शहीद भगत सिंह की डायरी हिंदी में छपेगी

Karnal Updated Fri, 21 Dec 2012 05:32 AM IST
करनाल। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के पोते यादविंद्र सिंह ने कहा शहीद भगत सिंह द्वारा जेल में लिखी गई डायरी राष्ट्रीय धरोहर है। शहीद भगत सिंह ने यह डायरी अंग्रेजी भाषा में लिखी थी लेकिन अब देश के हर आम और खास नागरिक की सुविधा के लिए इस डायरी का अनुवाद हिंदी में कराया जा रहा है। इतना ही नहीं यह भी हो सकता है कि जल्द ही गुजरात सरकार भी इस डायरी का अनुवाद अपने प्रदेश के लोगों की सुविधा के लिए गुजराती में कराए। इसकी चर्चा उनसे पहले हो चुकी है। शहीद की किसी जाति विशेष और परिवार के नहीं होते। वह राष्ट्रीय धरोहर होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए कि वह इस डायरी का हिंदी और देश में प्रचलित अन्य भाषाओं में अनुवाद कराए, ताकि देश के हर कोने की युवा पीढ़ी गुलामी के उत्पीड़न के जख्मों के दौरान और आजादी की कीमत को समझ सके।
वीरवार को यादविंद्र सिंह अखिल भारतीय प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति के कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह मूल डायरी 404 पृष्ठ की है, जो शहीद भगत सिंह ने काले पैन से हाथ से लिखी है। वर्ष 2007 मेें उनके पिता बाबर सिंह संधू ने इस मूल डायरी को अंग्रेजी में ही कंप्यूटराइज्ड कराने के लिए संस्करण प्रकाशित करवाया था। परंतु इसकी प्रतियां अधिक नहीं थी। करीब दो सौ प्रतियां ही प्रकाशित हुई थी। उनके पिता का निधन हो गया था। यह काम बीच में ही छूट गया था। अब वह नए सिरे से इस डायरी का अनुवाद देश की मातृ भाषा हिंदी में करवाएंगे। इससे जहां मातृ भाषा को सम्मान मिलेगा वहीं, देश के हर व्यक्ति के लिए शहीद भगत सिंह की इस डायरी में देश के प्रति जताया गया प्यार, सोच और मिशन पढ़ने और समझने को मिलेगा।

जैसा हिंदुस्तान सोचा था वैसा नहीं
शहीद भगत सिंह 404 पेज की इस डायरी में लिख चुके हैं कि अंग्रेज उन्हें मार सकते हैं, लेकिन उनके विचार को नहीं मार सकते। उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति, गरीबी को दूर करने के तरीके, साम्राज्यवाद, मानवता समेत तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों और हालात पर अपना पक्ष और विचार बता चुके हैं। इस डायरी को पढ़ कर सरकार फोलो करे तो संभवता अब भी देश की तस्वीर बदल सकती है। भगत सिंह ने कहा था फांसी होने के करीब 15 साल बाद देश आजाद होगा। इतना ही नहीं गोर चले जाएंगे, लेकिन अपने ही देश को लूटने और कमजोर करने का काम करेंगे, जो आज सबके सामने हैं। उन्हाेंने थोड़ा नाराजगी जताते कहा कि भगत सिंह जैसे हिंदुस्तान का स्वप्न संजोए थे। हिंदुस्तान ऐसा नहीं है। इसका उन्हें भी दुख है। देश के लिए काम करने वाले लोगों की कोई पूछ नहीं होती।
स्वतंत्रता सेनानी सम्मान संग्रहालय देखा
प्रेस वार्ता से पूर्व यादविंद्र सिंह ने स्वतंत्रता सेनानी सम्मान संग्रहालय का अवलोकन किया और कहा कि यह संग्रहालय अपने आप में एक अनूठी मिसाल है और प्रत्येक राज्य में इस तरह के संग्रहालय बनाए जाने चाहिए ताकि युवा और भावी पीढ़ी देश के शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकर उनके दिखाए हुए मार्ग पर चलने की प्रेरणा ले सके। प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि आल इंडिया शहीद भगत सिंह मेमोरियल ट्रस्ट, अखिल भारतीय प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति, देश भक्त युवा संगठन, हरियाणा यूथ फेडरेशन, नवयुग युवा संगठन सहित अनेक राष्ट्रभक्त संगठनों के सहयोग से इस डायरी को राष्ट्रभाषा हिंदी में प्रकाशित किया जाएगा ताकि भगत सिंह के महान विचारों को हिंदुस्तान की युवा और भावी पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके। उनके साथ अखिल भारतीय प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन नरेंद्र सिंह अरोड़ा, हरियाणा यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष अंग्रेज सिंह वड़ैच, देशभक्त युवा संगठन के महासचिव विनोद यादव, नवयुग युवा संगठन के अध्यक्ष सुधीर ठाकरान ने भी अपने विचार सांझा किए।

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