वन विभाग की जमीन पर पौधे लगाने मना!

Karnal Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
करनाल। नगर सुधार मंडल से चल रहे विवाद को लेकर अब वन विभाग ने किनारा करना शुरू कर दिया है। शायद यही कारण रहा कि अधिकार संस्था को वन विभाग ने मुगल कैनाल पर पौधरोपण की अनुमति नहीं दी। बल्कि कहा है कि वह किसी ओर स्थान पर पौधरोपण करें, तो अनुमति मिल सकती है। इससे साफ है कि वन विभाग इस पचड़े में अब एक चुप सो सुख की राह पर चल पड़ा है।
खास बात यह है कि वन विभाग ने तब अनुमति देने से मनाही की, जबकि ये जमीन है कि वानिकी कार्य के लिए। ध्यान रहे कि मुगल कैनाल की संरक्षित वन भूमि पर मुगल कैनाल मार्केट फेज दो बनाने की तैयारी है। इसको लेकर 18 नवंबर को मुख्यमंत्री से आधारशिला भी रखाई जा चुकी है। इसी बीच यह विवाद शुरू हो गया कि वन विभाग की वानिकी के लिए संरक्षित भूमि पर कोई भी गैर वानिकी कार्य करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति लेना जरूरी है और यह अनुमति लिए बिना ही नगर सुधार मंडल मार्केट बनाने की तैयारी में था।

कई दिन सुर्खियों में रहा विवाद
नगर सुधार मंडल और वन विभाग का यह आपसी विवाद कई दिनों तक चर्चा में रहा और आखिर में नगर सुधार मंडल को साफ करना पड़ा कि वह केवल गंदे नाले को ढकना चाहते हैं और इसके लिए ही अनुमति मांगी गई है। मार्केट बनाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी के बाद ही काम शुरू होगा, लेकिन इस विवाद के बीच में ही शहर की कुछ संस्थाओं ने इस भूमि पर पौधरोपण कर इसे हरी-भरी बनाने के लिए मुहिम शुरू करने की बात कही। इस पर भी अब वन विभाग आनाकानी कर रहा है।

अनुमति देने से कर दी विभाग ने मनाही
अधिकार संस्था के महासचिव एवं आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने 20 नवंबर को वन मंडल अधिकारी से मुगल कैनाल फेज-2 की खाली पड़ी जमीन पर पौधे लगाने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा था कि यह वन विभाग की प्रोटेक्टिड फोरेस्ट लैंड है और संस्था यहां त्रिवेणी लगाकर हरियाली बढ़ाना चाहती है पर वन मंडल अधिकारी ने संस्था को अनुमति देने से मना कर दिया। अधिकार संस्था को लिखे पत्र में वन अधिकारी ने कहा है कि नगर सुधार मंडल ने इस भूमि के बारे में गैर वानिकी कार्य करने का प्रस्ताव भेजा है, इसलिए इस क्षेत्र को पौधरोपण करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

लोगों को गुमराह कर रहे हैं विभाग
एडवोकेट शर्मा का कहना है कि नगर सुधार मंडल व वन विभाग लोगों को गुमराह कर रहे हैं। अगर वन विभाग को अनुमति नहीं देनी है और गैर वानिकी कार्य के लिए अनुमति देनी ही थी, तो फिर विवाद क्यों बनाया और लोगों को गुमराह क्यों किया। इतना ही नहीं पहले तो मुगल कैनाल फेज एक मार्केट बनी है, उसकी अनुमति आज तक क्यों नहीं हुई है और यह मामला केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जांच के दायरे में है। ऐसे में यहां वानिकी कार्य करने में क्या हर्ज हो सकता था?

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