पर्ची तो कटती है, लेकिन डाक्टर नहीं मिलते

Karnal Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। घंटों तड़पते रहे दर्द से, मगर इलाज के नाम पर जिला के एक मात्र सिविल अस्पताल में मरीजों को डाक्टर नहीं मिला। इन मरीजों में विकलांग, बुजुर्ग, महिलाएं और दर्जनों अन्य मरीज फिजीशियन की इंतजार में बाट जोहते रहे, लेकिन उन्हें यहां न इलाज करने वाला मिला और न कोई इन्हें ये बताने वाला कि उन्हें ओपीडी की पर्ची कटवाने के बाद किससे इलाज कराना होगा। शनिवार को एक विवाद उठने के बाद जिला के एकमात्र फिजीशियन को कुरुक्षेत्र के सिविल अस्पताल से पिहोवा में 14 दिन के लिए डेपुटेशन पर भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक उनकी जगह किसी भी फिजीशियन को यहां नियुक्त नहीं किया गया। इस समय नेत्र रोग विशेषज्ञ और फिजीशियन के कमरों पर ताले जड़े हैं। पिछले तीन दिन में सैकड़ों मरीज फिजीशियन नहीं मिलने के कारण अस्पताल प्रशासन को कोसते हुए घर लौट रहे हैं। इन मरीजों का कहना है कि लंबी दूरी तय कर वे सरकारी अस्पताल में इस आस से पहुंचते हैं कि उन्हें यहां स्वास्थ्य लाभ मिलेगा, लेकिन अस्पताल में जो हालात हैं, उससे उनका मर्ज बढ़ रहा है। लंबी लाइनों में लगने के बाद पांच रुपये की ओपीडी स्लिप बनवाने पर उन्हें ये उत्तर मिलता है कि फिजीशियन नहीं है, उसकी जगह अस्पताल के सर्जन से चेकअप करा लो। परेशान मरीजों ने सरकार और जिला प्रशासन के साथ चीफ मेडिकल आफिसर से मांग की है कि अस्पताल में फिजीशियन की व्यवस्था कराई जाए। डाक्टरों का टोटा जिला के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में पिछले काफी समय से बना हुआ है। इस अस्पताल में लंबे समय से कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञ और चिकित्सा अधीक्षक डा. केके चावला इसी वर्ष इस्तीफा देकर एलएनजेपी को अलविदा कह चुके हैं। अस्पताल में गड़बड़ाए हालातों के कारण और भी कई डाक्टर एक के बाद एक करके नौकरी छोड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, चिकित्सा अधीक्षक डा.केके चावला के इस्तीफा देने के बाद कार्यभार संभालने वाले प्रसिद्ध नेत्ररोग विशेषज्ञ डा. मुकेश ने भी अस्पताल से डेपुटेशन लेकर भगत फूल सिंह मेडिकल कालेज में कार्यभार संभाल लिया है। एलएनजेपी अस्पताल में नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ का पद लंबे समय से पहले ही खाली पड़ा है। वहीं, अस्पताल में तैनात दो नेत्र रोग विशेषज्ञों में से मरीजों को एक भी उपलब्ध नहीं है। जहां नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. मुकेश डेपुटेशन पर सोनीपत में हैं, वहीं दूसरी नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. अनीता भी दो माह की छुट्टी पर हैं। अस्पताल के प्रसूति विभाग में डाक्टरों की कमी पहले से है। सरकारी अस्पताल के प्रसूति विभाग में इन चार डाक्टरों सहित चार स्टाफ नर्सों की आवश्यकता पिछले काफी समय से हैं। अस्पताल के प्रसूति विभाग में डिलीवरी के सर्जिकल केस के लिए चार नर्सों की डिमांड कई बार हो चुकी है, लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई।

ये डाक्टर दे चुके हैं इस्तीफा
कुरुक्षेत्र एलएनजेपी में लंबे समय तक सेवाएं दे चुके प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ और डा. केके चावला के अलावा इस साल डा. हितिका, डा. सुमित इस्तीफा देकर जिला अस्पताल से नौकरी छोड़ चुके हैं।

