जातिगत आरक्षण के खिलाफ फूंका बिगुल

Karnal Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
कुरुक्षेत्र। आरक्षण की सिफारिश करने का खामियाजा राज्य और केंद्र सरकार को चुनाव के दौरान भुगतना पड़ेगा। यह ऐलान अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने राजपूत धर्मशाला में प्रेसवार्ता के दौरान किया। कुरुक्षेत्र बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता तंवर ने कहा कि सरकार का यह निर्णय वोट बैंक की राजनीति के चलते लिया गया है। प्रेसवार्ता में मौजूद ब्राह्मण, अग्रवाल और पंजाबी समुदायों के नेताओं ने तंवर के सुर में सुर मिलाते हुए आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग रखी। प्रेसवार्ता में ब्राह्मण तीर्थोद्धार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा एडवोकेट, अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय सचिव खैरातीलाल सिंगला और हरियाणवी पंजाबी वेलफेयर सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष और कांग्रेसी नेता परीक्षित मदान ने भी आरक्षण की सिफारिश को रद करने की मांग रखी। तंवर ने कहा कि केंद्रीय सरकार द्वारा संसद में पदोन्नति के वषिय में आरक्षण संबंधी संशोधन लाने का प्रयास भी स्वर्ण जातियों के योग्य कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा अन्य स्वर्ण जातियों के साथ समन्वय करके पूरे प्रदेश व देश में आंदोलन खड़ा करेगी। इससे पूर्व राष्ट्रीय, प्रदेश तथा जिला स्तर पर समन्वय कमेटियों का गठन किया जाएगा ताकि देश में एक जनमत तैयार किया जा सके। केंद्र सरकार को संशोधन लाकर जातिगत आरक्षण को समाप्त करने व आर्थिक आधार पर आरक्षण नीति लागू करने के लिए मजबूर किया जाएगा। आरक्षण के खिलाफ समन्वय कमेटियां स्वर्ण जातियों से संबंध रखने वाले विधायक और सांसदों से मिलेगी और अपनी मांग संबंधित ज्ञापन उन्हें सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि जातिगत आरक्षण व जातीय आधार पर पदोन्नति से देश और समाज को बांटने तथा समाज के विभिन्न वर्गों एवं जातियों में वैमनस्य उत्पन्न होने का खतरा है। इस मौके पर क्षत्रिय सभा के प्रदेश महामंत्री चंद्रपाल तंवर, जिला क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, प्रबंधक अजमेर सिंह तथा संजय अग्रवाल पिहोवा उपस्थित रहे।

जाटों के साथ धोखा : दहिया
खापों द्वारा बनाई गई जाट आरक्षण संघर्ष समिति की 57 मेंबरी कमेटी की सदस्य और अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (महिला विंग) की राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संतोष दहिया ने जाट आरक्षण की सिफारिश को धोखा बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का प्रावधान नहीं है, वहीं, सरकार ने ओबीसी 27 प्रतिशत कोटे से जाटों को बाहर रखकर उन्हें गुमराह करने का काम किया है। उनके मुताबिक यह आंकड़ों का धोखा है, लेकिन संघर्ष समिति इस धोखे में आने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति ओबीसी कोटे से बाहर रहने के पक्ष में नहीं है। इसके खिलाफ 16 दिसंबर को जबरदस्त आंदोलन होगा। इसके लिए दिल्ली तक पैदल जत्थे नरवाना, जींद, हिसार और करनाल से रवाना होंगे और दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे।

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