सरकारी अनुदान के बावजूद घालमेल कर रहे स्कूल

Karnal Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
करनाल। सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों में जमकर धांधली हो रही है। स्कूल प्रबंधन घाटा दिखाने के लिए सरकार और प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। जिले में 13 स्कूलों को सरकार से सहायता मिलती है। दो स्कूलों में धांधली पकड़ी जा चुकी है, जबकि अन्य भी संदेह के घेर में हैं। अब दयानंद मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (मेला राम) पर प्रशासन की आंखें जम गईं हैं।
सरकार से ग्रांट आने के बाद भी शिक्षकों को वेतन न देने की शिकायत डीसी दरबार में पहुंचने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की फाइल खोल दी है। उपायुक्त ने प्रबंधन को सख्त आदेश दिए हैं कि वेतन के लिए आई ग्रांट को अन्य मद में इस्तेमाल क्यों किया? इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। गड़बड़ी मिलने पर जिले के दो नामी स्कूलों जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल और नीलोखेड़ी स्थित ललिता शास्त्री गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर प्रशासन पहले ही कब्जा कर चुका है।
अब यदि मेला राम स्कूल प्रबंधन की शिकायत सही पाई गई, तो स्कूल के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। खास यह है कि नामी स्कूल होने के बावजूद इस स्कूल में नाममात्र छात्र हैं, जबकि स्कूल 12वीं तक का है। हालांकि प्रबंधन स्कूल की आमदनी कम होने का रोना रो रहा है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। स्कूल के पास करोड़ों की संपत्ति है और करीब 70 दुकानें हैं, जिनसे किराए के रुप में हर माह मोटी रकम आती है। प्रबंधन का कहना है कि स्कूल के पास सिर्फ 42 दुकानें हैं और हर माह सिर्फ 35 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। यह बात भी प्रशासन को हजम नहीं हो रही है। शिक्षक कई माह से वेतन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

स्कूल सिमटता गया, दुकानें बढ़ती गईं
स्कूल की दुकानों का आकार एक जैसा नहीं है। कोई दुकान अंदर घुसी हुई है तो कोई बाहर निकली हुई है। सूत्र बताते हैं कि हर साल गर्मी की छुट्टियों में प्रबंधन साठगांठ कर दुकानों को स्कूल के अंदर की जगह दे देता है और इसी अवधि में मनमानी की जाती है। दुकानें किराए पर देने का नियम भी समान नहीं है।

ये पहुंचे शिकायत लेकर
उपायुक्त के पास शिक्षक वीरेंद्र कुमार, भूपेंद्र कुमार, ओमप्रकाश, उत्तम चंद, मीना रानी, सरिता, धन्नीराम चपरासी, राजेद्र प्रसाद पहुंचे हैं। इनका कहना है कि उन्हें एक साल से वेतन नहीं मिला है। इसके लिए प्रबंधन पर आरोप है कि वह फंड नहीं होने की बात कहकर उनका वेतन लटकाए हुए हैं।

एक साल बाद मिलती है ग्रांट
सरकार से ग्रांट एक साल बाद आती है। बच्चों की फीस और दुकानों के किराए से शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जा सकता। 75 प्रतिशत सरकार देती है, पर 25 प्रतिशत स्कूल को देना होता है। स्कूल की 42 दुकानें हैं और इनसे कम ही किराया मिल रहा है। मैनेजमेंट का आदेश है कि सिर्फ सरकार से आने वाली राशि दे दी जाए, बाकी देने में असमर्थ हैं।
जगदीश खन्ना, प्रिंसिपल
दयानंद मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, करनाल।

डीसी के आदेश पर हो रही है जांच
उपायुक्त के आदेश पर स्कूल की जांच चल रही है, खामी मिलते ही कार्रवाई होगी। जिन स्कूलों को प्रशासन ने टेक ओवर किया है, वहां का प्रबंधन भी सही काम नहीं कर रहा था। गलत काम करने वालों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने मुहिम छेड़ रखी है। शिक्षकों को उनका हक दिलाएंगे।
सरिता भंडारी, जिला शिक्षा अधिकारी

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