जिला योजना समिति अब कहलाएगी जिला विकास और निगरानी समिति

Karnal Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
कैथल। जिला योजना समिति का स्वरूप बदलकर अब इसे जिला विकास और निगरानी समिति बना दिया गया है। सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार समिति में जनप्रतिनिधियों को और अधिक अधिकार दिए गए हैं। इससे जिले में विकास के लिए प्लानिंग और कार्यों के क्रियान्वयन में जन भागीदारी बढ़ेगी। मीटिंग को लेकर विभाग द्वारा विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
अब तक एडीसी कार्यालय के अंतर्गत संचालित जिला योजना समिति में जिले की विकास संबंधी प्लानिंग की जाती थी। इसमें उपायुक्त को चेयरमैन बनाया गया था, जबकि एडीसी इसके सदस्य सचिव होते थे। लेकिन अब पहली बार इसमें जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ा दी गई है।
जिला विकास और निगरानी समिति बनी
समिति का नाम बदलकर जिला विकास एवं निगरानी समिति कर दिया गया है। अब उपायुक्त के बजाए जिले में कष्ट निवारण समितियों के चेयरमैन संबंधित मंत्रियों को बनाया गया है। जबकि डीसी को इसका वाइस चेयरमैन बना दिया गया है। इसके अलावा इसमें एडीसी सदस्य सचिव, सांसद, जिले में स्थित विधानसभा क्षेत्रों से चयनित विधायक, जिला परिषद के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, सभी नगर पालिकाओं के चेयरमैन, ब्लॉक समिति के चेयरमैन, जिले में तैनात सभी एसडीएम, सीटीएम, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, प्लानिंग ऑफिसर सहित दो मनोनीत सदस्य शामिल किए गए हैं।
जिले में समिति गठित
सरकार की हिदायतों के अनुसार कैथल में जिला विकास एवं निगरानी समिति का गठन कर दिया गया है। जिसमें उक्त सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के अलावा इस समिति में ईओ नगर परिषद एवं डा. भीमराव अंबेडकर के अर्थशास्त्र विभाग के एचओडी को मनोनीत सदस्य बनाया गया है।

शीघ्र बुलाई जाएगी बैठक:-समिति के सदस्य सचिव एवं एडीसी दिनेश सिंह यादव ने बताया कि नई मिति में जनप्रतिनिधियों के सुझावों को विकास संबंधी प्लानिंग में शामिल किया जाएगा। ताकि वे भी जनता की समस्याओं को दूर करवा सकें। कैथल में सभी जनप्रतिनिधियों को समिति की ओर से अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित जरूरी विकास कार्यों की प्लानिंग के लिए पत्र जारी कर दिया गया है। पूरे जिले से विकास संबंधी प्लानिंग करके शीघ्र ही जिला विकास एवं निगरानी समिति की पहली बैठक बुलाई जाएगी।

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