चालीस लाख खर्चे सीवरेज फिर भी ठप

Karnal Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
कैथल। करनाल रोड और जींद रोड के बीच स्थित आधा दर्जन कालोनियों में लोगों की सुविधा के लिए डाला गया सीवरेज अब दुविधा बन गया है। करीब 40 लाख रुपये की लागत से डाले गए लगभग एक किलोमीटर की लंबाई वाले सीवरेज मेें जहरीली गैस न केवल लोगों के लिए बल्कि जन स्वास्थ्य विभाग के लिए भी जी का जंजाल बन गई है। जहरीली गैस अब तक दो लोगों की जान ले चुकी है, वहीं कई बार विभाग द्वारा किए गए प्रयास में मजदूर बेहोश भी हुए हैं। ऐसे में मानवीय प्रयासों से इस सीवरेज के खुलने की उम्मीद कम ही है। इस कारण कालोनी के लोगों के लिए सीवरेज चालू न होने के चलते गंदे पानी की निकासी बड़ी समस्या बनी है। कालोनियों के निवासियों ने सरकार से मांग की कि इस बंद सीवरेज को खुलवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

तीन साल पहले डाला गया था सीवरेज
जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा करनाल रोड बाइपास स्थित जनकपुरी कालोनी, मायापुरी कालोनी, हरसौला बस्ती, क्योड़क बस्ती, अंबेडकर नगर सहित कौलेखां बस्ती को कवर करते हुए लगभग 900 मीटर से लंबा सीवरेज डाला गया था। सीवरेज को दो साल पूर्व इसे शुरू कर दिया गया, लेकिन सीवरेज में निकासी के लिए आवश्यक कनेक्शन न होने के कारण गंदा पानी बीच में ही फंस कर रह गया। बाद में इसमें जहरीली गैस बन गई। इसके बाद विभाग ने इसे खोलने का प्रयास किया, लेकिन 20 अप्रैल को दो मजदूर इस गैस की चपेट में आने से मौत का शिकार हो गए। इसके बाद दो-तीन बार विभाग ने इसे खोलने का प्रयास किया, लेकिन मजदूरों के बेहोश हो जाने के कारण इसे आगे खोलने की जहमत नहीं उठाई गई।

गलियों में बहने लगा पानी
कालोनियों में रहने वाले भले राम, अजय कुमार, विक्रम सिंह, महावीर सिंह, पाला राम, ओमप्रकाश, रामफल, प्रीतम, प्रताप सिंह, बलदेव सिंह, राजू, देवा राम आदि ने कहा कि विभाग ने यहां सीवरेज तो डाल दिया, लेकिन इसमें से पानी की निकासी का उचित प्रबंध न होने के कारण अब सीवरेज गलियों में ही मेनहोल के माध्यम से ओवरफ्लो हो गया है। इस कारण न केवल गलियाें से निकलना मुश्किल हो गया है, बल्कि उन्हें घरों के गंदे पानी की निकासी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। विभाग से कई बार इस संबंध में शिकायत की है, लेकिन बताया जा रहा है कि इस सीवरेज में गैस बनी हुई है। लोगों ने सीवरेज की समस्या के समाधान की मांग की है। इन कालोनियों में लगभग दस हजार से अधिक की आबादी रहती है।

कोट
करीब 40 लाख रुपये की लागत से यह सीवरेज डाला गया था। इसमें जहरीली गैस बन जाने के कारण दिक्कतें हैं। दो मजदूरों की मौत के बाद चार बार आदमी उतारकर इसे खोलने का प्रयास किया जा चुका है, लेकिन उनके बेहोश हो जाने के बाद अब कर्मचारी सीवरेज में उतरने से डरते हैं। विभाग को प्लानिंग भेजी गई है कि बिना आदमी के किसी तकनीक का प्रयोग करते हुए इस गैस को खत्म किया जाए। शीघ्र ही गैस को खत्म करवाकर इस सीवरेज को खुलवाया जाएगा।
टीसी गुप्ता, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग कैथल।

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