दुराचार पीड़ित किशोरी ने जन्मा बेटा

Karnal Updated Wed, 19 Dec 2012 05:31 AM IST
करनाल। नीलोखेड़ी इलाके के एक गांव की दुराचार पीड़ित किशोरी ने बेटे को जन्म दिया है। पीएमओ डाक्टर अमर बजाज ने बताया कि जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। बेटे को जन्म देने वाली पीड़ित की उम्र महज 15 साल है। इससे दुखद बात यह है कि इस बच्ची को एक माह में न्याय दिलाने का दावा करने वाली पुलिस अपना वादा पूरा नहीं कर पाई। न तो पुलिस इस केस की दस दिन में चार्जशीट दाखिल कर सकी और ना ही बच्चे के बाप पक्का सबूत जुटाने के लिए डीएनए टेस्ट हो पाया।
दुराचार का मामला दर्ज होने के बाद से ही पीड़ित नारी निकेतन में रह रही थी। सोमवार रात प्रसव पीड़ा होने के बाद उसे निकेतन से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीएमओ डा. शिव कुमार ने डॉक्टरों की स्पेशल ड्यूटी लगाई थी। पीएमओ डा. अमर बजाज ने बताया कि जच्चा और बच्चा दोनों पूर्ण रुप स्वस्थ हैं। डिलीवरी के दौरान सिविल अस्पताल में पुलिस बल तैनात रहा और महिला पुलिस कर्मियों की भी स्पेशल ड्यूटी लगाई गई थी। पुलिस ने इस मामले में गांव के ही आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया था और उसके गिरफ्तार कर लिया था। सुरक्षा के मद्देनजर पीड़ित छात्रा को नारी निकेतन में रखा गया था।

यह था मामला
पीड़ित छात्रा अपनी दादी के साथ 19 नवंबर 2012 को सिविल अस्पताल में आई थी। उसे पेट दर्द की शिकायत थी। जब डॉक्टर ने उसका अल्ट्रासाउंड किया, तो वह गर्भवती मिली। डॉक्टर ने तुरंत सीएमओ डॉक्टर शिव कुमार को सूचना दी और सीएमओ ने एसपी और डीसी को मामले से अवगत कराया। तुरंत सिविल अस्पताल में पुलिस बल तैनात कर दिया और छात्रा का मेडिकल कराया गया। तब किशोरी 31 सप्ताह के गर्भ से थी। थाना बुटाना प्रभारी संजीव मलिक, डीएसपी गुरदयाल सिंह और महिला हेल्प लाइन इंचार्ज कुलबीर कौर को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इस मामले में आरोपी ने कबूल किया था कि पीड़ित उसके बच्चे की मां बनने वाली है। इस मामले में पुलिस ने किशोरी की उम्र और मामले की नजाकत को भांप कर काउंसिलिंग के लिए डीएसपी पूजा डाबला और डीसी ने सीडीपीओ को जिम्मेदारी दी थी।

किशोरी को दोबारा नारी निकेतन भेजा
इस मामले में मीडिया के सामने एसपी शशांक आनंद ने दावा किया था कि वह इस मामले में दस दिन में ही चार्जशीट दाखिल कर देंगे। साथ ही बच्ची का डीएनए कराकर यह ठोस सबूत तैयार किया जाएगा कि बच्चा आरोपी का ही है। इतना ही नहीं एसपी ने दावा किया था कि वह सत्र न्यायाधीश से व्यक्तिगत तौर पर आग्रह कर बच्चा पैदा होने से पहले ही इस मामले में सजा की कोशिश करेंगे, ताकि देश में यह मामला त्वरित न्याय की मिसाल बने। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। दुराचार पीड़ित मां बन चुकी है पर किशोरी और आरोपी युवक का पुलिस डीएनए टेस्ट नहीं करा सकी। इतना ही नहीं दस दिन में पुलिस इस मामले में चालान भी नहीं पेश कर पाई। अभी फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है। इस मामले में बुटाना थाना प्रभारी संजीव मलिक कहते हैं कि दुराचार पीड़ित ने बच्चे को जन्म दिया है। पुलिस ने पीड़ित और आरोपी का डीएनए टेस्ट नहीं कराया है। किशोरी को दोबारा नारी निकेतन भेजा गया है।

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