हरियाणा से दिल का रिश्ता न जुड़ने का मलाल

Karnal Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
कैथल। एक प्यार का नगमा है, फूलों की रवानी है..., मोहब्बत है क्या चीज..., जैसे अनगिनत गाने लिखकर दिलों पर राज करने वाले गीतकार संतोष आनंद को जब लोगों ने सरस मेले में गुनगुनाते सुना तो सहसा पंडाल में बैठे दर्शक टकटकी लगाकर उन्हें निहारते रहे। संतोष आनंद जाट स्कूल में आयोजित सरस मेले में सोमवार शाम पहुंचे। कवि सम्मेलन में उन्होंने काफी देर तक दर्शकों को मधुर संगीत की लय से बांधे रखा। कवि सम्मेलन के बाद उन्होंने अनछुए पहलू साझा किए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा से दिल का रिश्ता न जुड़ने का उन्हें मलाल है। यही वजह है कि उनके गानों में दर्द साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि पिता अमर सिंह अमर ने करनाल में कुछ समय नौकरी की थी। इसके बाद में सिकंदराबाद चले गए। पिता के कविता लिखने के शौक ने संतोष आनंद को भी इस राह में आने के लिए प्रेरित किया और आज वे अपने गीतों से लोगों के दिलों में जगह बनाए बैठे हैं। जब उनसे पूछा गया कि आपको यहां किससे प्रेम था तो वे हंसकर टाल गए और कहा कि शायद रहा हो कोई।
बचपन से ही गाने लिखने के शौक ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद में पढ़ते हुए नौंवी कक्षा में फिल्म देखकर गीत लिखने की प्रेरणा उन्हें मिली। बचपन में सुना एक गीत पत्थर का मेरा तकिया, हाथ का बिछौना, तुमको कसम है हमारी, इस लाश पर न रोना...हमेशा के लिए जहन में घर कर गया। इसके बाद लेखन कार्य शुरू हुआ। वहां से साइंस में इंटरमीडिएट करने के बाद डिग्री की। इसके बाद वे अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में पहुंचे। जहां से उन्होंने कवि सम्मेलनों में जाना शुरू किया। वर्ष 1960 में लाल किले पर आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन में भाग लेने का मौका मिला। वहां से तो जैसे पूरे देश में उन्हें ख्याति मिली। इसके बाद 1969 में मनोज कुमार उन्हें मुंबई ले गए। जहां उन्होंने पहली फिल्म पूरब और पश्चिम के लिए गाने लिखे। इसके कई गाने हिट हुए, जिसमें पूरबा सुहानी आई... अब भी गुनगुनाया जाता है। इसके बाद शोर फिल्म के गाने एक प्यार का नगमा है, फूलों की रवानी है..को काफी पसंद किया गया। इसके बाद रोटी कपड़ा और मकान फिल्म में गाने मैं ना भूलूंगा, मैं ना भूलूंगी.. पर तो उन्हें पहला फिल्म फेयर अवार्ड मिला। क्रांति फिल्म से उन्हें काफी पहचान मिली। जिसमें जिंदगी की ना टूटे लड़ी सहित कई गानों को पसंद किया गया। उन्होंने बताया कि बाद में प्रेम रोग में ये गलियां ये चौबारा को तो पसंद किया ही गया। बाद में मोहब्बत है क्या चीज गाने पर उन्हें फिर से फिल्म फेयर अवार्ड मिला। प्यासा सावन फिल्म में मेघा रे मेघा के अलावा तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है को आज भी काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने तहलका, तिरंगा, बड़े घर की बेटी, सूर्या सहित कई फिल्मों में भी उन्होंने गाने लिखे। हाल ही में उन्हें मुंबई में निराला अवार्ड मिला है।

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