इस साल इनके हुए तबादले और डेपुटेशन
अस्पताल से इस साल तीन डाक्टरों और दो डाक्टर डेपुटेशन पर गए। मेडिकल आफिसर डा. अमित शर्मा का तबादला जिला के गांव गूढ़ा में हुआ, जबकि डा. संदीप राणा और डाक्टर चारु को धुराला में ट्रांसफर किया गया है। इसके अलावा डा. मुकेश सोनीपत और डा. शैली पिहोवा में डेपुटेशन पर भेजे गए हैं। इनमें डा. मुकेश ने जहां अपनी मर्जी से डेपुटेशन ली है, वहीं डा. शैली को एक विवाद की वजह से सीएमओ के आदेश पर भेजा गया है।

प्रसूति विभाग और इमरजेंसी में भी टोटा
गर्भवती महिलाओं के प्रति काफी संजीदा दिख रही राज्य और केंद्र सरकार के दावों पर एलएनजेपी अस्पताल का प्रसूति विभाग पानी फेर रहा है। यहां लंबे समय से चार मेडिकल आफिसर की आवश्यकता है, लेकिन आज तक ये डिमांड पूरी नहीं हुई। यहां खास बात ये है कि अस्पताल के प्रसूति विभाग में इस समय चार स्पेशलिस्ट डाक्टर तो हैं, लेकिन मेडिकल आफिसर का टोटा बरकरार है। मेडिकल आफिसर की ड्यूटी 24 घंटे होती है, जबकि स्पेशलिस्ट ड्यूटी टाइम के बाद काल पर तुरंत उपलब्ध होते हैं। फिलहाल ओपीडी और काल पर स्पेशलिस्ट तो हैं, मगर 24 घंटे में अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी देने के लिए अभी तक चार एमओ तैनात नहीं हुए।

कहां से लाएं नए डाक्टर : एमएस
जिला अस्पताल में फिजीशियन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, ईएनटी और एमओ के खाली पदों के बारे में एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. सुरेंद्र राणा ने माना कि अस्पताल में स्टाफ और डाक्टरों का टोटा है। डाक्टर लाएं भी तो कहां से लाएं, क्योंकि उन्हें कम ही वेतन मिलता है। वेतन कम होने की वजह से ये डाक्टर प्राइवेट में जाना पसंद करते हैं। अस्पताल की ओर से डिमांड भेजी गई है, अब कब तक पूरी होगी, इसके बारे में नहीं कहा जा सकता।
मरीजों और परिजनों ने रोया दुखड़ा
छाती दर्द से पीड़ित विकलांग इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उसका इलाज अस्पताल के फिजीशियन डा. शैली के पास चल रहा है, लेकिन सुबह से उनके परिजन इधर से उधर चक्कर काट रहे हैं। दो घंटे बाद भी उनके इलाज के लिए डाक्टर उपलब्ध नहीं हुआ। वहीं, एक अन्य महिला मरीज ने बताया कि वे पिछले तीन दिन से चक्कर लगा रहे हैं। इधर हरजिंदर कौर का कहना है कि उसके बेटे का जन्म चार अगस्त को हुआ था, पिछले तीन माह से उनके परिवार वाले जन्म प्रमाण पत्र के लिए धक्के खा रहे हैं, लेकिन आज तक यह काम नहीं हो सका।

फिजीशियन के पास 1200 ओपीडी
एलएनजेपी अस्पताल में सबसे अधिक ओपीडी फिजीशियन के पास है। एलएनजेपी अस्पताल की रजिस्ट्रेशन ब्रांच से मिली जानकारी के अनुसार एक से 31 अक्तूबर तक 1200 ओपीडी अकेले फिजीशियन की रही, जबकि चर्मरोग विशेषज्ञ पद एक की ओपीडी 1039, सर्जन पद दो की ओपीडी 1031, बाल रोग विशेषज्ञ पद दो 835, प्रसूति डिलीवरी और ओपीडी विशेषज्ञ पद चार ओपीडी संख्या रही 802, हड्डी रोग विशेषज्ञ पद एक के पास 697 ओपीडी रही। अस्पताल प्रशासन की जानकारी में फिजीशियन केस की संख्या होने के बावजूद अभी तक जिला के इस अस्पताल में पद को खाली छोड़ा हुआ है, जबकि मरीजों की समस्या को ध्यान में रखकर इस पद पर तत्काल नियुक्ति होनी चाहिए।

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