भीड़ से अलग एक सख्शियत

Karnal Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
ढुंढवा, 27 नवंबर
कलायत से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित गांव ढुंढवा निवासी 60 वर्षीय रौनक राम वर्षों की साधना से विभिन्न पुराने रोगों से पीड़ित लोगों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। अपने गुरू गांव के ही आश्रम के संत अमरानंद से मिले आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से दवाएं बनाने के ज्ञान के आधार पर रौनक राम पीड़ित मानवता की सेवा कर रहे हैं तथा मामूली लागत पर वे कई असाध्य रोगों का ईलाज कर चुके हैं। गरीब लोगों को निशुल्क दवाएं देकर उनका भी ईलाज कर रहे हैं। गांव के लोगों ने रौनक राम की के ईलाज के परिणामों को देखते हुए गांव में ही उन्हें एक चौथाई एकड़ जमीन भी उपलब्ध करवा दी है। जहां अब आश्रम बनाने के अलावा हनुमान मंदिर के निर्माण कार्य को शुरू भी कर दिया है।
53 वर्ष पूर्व शुरू हुई थी रौनक राम की अराधना:-चतुर्दशी के अवसर पर गांव में अपने गुरू के नाम से बनाए गए अमरानंद आश्रम में आयोजित भंडारे में पहुंचे लोगों की सेवा करते हुए रौनक राम ने बताया कि गांव में आश्रम में संत अमरानंद रहते थे। जो विख्यात कवि ही नहीं दुर्लभ दवाओं के ज्ञाता थे। सात साल की उम्र में उसने संत अमरानंद की सेवा शुरू की थी। वे उनके बताए अनुसार जड़ी बूटियों के मिश्रण के बाद कूट-कूट कर दवाएं बनाते थे। धीरे-धीरे उनका इस ओर रूझान बढ़ता गया तथा वर्ष 1972 तक उनके गुरू अमरानंद ने उन्हें कई असाध्य रोगों का ईलाज करने एवं जड़ी बूटियों की जानकारी के लिए सदियों पुराने ग्रंथ भी दे दिए। इसके बाद अमरानंद इस दूनिया से चले गए। उनके जाने के बाद से आज तक वे विभिन्न रोगों के ईलाज के लिए दवाएं दे रहे हैं।
ग्रहस्थ जीवन एवं साधना एक साथ:-रौनक राम ने बताया कि लोगों के ईलाज के साथ-साथ ग्रहस्थ जीवन भी साथ-साथ चला। लेकिन उन्होंने ईलाज के माध्यम से हुई आय को कभी भी अपने घर में प्रयोग नहीं किया। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए वे शुरू में टेलर का काम करते थे। बाद में सिलाई मशीनों को ठीक करने का काम करके गुजारा चलाया। इस दौरान गरीबी के चलते असहनीय परेशानियां आईं, लेकिन सेवा का यह कार्य निर्बाध रूप से चला। रोगों से ठीक होने पर लोगों ने उन्हें लाखों रूपये देने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कोई बड़ी राशि स्वीकार नहीं की।े
कई असाध्य रोगों का ईलाज किया:-रौनक राम प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा वर्षों की साधना के बाद तैयार ज्ञान के आधार पर शरीर के किसी भी हिस्से में बंद हुई नसों को खोलने, पटनल, पथरी, लिकोरिया, पुराने सिरदर्द, प्राचीन बुखार सहित कई असाध्य रोगों का ईलाज करते हैं। आश्रम में पहुंचे गांव के सरपंच चंद्रभान, सुशील कुमार, गांव जुलाना से आए जयनारायण, गांव के ही शमशेर सिंह संधू, लांबा खेड़ी से आई प्रेमलता, कैथल से धनपति, अनिता, इंदरो, बाला देवी ने बताया कि उनमें पथरी, रीड की हड्डी, एलर्जी, ऊल्टी लगने, प्राचीन बुखार सहित सभी को अलग-अलग रोग थे। यहां से मिली आयुर्वेदिक दवाओं से उन्हें काफी फायदा पहुंचा है। जो उन्हें मामूली कीमतों पर मिली हैं। जबकि वे कई अस्पतालों के चक्कर लगा चुके थे।
गांव के ही 40 सहायकों की मदद से तैयार करते हैं दुर्लभ दवाएं:-रौनक राम ने बताया कि आस-पास के वातावरण में मौजूद जड़ी-बूटियों को एकत्रित करने, उन्हें कूट-कूट कर दवाओं को बनाने के कार्य में इस समय 40 गांव वासी उनकी सहायता करते हैं। जो काफी मेहनत से इन दवाओं को बनाते हैं। इन दवाओं के लिए लागत ही ली जाती है। जो भी आय होती है, उससे दवाएं ही बनती हैं। इसके साथ ही अब लोगों के सहयोग से हनुमान जी के मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया है। उनके गुरू अमरानंद जी हनुमान जी की अराधना करते थे। उनके जाने के बाद गांव वासियों को आश्रम सहित सभी प्रकार की संपत्तियां सौंप कर जाएंगे। परिवार के किसी भी सदस्या को यह मलकीयत नहीं देंगे। इस समय भी पैसे के लेन-देन का काम गांव के ही कुछ लोग संभालते हैं।

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