एक दशक बाद भी रहे हाथ खाली

Karnal Updated Sun, 23 Dec 2012 05:31 AM IST
केडीबी द्वारा एक छोटे से आयोजन के रूप में गीता जयंती उत्सव की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने 1987 में की थी। इसके बाद श्री जयराम आश्रम और केडीबी ने 1992 से इस उत्सव को भव्य ढंग मनाने की शुरुआत की, लेकिन इस उत्सव की भव्यता में चार चांद एनडीए सरकार में लगे। तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री अनंत कुमार इस आयोजन में शामिल हुए। वर्ष 2002 में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जगमोहन ने इस उत्सव की कायाकल्प की और इस आयोजन के लिए 10 हजार स्क्वेयर फुट का मंच पहली बार लगा और इस मंच पर एक साथ देश के विभिन्न राज्यों के 800 कलाकारों ने महाभारत के प्रसंगों पर आधारित समर मंथन कार्यक्रम आयोजित किया। इसकी चर्चा नेशनल मीडिया में हुई। 2003 में इस कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ही नहीं बल्कि तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत भी पहुंचे। उस समय इस उत्सव को राष्ट्रीय उत्सव घोषित किया गया था, लेकिन उसके बाद वर्ष 2004 के बाद इस उत्सव का महिमा मंडन घटता चला गया। मई 2004 में यूपीए सरकार के सत्ता में आने के बाद किसी भी पर्यटन मंत्री ने कदम नहीं रखा। अंबिका सोनी, रेणुका चौधरी, कुमारी शैलजा तक ने इस उत्सव से दूरी अपनाई, आखिरकार यूपीए की चौथी पर्यटन मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच ने इस परंपरा को तोड़ा जरूर, लेकिन जो उम्मीद थी उसे भी तोड़ दिया।

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