प्रत्येक विश्वविद्यालय में बने हिंदी विभाग

Karnal Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
कुरुक्षेत्र। देश की राजभाषा हिंदी को पूरा मान-सम्मान तभी मिलेग, जब यह भाषा देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई जाएगी। इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग का गठन हो, लेकिन विडंबना यह है कि देश को आजाद हुए 60 साल से भी अधिक हो चुके हैं, लेकिन आज तक देशभर में स्थित आधे से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी विभाग का गठन नहीं हुआ। आज समय की मांग है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग का गठन हो। यह मांग देश की सबसे बड़ी पंचायत में राज्यसभा सांसद डा. रामप्रकाश ने उठाई। उन्होंने राज्यसभा में मांग उठाई की देश भर में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कई ऐसे हैं, जिनमें आज तक हिंदी विभाग का गठन नहीं हुआ, संस्कृत तो दूर की बात है। देशभर में 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 10 में हिंदी विभाग नहीं हैं और 27 विश्वविद्यालयों में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। इसी तरह से पूरे देशभर में राज्य कानून के तहत बने 451 विश्वविद्यालय हैं। इन विश्वविद्यालयों में पूरे देशभर में 232 ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जिनमें हिंदी विभाग नहीं हैं तथा 239 विश्वविद्यालय वे हैं, जिनमें संस्कृत विभाग नहीं। हरियाणा प्रदेश में 19 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 10 विश्वविद्यालयों में हिंदी तथा 10 में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। हिमाचल प्रदेश में 19 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 9 में हिंदी व 9 में ही संस्कृत के विभाग नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में 42 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 22 में हिंदी व 21 में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। राजस्थान में 48 विश्वविद्यालय हैं। इनमें से 24 में हिंदी विभाग ही नहीं हैं और 25 में संस्कृत के विभाग नहीं। पंजाब में 14 विश्वविद्यालय हैं, जिसमें से 6 विश्वविद्यालयों में हिंदी व 6 में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। दिल्ली में 5 विश्वविद्यालय हैं, जिसमें से 4 विश्वविद्यालयों में हिंदी व 4 विश्वविद्यालयों में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। इसी प्रकार गुजरात में 36 विश्वविद्यालय हैं, जिसमें 20 विश्वविद्यालयों में हिंदी व 20 विश्वविद्यालयों में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। जम्मू कश्मीर में 7 विश्वविद्यालय हैं, जिसमें 5 विश्वविद्यालयों में हिंदी व 5 विश्वविद्यालयों में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। बिहार में 15 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें 3 विश्वविद्यालयों में हिंदी व 4 विश्वविद्यालयों में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। छत्तीसगढ़ में 17 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 9 विश्वविद्यालयों में हिंदी व 9 में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। उत्तराखंड में 12 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 8 विश्वविद्यालयों में हिंदी व 8 में संस्कृत के विभाग नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इसी तरह से अन्य राज्यों में स्थित विश्वविद्यालयों की स्थिति खराब है। राज्यसभा सांसद डॉ. रामप्रकाश ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तो प्रत्येक विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग होना चाहिए, लेकिन स्थिति इससे भी गंभीर है। देशभर में स्थित 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से 10 ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जिनमें हिंदी विभाग है ही नहीं। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग स्थापित किया जाए ताकि देश की राजभाषा हिंदी को उसका मान-सम्मान मिल सके और लोग उसको जान सकें तथा पढ़ सकें।

Spotlight

Most Read

Kanpur

बाइकवालाें काे भी देना हाेगा टोल टैक्स, सरकार वसूलेगी 285 रुपये

अगर अाप बाइक पर बैठकर आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर फर्राटा भरने की साेच रहे हैं ताे सरकार ने अापकी जेब काे भारी चपत लगाने की तैयारी कर ली है। आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर चलने के लिए सभी वाहनों को टोल टैक्स अदा करना होगा।

17 जनवरी 2018

Related Videos

हरियाणा में इस नौकरी के लिए उमड़ा बेरोजगारों का हुजूम

हरियाणा में बेरोजगारी का क्या आलम है, ये देखने को मिला करनाल में। दरअसल मंगलवार को करनाल में ईएसआई हेल्थ केयर में चपरासी के 70 पदों के लिए प्रदेश भर से हजारों युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

17 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper