फास्ट फूड खाकर बिताए दो दिन

Karnal Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
कैथल। नासा टूर पर गए बच्चों के दल में शामिल कैथल के तीन होनहार शनिवार रात घर पहुंचे। जहां उन्होंने परिजनों के साथ नासा टूर के अनुभवों को साझा किया। न्यूयार्क में सैंडी तूफान के दौरान होटल में बिताए पल भी बच्चों ने साझा किए। डा. राजेश गोयल के नौंवी कक्षा में पढ़ रहे पुत्र गणपति गोयल और अशोक बंसल की ग्यारहवीं में पढ़ रही बेटी याशिका बंसल ने कहा कि अमेरिका में न केवल मौसम का पूर्वानुमान सटीक रहता है, बल्कि वहां राहत कार्य भी कहीं आगे हैं। ग्राउंड जीरो सहित तूफान के कारण जहां पानी भर गया था, वहां सिर्फ दो दिन बाद सब कुछ सामान्य नजर आया, जो उनकी विज्ञान एवं तकनीक में महारत के चलते हो पाया है। बच्चों ने बताया कि जैसे ही वे 29 अक्तूबर को न्यूयार्क एयरपोर्ट पर पहुंचे, उसी समय तूफान की चेतावनी जारी होने के बाद फ्लाइट कैंसल होने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद होटल में दो दिन रुके। जहां बिजली चली गई थी। फास्ट फूड खाकर समय बिताया, लेकिन अमेरिकी व्यवस्था के चलते उन्हें एक पल भी डर नहीं लगा और न ही कोई परेशानी आई।
याद रहेगा हर पल
गणपति एवं याशिका ने बताया कि नासा का टूर अविस्मरणीय रहा। वहां पहुंचकर पता चला कि अमेरिका अंतरिक्ष में किस तरह से शोध करता है। उन्होंने अंतरिक्ष में जाने वाले शटल, अन्य उपग्रहों के अलावा इन्हें बनाए जाने की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही 31 अंतरिक्ष यात्रा कर चुके नासा यान को भी देखा। बच्चों ने बताया कि उन्होंने शटल लांचिंग पैड, लांचिंग के लिए हाईड्रोजन गैस के कुएं, शटल यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यान पर नजर रखने वाली बड़ी टेलीस्कोप, बड़े रॉकेट, कैप्सूल उन्हें तैयार करने की विधि, ग्रेविटी आदि की जानकारी ली। इसके साथ ही अंतरिक्ष यान के उड़ान की शुरुआत में होने वाली कंपन की प्रैक्टिस के लिए बनाए गए विशेष प्रकार के यान में बैठने का भी अनुभव प्राप्त हुआ। इसके अलावा क्योरिसिटी प्रोजेक्ट, चांद को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया। अंतरिक्ष में जा चुके यात्रियों सहित उस यान के हादसे के बारे में जानकारी मिली, जिसमें कल्पना चावला सहित अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी। इन सभी की फोटो सहित स्मृतियां नासा में मौजूद हैं।

कृत्रिम अंतरिक्ष यात्रा पर भी गए बच्चे
याशिका ने बताया कि नासा टूर पर एक विशेष प्रकार से तैयार किए गए प्रोग्राम के तहत वे अंतरिक्ष टूर पर गए। इस प्रोग्राम मेें शामिल होकर लग रहा था कि वास्तव में पृथ्वी से ऊपर उठ गए हों। इस प्रोजेक्ट का कमांडर गणपति को बनाया गया था, लेकिन पृथ्वी से ऊपर जाते ही सही संचालन न होने के कारण अंतरिक्ष यान क्रैश हो गया। इसके अलावा गणपति ने रॉकेट के माध्यम से निशाना लगाने की प्रतियोगिता भी जीती। इसमें उसे स्मृति चिन्ह भी दिया गया। बच्चों के अनुसार वहां काफी संख्या में भारतीय बच्चे भ्रमण के लिए जाते हैं। बच्चों ने बताया कि एक विशेष प्रकार की टेलिस्कॉप के माध्यम से उड़ान भरते समय अंतरिक्ष यान पर नजर रखी जाती है। यदि यह अपनी दिशा से जरा भी भटक जाता है, तो स्वयं ही इस यान को नष्ट करने की ऑप्शन होती है। इसमें सभी अंतरिक्ष यात्रियों की जान गंवाने के लिए भी तैयार रहना पड़ता है। याशिका ने बताया कि जीरो ग्राउंड पर जहां दो दिन पहले पानी भर गया था, दो दिन बाद उसे एकदम से सामान्य कर दिया गया।

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