिक चिन्ह नहीं थे। जिले में कैथल-करनाल मार्ग पर मूंदड़ी नहर पुल, ढांड में पंचमुखी चौक, कैथल पटियाला मार्ग पर डेरा दिल्लू राम के पास मोड़, पोलड़ मोड़, कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद रोड बाईपास, तितरम मोड़ और कलायत के कैंची चौक पर भी यातायात नियंत्रण व्यवस्था का अभाव बताया गया था।


सर्वे के सुझावों पर अमल नहीं
संस्था की ओर से हुए सर्वे में बताए गए खतरनाक प्वायंट पर हादसों को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए थे। इसमें कुछ जगह सांकेतिक लाइटें लगाने पर तो काम हुआ, लेकिन कई समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हुई हैं।

तेज रफ्तार बन रही काल
रामा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के डायरेक्टर सुभाष संधू के अनुसार सड़कों पर वाहनों की तेज रफ्तार, दुपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट चलना, वाहन चलाते समय नियमों के पालन में लापरवाही भी हादसों के प्रमुख कारण हैं। युवा वर्ग यातायात नियमों की अनदेखी कर सबसे ज्यादा जान गंवा रहा है। पुलिस ने यातायात सप्ताह मनाकर लोगों को जागरूक किया था और कुछ चालान भी किए लेकिन यातायात नियमों के पालन के प्रति लोग अधिक संजीदा नजर नहीं आ रहे हैं।

फोर लेनिंग का काम अधर में
जिले से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 65 की फोर लेनिंग वर्षों पहले मंजूर हो चुकी है लेकिन इस पर काम आज तक शुरू नहीं हो पाया। इस सड़क पर राजस्थान, हिसार सहित हरियाणा के विभिन्न जिलों से हिमाचल, जम्मू, चंडीगढ़ और पंजाब की ओर जाने वाले वाहनों का भारी दबाव रहता है। इस कारण यहां अक्सर हादसे होते हैं।

पिछले वर्षों में हुई सड़क हादसों में मौत का ब्योरा
2005 76
2006 86
2007 92
2008 107
2009 128
2010 112
2011 118
2012 145
2013 में अब तक 16

कोट---
पुलिस की ओर से विशेष रूप से जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यातायात नियमों की जानकारी दी गई। इसके अलावा शराब पीकर वाहन चालकों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। नियमों की अवहेलना करने वालों का चालान भी किया जा रहा है। विभाग की ओर से हादसों में पीडि़तों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी चलाई जा रही है। हादसों को देखते हुए खतरनाक प्वायंट पर और अधिक सुधार के लिए कदम उठाए जाएंगे।
- शेरजंग सिंह राणा, यातायात निरीक्षक

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