गोदामों में स्पेस गोदमनहीं लग पाया मिलर्स का करोड़ों रूपये का चावल गोदामों में

Karnal Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
कैथल। एफसीआई के गोदामों में चावल के डंप न होने के कारण मिलर्स को कैथल में करोड़ाें रुपये का चावल वापस मिलों में उतारना पड़ा है। नवंबर माह में 20 प्रतिशत चावल एफसीआई को सौंपे जाने की शर्त के चलते मिलर्स द्वारा नवंबर के अंतिम दिनों में एफसीआई को चावल सौंपे जाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन चावलों की जांच कार्य सहित गोदामों में जगह न होने के कारण अंतिम दिन करोड़ों रुपये के चावल से भरी हुई करीब 50 से 60 गाड़ियां वापस हो गईं। मिलर्स में एफसीआई द्वारा तैयार हुए चावल को न लेने से काफी रोष है। चीका में तो मिलर्स ने जाम तक लगाने की चेतावनी दे डाली। उधर, एफसीआई अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध स्पेस एवं नियमानुसार ही चावल लिया जाएगा।
मिलर्स को समय पर 20 प्रतिशत चावल के गोदामों में डंप न होने के कारण होल्डिंग चार्जेज का डर सता रहा है। विभिन्न एजेंसियों द्वारा एक प्रतिशत या इससे अधिक होल्डिंग चार्ज लगाया जा सकता है।

तीन बजे तक नहीं खुला गेट
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान मांगे राम खुरानिया सहित अन्य मिलर्स ने बताया कि बृहस्पतिवार को विभिन्न अधिकारियों से शिकायत के बावजूद एफसीआई अधिकारियों के रुख में शुक्रवार को कोई फर्क नजर नहीं आया। शुक्रवार को तीन बजे तक भी संबंधित गोदाम का गेट नहीं खुला। इसके बाद काफी कम संख्या में गाड़ियां डंप हो पाईं। इस कारण करीब 50 से 60 गाड़ियां वापस मिलों में ले जानी पड़ीं। एक गाड़ी में करीब 6 लाख का चावल लोड है। सभी मिलर्स द्वारा इस समय करीब 200 गाड़ियों का चावल तैयार किया गया है। चावल के तैयार होने के बावजूद गोदाम में नहीं लग पा रहा है। जिस कारण उन्हें बाद में होल्डिंग चार्जेज लगाए जाने का डर सता रहा है। उधर, एफसीआई के मैनेजर रामनाथ शर्मा ने कहा कि डिपो में जितनी चावल की गाड़ी लगने की जगह थी अधिकतर पूरी हो गई है। जिला प्रबंधक से बातचीत कर मिल मालिकाें की चावल गाड़ी डंप करने की अधिकतर समस्या को सुलझा लिया गया है और मिल मालिकाें को जगह उपलब्ध करवाई जाएगी।

गुहला में दी जाम की चेतावनी
गुहला-चीका। भारतीय खाद्य निगम की तानाशाही से दुखी होकर राइस मिल मालिकाें ने चीका-पिहोवा मार्ग जाम करने की चेतावनी दी है। मिल मालिक हंसराज सिंगला, नरेश कुमार, आसु कुमार, सुभाष, नानू राम, रामेश्वर दास, विजय कुमार, पोला मित्तल, पितरसेन आदि ने बताया कि अधिकारियों की मनमानी के चलते उन्हें अपने चावल की गाड़ी लगवाने के लिए दो-दो दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे उनके पैसे की बर्बादी तो होती है। राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष हंसराज सिंगला ने बताया कि अब नवंबर माह में कस्टम मिलिंग के चावल की मिल मालिकाें को कुल धान की 20 प्रतिशत में 500 गाड़ी चावल देनी बनती है। इसमें से 500 गाड़ी की ही जगह उपलब्ध करवाई गई है, शेष 400 गाड़ी जगह न मिलने की वजह से मिल मालिक निगम के दरवाजे पर लिए खड़े हैं। लेबर की कमी और अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह भी नहीं लग पाई। जब राइस मिल एसोसिएशन ने निगम प्रबंधक से यह पूछा कि जगह न होने की एवज में मिल मालिकाें को लिखित में दिया जाए, ताकि उच्चाधिकारियाें से जगह की मांग की जा सके।

कोट
एफसीआई द्वारा डिपो में नियमों का पालन करते हुए उपलब्ध स्पेस अनुसार ही चावल लिया जा रहा है। जिन मिलर्स की गाड़ियां तैयार हैं और स्पेस न होने के कारण चावल डंप नहीं हो पाया, एफसीआई द्वारा उन्हें लिखकर दिया जाएगा, ताकि उन पर होल्डिंग चार्ज न लगे। विशेष ट्रेन से गोदामों में रखे चावल की मूवमेंट के बाद ही गोदाम में जगह बनती है।
आरके सिंह, डीएम एफसीआई

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