अब पूरे साल उगाएं खरबूज और तरबूज

Karnal Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
घरौंडा। सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में चल रहे वेजिटेबल क्लस्टर सेमिनार का शुक्रवार को समापन हो गया है। सेमिनार के अंतिम दिन अधिकारियों और इस्राइल के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने किसानों को बेमौसमी खरबूजे व तरबूजों के उत्पादन व उनकी गुणवत्ता के बारे में जानकारी दी।
केंद्र के प्रोजेक्ट अधिकारी सतेंद्र यादव ने बताया कि बेमौसमी खरबूजों की फसल से किसानाें को लगभग पांच गुणा लाभ होता है। सब्जी केंद्र में तीन दिन से देश के नौ राज्यों के अधिकारी और इस्राइल से आए विशेषज्ञों को इंडो इस्राइल की तकनीक की जानकारी देने के लिए एक सेमिनार का आयोजन किया गया था। सेमिनार में बेमौसमी सभी सब्जियों के उत्पादन और गुणवत्ता के बारे में जानकारी दी और केंद्र का भ्रमण कराकर पैदावार करने की विधि बताई गई। अधिकारियों और इस्राइल के विशेषज्ञों ने कें द्र की सभी तकनीकों की तारीफ की।
प्रोजक्ट अधिकारी सतेंद्र यादव ने बताया कि बेमौसमी खरबूजों की फसल अक्तूबर माह में लगाई जाती है और दिसंबर माह में पक कर तैयार हो जाती है। पॉली हाऊस में बैमौसमी फसल लगाने से पांच गुणा ज्यादा पैदावार होती है और मुनाफा भी पांच गुणा होता है। उन्होंने बताया कि पॉली हाऊस की तकनीक का इस्तेमाल कर कम पानी व कम खर्च करके किसान बेहतर मुनाफा कमा सकता है। उन्होंने सेमिनार में अधिकारियों से उनके राज्यों के जलवायु, बजट और कर्मचारियों की जानकारी भी हासिल की। सेमिनार में इस्राइल की विशेषज्ञ मिस शैलीगंज ने अधिकारियों को हारमोंस, बैंबल बी और परागण क्रिया की विधियों के बारे में भी विस्तार से बताया।
उन्हाेंने बताया कि इस्राइल में परागण क्रि या बैंबल बी के द्वारा की जाती है, इससे मजदूरी बचती है और फसल की गुणवत्ता भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि भारत में बंबल बी का अभाव होने से परागण क्रिया मजदूरों से कराई जाती है। उन्हाेंने कहा कि अगर भारत में भी बंबल बी की सुविधा मिल जाए, तो किसानाें को काफी लाभ होगा। बंबल बी के अभाव पर बोलते हुए सहायक प्रोजेक्ट अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि विदेशों से बंबल बी आयात कराने के लिए केंद्र ने विभाग के उच्च अधिकारियों व सरकार को सिफारिश की है और उन्हाेंने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही बंबल बी आयात कराई जाएगी।

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