ब्रह्म सरोवर पर दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

Karnal Updated Fri, 21 Dec 2012 05:32 AM IST
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह में पुरुषोत्तमपुरा बाग स्थित मुख्य मंच पर देश के विभिन्न सूबों की मनमोहक लोक संस्कृति से दर्शक रूबरू हुए। उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के सौजन्य से अलग-अलग राज्यों से आमंत्रित कलाकारों ने अपने गीत, संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियों ने सभी को अपने मोह में बांधे रखा। उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ द्वारा दीप प्रज्वलन करने के साथ इन अनूठी कला प्रस्तुतियों का सिलसिला प्रारंभ हुआ और देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों ने अपने कार्यक्रमों के माध्यम से इसे मकाम तक पहुंचाया। यह सिलसिला हिमाचल की मनमोहक सिरमोर नाटी नृत्य से शुरू हुआ तो मध्य प्रदेश के शिव पार्वती नृत्य घनघोर के बारस्ता जम्मू कश्मीर के रुफ, मध्य प्रदेश की प्रभु की आराधना का दृश्य प्रस्तुत करते बदई, बिहार का जिजिया नृत्य से अपनी छाप छोड़ता हुआ आगे बढ़ा। इस दौरान राजस्थान के चकरी नृत्य ने दर्शकदीर्घा में बैठे दर्शकों की उस वक्त खूब तालियां बटोरीं, जब राजस्थान के कलाकारों ने एक साथ सैकड़ों चकर घूम-घूमकर अद्भुत नृत्य की आभा प्रस्तुत की। असम का शांत और मनमोहक बिहू नृत्य और उत्तर प्रदेश का मयूर नृत्य देखने लायक था, जिसमें यूपी के कलाकारों ने राधा के बरसाने में श्याम संग रास रचाने के आकर्षक दृश्यों से खूब बांधा। उनकी प्रस्तुति ‘बरसाने की मोर कुटि में मोर बन आयो रसिया’ ने बच्चों और आमंत्रित अतिथियों को झूमने पर मजबूर किया। यह कारवां यहीं नहीं रुका और गुजरात के मेवाशी नृत्य तथा मार्शल आर्ट की एक मिसाल प्रस्तुत करता हुआ मणिपुर के घांघटा नृत्य से यह साबित हुआ कि देश के सरहदी कोनों से आए कलाकार कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह के सभी कार्यक्रमों में अपनी धूम मचाकर जाएंगे। हर वर्ष की तरह पुरुषोत्तमपुरा बाग के इस भव्य मंच पर पश्चिम बंगाल का पुरलिया छाहू वास्तव में पूरी प्रस्तुति के दौरान छाया रहा और महाभारतकालीन अभिमन्यु वध के मार्मिक प्रसंग को मुखौटों से ढके कलाकारों ने वास्तव में जीवंत कर दिया। अंतिम प्रस्तुति पंजाब की रही, जहां से यहां के लोकनृत्य भंगड़ा ने सभी को ढोल की थाप पर थिरकने पर मजबूर किया और भंगड़े के साथ नृत्य करते-करते न केवल कलाकार रुखसत हुए, बल्कि दर्शक ों ने भी चेहरों पर आई मुस्कान के साथ पुरुषोत्तमपुरा बाग का यह भव्य पंडाल छोड़ा। कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह अपने शुरुआती मुकाम में इस कार्यक्रम की बदौलत एक छाप छोड़ने में सफल रहा और कलाकारों की लोकनृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से इन सभी दर्शकों को आने वाले कार्यक्रमों में इससे भी अधिक धमाल की उम्मीद बंधी। इधर सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मुतासिर सैलानियों ने क्राफ्ट मेले में भी खूब खरीददारी की और सूचना, जन संपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय प्रदर्शनी के माध्यम से हरियाणा प्रदेश में हो रही तरक्की के भी खुले दर्शन किए। इस अवसर पर एसडीएम अशोक बंसल, केडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्रपाल मलिक उपस्थित थे।

खान साहेब नजर आए भोले बाबा के वेश में
गीता जयंती समारोह में ब्रह्म सरोवर के उत्तरी तट पर मुस्लिम संप्रदाय से ताल्लुक रखने वाले और शिव भोले बाबा का वेश धारण किए हुए 30 वर्षीय फरीद खान यही संदेश देते नजर आए कि धर्म सभी को समान नजरों से देखता है, सभी लोगों की भावनाओं को समान अवसर प्रदान करता है। धर्म सही मायने में हर जाति, हर संप्रदाय से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने का काम करता है और धर्म की परिभाषा भी यही है। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला की तरफ से गीता जयंती समारोह कुरुक्षेत्र में भाग लेने आए राजस्थान निवासी फरीद खान ने बताया कि हमारे लिए काम ही हमारी पूजा और इबादत है। बहरुपिया की यह कला नाट्य कला का ही भाग है। इसमें एक ही चेहरे पर अनेक चेहरे बार-बार बनाकर लोगों का मनोरंजन किया जाता है।

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