नहीं रहे जंग-ए-आजादी के सिपाही प्यारेलाल शर्मा

Karnal Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
पिहोवा। स्वाधीनता आंदोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथी रहे गांव भौर सैयदां के 102 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को उनका देहांत हो गया था। उनकी अंतिम यात्रा में पूरा गांव शामिल रहा और उनके निधन पर अनेक राजनैतिक पार्टियों, धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया है। श्मशान भूमि में पुलिस की टुकड़ी द्वारा उनके सम्मान में मातमी धुन बजाकर और हवाई फायर कर उन्हें अंतिम सलामी दी गई। प्रशासन की ओर से तहसीलदार मानसिंह, डीडीपीओ गगनदीप सिंह और डीएसपी नवीन कुमार ने पुष्पचक्र भेंट कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वित्त और सिंचाई मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा सहित इनेलो नेता व पूर्व मंत्री जसविंदर सिंह संधू और बलबीर सैनी ने भी प्यारे लाल की पार्थिव देह पर अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर अंतिम विदाई दी। प्यारेलाल शर्मा के पौत्र संजय हरित ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर थानाध्यक्ष राजसिंह, कुलदीप मुलतानी, साहब सिंह बाजवा, पूर्व सरपंच श्यामलाल शर्मा, बाबूराम, सतपाल, एडवोकेट डीपी दस्तूर, बलदेव मुकीमपुरा, गगन चीमा उपस्थित रहे।

गुलमर्ग जेल में बिताए थे चार साल
3 फरवरी 1911 को कैथल के राजौंद कस्बे में जन्मे प्यारेलाल शर्मा ने दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पडे़। रोहतक के स्वतंत्रता सेनानी रामसिंह जाखड़ द्वारा लिखित पुस्तक ‘हरियाणा के राजनीतिक इतिहास की झलक’ के पेज नंबर 364 के अनुसार 1929 में राजगुरु धुरेंद्र शास्त्री के जत्थे में शामिल होकर प्यारेलाल आजादी के आंदोलन में कूद पडे़। 1930 में उन्होंने नमक सत्याग्रह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उस समय अंग्रेजी सरकार ने शर्मा व उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया। तत्कालीन ब्रिटिश जज ने उन्हें दो साल की सजा सुनाकर गुलमर्ग जेल भेज दिया। जिसके बाद वे 28 जनवरी 1931 तक जेल में कैदी नंबर 5995 के रूप में रहे। बाद में एक समझौते के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद 1939 में जब हैदराबाद सत्याग्रह शुरू हुआ तो शर्मा ने उसमें भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद उन्हें एक बार फिर गुलमर्ग जेल भेज दिया गया। वहां से रिहा होने के बाद प्यारेलाल अपने गांव लौट आए और आर्य समाज के कार्यक्रमों सहित अनेक सामाजिक आयोजनों में भाग लेते रहे।

शर्मा के दो पुत्र सेना के जवान और दो किसान
इतना ही नहीं जंग ए आजादी के वीर सिपाही रहे शर्मा के चार बेटों में से सबसे बडे़ पुत्र नंद किशोर फौज में रहे। बाद में उनका निधन हो गया। दूसरे पुत्र नवल किशोर, नरेश कुमार दोनोें किसान हैं। शर्मा जी का सबसे छोटा पुत्र राजेंद्र प्रकाश सेना में सूबेदार मेजर के पद पर देश की सेवा कर रहा है। इतना ही नहीं स्व. शर्मा जी के पौत्र श्रेयल हरित भी सेना में भर्ती होने के लिए ली जा रही आफिसर ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अपने देश की सेवा करना चाहता हैं।

Spotlight

Most Read

Lucknow

अखिलेश यादव का तंज, ...ताकि पकौड़ा तलने को नौकरी के बराबर मानें लोग

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा देश की सोच को अवैज्ञानिक बताना चाहती है।

22 जनवरी 2018

Related Videos

हरियाणा में इस नौकरी के लिए उमड़ा बेरोजगारों का हुजूम

हरियाणा में बेरोजगारी का क्या आलम है, ये देखने को मिला करनाल में। दरअसल मंगलवार को करनाल में ईएसआई हेल्थ केयर में चपरासी के 70 पदों के लिए प्रदेश भर से हजारों युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

17 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper