वन विभाग की जमीन पर हुडा भी काबिज

Karnal Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
करनाल। वन विभाग इतनी गहरी नींद में था कि पंद्रह साल तक यह पता नहीं चला कि उनकी जमीन पर हुडा विभाग ने सेक्टर विकसित दिया है। इतना ही नहीं यह सेक्टर आबाद हो गया और यहां लोगों ने कई साल पूर्व ही आलीशान बंगले और कोठियां भी बना ली। अब वन विभाग को याद आया है कि यह जमीन संरक्षित वन क्षेत्र के तहत आती है। सारा मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने आनन-फानन में कार्रवाई शुुरू की और वन विभाग के वित्तायुक्त एवं सचिव से पत्र लिखकर हुडा (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए अनुमति मांगी है। इस कारनामे में हुडा विभाग भी कम दोषी नहीं है। उनको पहले से पता था कि यह जमीन संरक्षित वन क्षेत्र के तहत आती, लेकिन ना तो उन्होंने बदले में वन क्षेत्र विकसित करने के लिए जमीन दी और चुपके से वन विभाग की जमीन पर सेक्टर विकसित कर दिया।

आरटीआई में हुआ था कब्जे करने का खुलासा
दरअसल, यह मामला आरटीआई में सामने आया। जब आरटीआई मांगी गई, तो ही वन विभाग की नींद भी खुली कि यह क्या हो गया? आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने वन विभाग से सूचना मांगी कि सेक्टर-आठ और नौ स्थापित करने के लिए हुडा ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा किया है, तो इस संबंध में जानकारी दी जाए। इस पर वन विभाग ने खुलासा किया है कि सुरक्षित वन क्षेत्र को हुडा ने गलत तरीके से बेच दिया है। इसलिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ केस दायर करने की अनुमति मांगी गई है। इस खुलासे के साथ ही वन विभाग ने कार्रवाई भी शुरू की।

ऐसे किया हुडा ने जमीन पर गोलमाल
हुडा ने करीब बीस साल पहले वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर सेक्टर काट दिया है। इतना ही नहीं यहां आलीशान कोठियां भी बन चुकी हैं और कब्जा छुड़ाने में वन विभाग के पसीने छूट रहे हैं। हुडा ने वन विभाग के सुरक्षित वन क्षेत्र बुढ़ाखेड़ा माइनर और ओल्ड बादशाही नहर पर सेक्टर-8 और 9 काटा था। जिस समय हुडा ने जमीन पर कब्जा किया, उस समय पीडी वर्मा हुडा के संपदा अधिकारी, पंकज कुमार कार्यकारी अभियंता और आरएस नारंग कनिष्ठ अभियंता थे, लेकिन तब वन विभाग को यह याद नहीं आया कि उनकी जमीन पर कैसे कब्जा हो गया और इसे अभी खाली करा लिया जाए। सेक्टर बने अब अरसा बित गया है, तो वन विभाग हाथ पैर मार रहा है।

यह हो रहा वन विभाग को नुकसान
इस कब्जे के बाद वन विभाग के कई प्रोजेक्ट सिर नहीं चढ़ सके, क्योंकि पौधे लगाने के लिए रिजर्व रखी गई जमीन पर सेक्टर काट दिया गया था। अब वन विभाग ने तीनों पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1926 के तहत अभियोग चलाने की अनुमति मांगी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक हरियाणा वन विभाग हरियाणा सरकार ने वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव हरियाणा सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि अभियोग चलाने की अनुमति दी जाए, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। पत्र में कहा गया है कि करनाल में हुडा (हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) में संपदा अधिकारी के पद पर काबिज रहते हुए वर्मा ने सुरक्षित वन क्षेत्र को ही बेच दिया। इस कार्य में उनका सहयोग करने पर तब के कार्यकारी अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ भी अभियोग चलाने की अनुमति मांगी गई है।

पता चलते ही शुरू की कार्रवाई
जैसे ही हमें पता चला कि वन विभाग की संरक्षित वन भूमि पर कब्जा किया गया है। हमने कार्रवाई शुरू कर दी है। मेरे से पहले जो अधिकारी रहे हैं, उन्होंने क्यों उदासीनता बरती, हम कह नहीं सकते। मैंने पता चलते ही इस पर कार्रवाई की है और वित्तायुक्त से मुकदमे की अनुमति मांगी है। इससे पहले विभाग को नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। नियमानुसार विभाग को बदले में इतनी ही जमीन वन क्षेत्र के लिए देनी चाहिए थी।
नवदीप हुड्डा, वन मंडल अधिकारी, करनाल।

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