मिडिल तक दाखिला लेना अब आसान

Karnal Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
करनाल। शिक्षा विभाग ने अब मिडिल कक्षा तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। अब अभिभावकों को अपने बच्चों के दाखिले के समय जन्म प्रमाणपत्र को लेकर निगम के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जन्म प्रमाणपत्र के लिए अब कोई सख्त कानून नहीं है।
अब शिक्षा विभाग ने जन्म प्रमाण प्रक्रिया को बहुत ही सरल बना दिया है। यह सुविधा पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए है। आरटीई के तहत हर 14 साल तक के बच्चों के लिए सुलभ व अनिवार्य शिक्षा दिए जाने का प्रावधान हैं। कई प्रकार की परेशानियों के चलते बच्चे पढ़ाई-लिखाई से वंचित रह जाते थे। शिक्षा स्तर को ऊपर उठाने के लिए आए दिन किसी ना किसी रुप में सरकार द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। पहले दाखिले के समय अभिभावकों को र्कई प्रकार की खाना पूर्ति करनी पड़ती थी। इनको पूरा करने में अभिभावकों खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जन्म प्रमाणपत्र को बनवाने के लिए भी अभिभावकों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे।

यह थी प्रक्रिया
एडमिशन के समय जन्म प्रमाण पत्र को लेकर कई प्रकार के सख्त नियम थे। जो बच्चा किसी दूसरे राज्य से पढ़ाई करके आया है, तो उसे काउंटर हस्ताक्षर कराने होते थे। अगर कोई बच्चा किसी अन्य स्कूल से पढ़ाई करके आया है, उसे जिला शिक्षा अधिकारी से हस्ताक्षर कराने होते थे। जो बच्चा आसपास के स्कूल से पढ़ाई करके आया है, उसे उस स्कूल सें प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता था। यह सब भी न हो सके तो गांव के चौकीदार, दाई व आंगनबाड़ी केंद्र से जन्म दिन के बार में लिखवाकर लाना पड़ता था।

यह नियम अब विभाग से हटाए
अब पहली से आठवीं तक इन सब नियमों को खत्म कर दिया है। अब मिडिल तक की कक्षा में जो भी अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले एक स्कूल से किसी दूसरे स्कूल में कराना चाहते हैं, उनकी यह सब मुश्किलें खत्म कर दी गई हैं। एडमिशन के समय माता-पिता अंदाजे से ही जन्म के बार में बता सकते हैं। इसे ही स्कूल को मानना पड़ेगा। जिस कक्षा में बच्चा दाखिला ले रहा है उसके हिसाब से भी उम्र को आंक कर नोट कर लिया जाएगा।

अभिभावकों को होती थी मुश्किल
इस प्रक्रिया में अनपढ़ माता-पिता व प्रदेशों में काम काले माता-पिता को सबसे ज्यादा मुश्किलें होती थीं। क्योंकि पढ़े लिखे अभिभावक बच्चों से जुड़ें किसी कागज या प्रमाण पत्र को संभाल कर रखते हैं। इसके विपरीत अनपढ़ अभिभावक कई बार ऐसा करने में सक्षम नहीं हो पाते। ऐसे प्रमाण पत्रों को किसी परिस्थिति में गुम कर देते हैं। जब बाद में इनको बनवाने की नौबत आती है, तो दफ्तरों के चक्कर काटने में लापरवाही कर देते हैं। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। जिस कारण बहुत से बच्चें स्कूलों में दाखिला लेने से वंचित रह जाते थे।

प्रमाणपत्र को लेकर अनिवार्यता में छूट
जन्म प्रमाणपत्र के लिए कोई सख्त कानून नहीं है। पहली से लेकर आठवीं तक इसमें बहुत ढील कर दी गई है। जिन अभिभावकों के पास अपने बच्चों के जन्म से जुड़ा कोई प्रमाण पत्र नहीं हैं तो वे बिना समस्या के आसानी से अपने बच्चों के दाखिले किसी भी सरकारी स्कूलों में करवा सकते हैं। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर अब उनको कोई समस्या नहीं होगी।
उदय प्रताप सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकरी

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