पुरातत्व विभाग ने ली बालू के टीले की सुध

Karnal Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
कैथल। गांव बालू स्थित छह हजार साल पुराने ऐतिहासिक बालू के टीले की आखिरकार पुरातत्व विभाग ने सुध ले ली। बालू के टीले से मिट्टी उठाए जाने के खुलासे के बाद विभाग की टीम बृहस्पतिवार को बालू के टीले पर पहुंची और मिट्टी उठाए जाने का जायजा लिया। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। टीम में शामिल अधिकारियों ने टीले से मिट्टी उठाए जाने को गंभीर मामला बताते हुए पुलिस में शिकायत करने की बात कही है। समाचार लिखे जाने तक टीम में शामिल अधिकारी आवश्यक कार्रवाई में जुटे थे।
अमर उजाला ने 21 दिसंबर के अंक में यह मामला प्रमुखता से उठाया गया था। इसमें तीन सभ्यताओं की निशानियों को सहेजे गांव बालू के छह हजार वर्ष पुराने टीले में से लोगों द्वारा मिट्टी उठाए जाने की जानकारी दी गई थी। इतिहासकारों का कहना है कि यह टीला पूर्व हड़प्पा कालीन, हड़प्पा कालीन एवं आदि हड़प्पा कालीन सभ्यता की निशानियों को संजोए है। इस ऐतिहासिक टीले की मिट्टी को भराव के लिए प्रयोग करना एक अपराध है, जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए।
पुरातत्व विभाग के पंजीकरण अधिकारी रणबीर शास्त्री के नेतृत्व में बृहस्पतिवार बाद दोपहर विभाग की टीम गांव बालू पहुंची। जहां टीम को टीले से भारी मात्रा में मिट्टी खोदी हुई मिली। अधिकारियों ने खुदाई में निकले प्राचीन अवशेष भी एकत्रित किए। इसमें प्राचीन राख सहित कुछ बर्तनों के अवशेष पाए गए हैं। शास्त्री ने बताया कि यह एक गंभीर अपराध है। उन्होंने बताया कि इस टीले को पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लिया गया है। इसके लिए बाकायदा 28 दिसंबर 2010 को नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इसमें इस टीले की 109 कनाल एवं 8 मरले अथवा 13 एकड़ 15 कनाल भूमि को संरक्षित घोषित किया गया था। इसी कारण अब यह पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। बिना मंजूरी के इसकी खुदाई करना अपराध है। इसके लिए पुलिस में शिकायत देकर केस दर्ज करवाया जाएगा।

ऐतिहासिक है साइट
पुरातत्व विभाग के अधिकारी रणबीर शास्त्री ने बताया कि यह एक ऐतिहासिक साइट है। हरियाणा में कुणाल, दुड़ाना एवं बनावली में भी काफी पुरानी साइटें हैं। उन्होंने कहा कि यह साइट प्राचीन दृश्यवती एवं सरस्वति नदियों के बीच स्थित है। पाकिस्तान से गुजरने वाली सिंधु नदी के समकालीन इन नदियों के बीच में यह साइट है। उन्होंने खुदाई में मिले प्राचीन अवशेष भी लिए और कहा कि इस टीले का पूरी तरह से संरक्षण किया जाएगा।

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