वेतनमान की मांग पर हाईकोर्ट पहुंचे केयू के फिजिशियन

Karnal Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एकमात्र फिजिशियन डा. पवन कुमार ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के अड़ियल रुख के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाने का फैसला किया है। वर्ष 2009 से हरियाणा सरकार द्वारा छठे वेतन आयोग के लागू होने के बावजूद अकेले डा. पवन कुमार को संशोधित नियम के मुताबिक वेतन नहीं मिला है। इस हक को पाने के लिए वे पिछले 3 वर्ष से संघर्षरत है, लेकिन मामला वहीं का वहीं है। केयू वर्ष 2009 से अपने सभी गैर-शिक्षक कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के मुताबिक वेतन दे रही है, जबकि डा. पवन कुमार के केस में नियमों को ताक पर रखा गया है। हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत 10 वर्षों के अनुभव रखने वाले चिकित्सक को पे-बैंड-3 में रखा जाएगा, 15 वर्षों का अनुभव रखने वाले चिकित्सक को पे-बैंड-4 मिलना चाहिए। वर्ष 2009 में चिकित्सक पवन कुमार का अनुभव 22 सालों का था, जिसके हिसाब से उन्हें पे-बैंड-4 मिलना चाहिए, जबकि उन्हें पे-बैंड-3 के अनुसार वेतन दिया जा रहा है। डा. कुमार ने जब केयू प्रशासन से इसके बारे में जानकारी ली तो प्रशासन ने हरियाणा उच्च शिक्षा आयुक्त व वित आयुक्त को इसके लिए पत्र भेज दिया। पत्र के जवाब में हरियाणा उच्च शिक्षा आयुक्त का कहना है कि यह वेतन नियम सिर्फ हरियाणा स्वास्थ्य विभाग में लागू है। अब डा. कुमार का कहना है कि केयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों का वेतन हरियाणा सरकार के अंतर्गत तय की गई वेतन नीति से दिया जाता है, और वे यहां बतौर चिकित्सक कार्यरत हैं तो उन्हें उन पर यह नियम क्यों नही लागू हो रहा। इसके अतिरिक्त हरियाणा की अन्य सभी यूनिवर्सिटी में यह नियम लागू है। सिर्फ उन्हीं के लिए नियमों को दरकिनार कर दिया गया।

2009 से कर रहे हैं संघर्ष
डा. पवन कुमार का कहना है कि वे 2009 से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि केयू प्रशासन ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया है। सूचना के अधिकार के तहत आरटीआई भी लगा चुके है, जिसमें जवाब के नाम पर गलत सूचना दी गई। जिसके खिलाफ वे प्रथम अपील कर चुके है, उसकी सुनवाई इसी महीने में है।

मात्र एक हजार रुपये देकर सौंप दिया कार्यभार
-1987 में बतौर स्थायी चिकित्सा अधिकारी पदभार संभाला, नियुक्ति के दौरान उन्हें यह लिखित में दिया गया था कि उन्हें हरियाणा सरकार के वेतन नियमों के अनुसार वेतन व भत्ते दिए जाएंगे।
- 2006 में रेजिडेंट चिकित्सा अधिकारी बना दिया गया, जिसमें केवल प्रभार सौंप दिया गया, लेकिन वेतन ग्रेड नहीं दिया गया।
-2008 में केयू कार्यकारिणी परिषद में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी का पद पास किया गया और उन्हें इस पद का कार्यभार सौंप दिया गया। लेकिन पुन: सिर्फ प्रभार सौंपा गया लेकिन वेतन ग्रेड ज्यों का त्यों रहा।
- इन पदोन्नतियों के लिए केयू द्वारा उन्हें अतिरिक्त कार्यभार के लिए सिर्फ 1 हजार रुपये देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

आरटीआई में दी गई गलत सूचना
डा. पवन कुमार ने जब केयू इस्टेबलिशमेंट ब्रांच से 11 अक्तूबर को आरटीआई मांगी तो नई सूचना देने के बजाय पुरानी जानकारी दी गई। क्या 15 साल से नौकरी कर रहे मेडिकल अधिकारी को राज्य सरकार का ग्रेड वेतन दिया जा रहा है या नहीं। इसका जवाब देते हुए केयू द्वारा 2008 स्टेट गजट की फोटोकापी लगा दी गई जबकि फरवरी 2009 से संशोधित वेतन ग्रेड लागू हो रखा है।

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