...तो एक दिन सरहदों के मायने खत्म हो जाएंगे

Karnal Updated Mon, 24 Dec 2012 05:31 AM IST
कुरुक्षेत्र। 1947 में जो हादसा हुआ, उसे अब भूला देना चाहिए और दोनों मुल्कों को एक करने के लिए प्रयास होने चाहिए। जो भाई 47 में एक-दूसरे से अलग हो गए, अब वक्त है कि उन्हें फिर से मिल जाना चाहिए। लाहौर से कुरुक्षेत्र नाट्य उत्सव में शामिल होने के लिए यहां पहुंचे पाकिस्तानी कलाकारों के जत्थे की मुखिया फौजिया तबस्सुम ने मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में अपने दिल का बात रखी। इस अवसर पर मैक के उपाध्यक्ष चंद्र शर्मा, उप निदेशक प्रभारी विश्वदीपक त्रिखा, पाकिस्तानी टीम के कोआर्डिनेटर डॉ. तरुण शर्मा व नाटक वारिश शाह के निर्देशक आगा शाहिद सहित पाकिस्तान से आए सभी कलाकार उपस्थित रहे। फौजिया तबस्सुम अकादमी लाहौर, पाकिस्तान की निदेशक फौजिया तबस्सुम ने कहा कि दोनों देशों की अवाम को मिलने से नहीं रोका जाए। फौजिया ने कहा कि भारत पाकिस्तान के बीच वीजा की बहुत सी दिक्कतें हैं, किंतु यहां के लोगों की मोहब्बत हमें हिंदुस्तान खींच लाती है। अगर दोनों देशों के कलाकार, खिलाड़ी और दूसरे फनकार यूं एक दूसरे के पास आते-जाते रहे तो एक दिन इन सरहदों के मायने ही खत्म हो जाएंगे। मैक के उपाध्यक्ष चंद्र शर्मा ने पाकिस्तान से आए सभी कलाकारों का स्वागत सभी को गुलाब के फूल देकर किया। चंद्र शर्मा ने कहा कि दोनों देशों के बीच कलाकारों का आना जाना ताल्लुकात बेहतर बना सकता है। पाकिस्तान से आई फिल्म कलाकार शाइस्ता जबीं ने कहा कि अगर दोनाें देशों को मिला दिया जाए तो हो सकता है कि वो झगड़े ही न रहें, जो अब दोनों मुल्कों के हुक्मरानों के बीच हैं। डॉ. तरुण कुमार, जिन्होंने मैक और पाकिस्तान के कलाकारों के बीच अहम भूमिका निभाई, उन्होंने कहा कि दोनों मुल्कों की संस्कृति, भाषा, पहनावा एक ही हैं। इसलिए सरकारों को ड्रामा वालों को इजाजत देकर राजनीतिक ड्रामा खत्म करना चाहिए। उन्होंने अपनी बातें दो शेर कह कर रखी कि ‘हजार नाम थे मेरे, मगर मैं एक ही था, ना जाने कब मैं मस्जिदों मंदिरों में बंट गया।’ डॉ. तरुण ने सरहदों पर कहा कि ‘सफर हयात का तमाम हिजरतों में कट गया, वतन जमीं ही रही, मैं सरहदों में बंट गया।’ पाकिस्तान से आए कलाकार 25 दिसंबर को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आरके सदन में अपना नाटक ‘वारिश शाह’ पेश करेंगे। इसके अलावा पाकिस्तान की एक अन्य टीम 28 दिसंबर को अपना नाटक ‘रामेश्वर सिंह’ पेश करेंगे। इसके अलावा 24 से 28 के बीच तीन अन्य नाटक भी पेश किए जाएंगे। इस अवसर पर पाकिस्तान से आए कलाकार सलीना शाहिद, अनुशे शाहिद, अली नादिर, मोहम्मद अब्दुल्ला, जुबैर बुट्टा, आदिल जावेद, अली रिज़वान पाशा, बीनिष, पूनम नाज़, गुलनाज़, फ़र्ख जमा, शब्बीर हुसैन, जाहिद चौधरी और शाइस्ता जबीं मौजूद रहे।

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