एजेंसियों का चावल का हो रहा रिजेक्ट

Karnal Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
करनाल। राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियाें, कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की और धरना दिया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अनुसार निगम के अधिकारी राइस मिलर्स संचालकों पर कुठाराघात करने में लगे हैं। एजेंसियों के धान से तैयार किए गए चावल को बेवजह रिजेक्ट किया जा रहा है। हालत इस कदर खराब है कि तरावड़ी में बिना परखी लगाए ही चावल से लदी 47 गाड़ियों को वापस भेज दिया गया।
इनका कहना था कि एफसीआई के पास भंडारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण राइस मिलर्स संचालकोें को परेशान किया जा रहा है। डीसी की फटकार का भी अधिकारियों पर कोई असर नहीं है। यही हाल रहा तो निगम के अधिकारियों की गलत नीति के कारण राइस मिलर्स करोड़ों के कर्ज तले दब जाएंगे। राइस मिलर्स संचालकोें ने कहा कि एफसीआई अधिकारियों की अंधेरगर्दी के समक्ष राइस मिलर्स कहीं नहीं टिक पाएंगे। बिना परखी लगाए ही माल को रिजेक्ट कर दिया जाता है। अधिक पैसा लेकर चावला की गुणवत्ता को दरकिनार कर दिया जाता है। अधिकारी मिल संचालकों को लूटने पर लगे हैं।
इनका कहना था कि सामान्य तौर पर गाड़ी लगाने के लिए ढाई हजार रुपया प्रति गाड़ी लिया जाता है। थोड़ा माल कमजोर होने की हालत में 3500 रुपया लगता है। अलग-अलग सेंटरों की हालत गिनाई जाए तो अधिकारियों की अंधेरगर्दी और ज्यादती की पूरी पोल पट्टी खुल कर सामने आ जाएगी।

47 गाड़ियों में लदा है 11690 क्विंटल चावल
तरावड़ी में 47 गाड़ियों में लदा करीब 11690 क्विंटल करोड़ाें रुपये का चावल बिना परखी लगाए वापस कर दिया गया। पूछने पर केवल यही जवाब मिला कि अधिकारियों के मना करने पर ऐसा हुआ है। करनाल में एक महीने मेें 25 नवंबर से 26 दिसंबर तक कुल 17 गाड़ी लगी। एक महीने मेें औसत 45 प्रतिशत की होनी चाहिए। रिकार्ड बोल रहा है केवल छह प्रतिशत ही गाड़ी लगी है। पूरा कस्टम मिलिंग (सीएमआर) का चावल है। सरकारी एजेंसियों का माल है। राइस मिलर्स को बेवजह परेशान किया जा रहा है। करनाल में दो डिपो बनाए गए हैं। संचालकों ने खुले मंच से बोलते कहा कि बजीदा में पूरा बढ़िया क्वालिटी का माल लगाया जाता है और एफएसडी में बिना चेक किए ही माल लगा दिया जाता है। सभी सेंटरों पर यही बदहाली है। असंध में इस अव्यवस्था के अलावा केवल मात्र एक तकनीकी अधिकारी होने की वजह से भी काम में दिक्कत आ रही है।

यूपी में डैमेज सीमा चार प्रतिशत
नारेबाजी करते हुए इन लोगों ने कहा कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में डैमेज सीमा चार प्रतिशत है। हरियाणा में तीन प्रतिशत रख कर भेदभाव किया जा रहा है। एक ही देश में एक ही कानून के तहत ऐसा भेद नहीं होना चाहिए। उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार होने के बावजूद राइस मिलर्स को राहत है। केंद्र और हरियाणा में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद तीन प्रतिशत होने का भेद हो रहा है। इससे साफ है कि सरकार भी राइस मिलर्स का भला नहीं चाहती। उन पर अत्याचार की नीतियों को बढ़ावा दे रही है। उन्होेेंने कहा कि अधिकारियों को राइस मिलर्स की दिक्कत को समझना होगा। भंडारण की व्यवस्था नहीं होने की जिम्मेदारी उन लोगों की नहीं है। वह सरकार का काम है। राइस मिलर्स का काम केवल धान से चावल बना कर देने का है।

एक-दो जायज मांग मानी
एसोसिएशन के अधिकारियों से बात हो चुकी है। उन लोगों की एक दो मांग जायज थी, वह मान ली गई है। समास्या का निदान हो गया है। अब काम रोजाना सामान्य ढंग से चलेगा।
एसएस सिंघल, क्षेत्रिय प्रबंधक
भारतीय खाद्य निगम, करनाल

धरने में यह लोग रहे मौजूद
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नंदलाल गोयल, शहरी अध्यक्ष विजय टक्कर, कुंजपुरा अध्यक्ष इलमसिंह, असंध के अध्यक्ष ईश्वरचंद गोयल, तरावडी अध्यक्ष नरेश बंसल, इंद्री अध्यक्ष संजीव गोयल, घरौंडा अध्यक्ष अनिल कुमार, नीलोखेड़ी अध्यक्ष लोकेश सरदाना, इंद्री से रोशन लाल गोयल, सतीश सरोहा और करनाल के विपिन गुप्ता समेत करीब 50 से अधिक राइस मिलर्स संचालकों ने निगम अधिकारियों की ज्यादती के खिलाफ एफसीआई कार्यालय के गेट के बाहर धरना दिया और कड़ी नारेबाजी की।

Spotlight

Most Read

Jharkhand

चारा घोटाला: चाईबासा कोषागार मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला, तीसरे केस में लालू दोषी करार

रांची स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने चारा घोटाले के तीसरे मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है। साथ ही पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा को भी दोषी ठहराया है।

24 जनवरी 2018

Related Videos

हरियाणा में इस नौकरी के लिए उमड़ा बेरोजगारों का हुजूम

हरियाणा में बेरोजगारी का क्या आलम है, ये देखने को मिला करनाल में। दरअसल मंगलवार को करनाल में ईएसआई हेल्थ केयर में चपरासी के 70 पदों के लिए प्रदेश भर से हजारों युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

17 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls