बांझपन को खत्म करने के लिए जुटे डाक्टर

Karnal Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
करनाल। शहर के एक होटल में रविवार को इंडियन सोसायटी फॉर एस्सिटेड रिप्रोड्क्शन की हरियाणा शाखा की ओर से दिल्ली, चंडीगढ़ समेत राज्य भर के डाक्टरों का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में देश के कई प्रसिद्ध अस्पतालों के डाक्टरों सहित करीब डेढ़ सौ डाक्टरों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में बांझपन की बीमारी को आधुनिक तकनीक से समाप्त करने और नि:संतान दंपतियों के घर आंगन को बच्चों की किलकारियों से गुंजायमान करने के लिए विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन की मुख्य अतिथि दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के आईवीएफ विभाग की डायरेक्टर डा. आभा मजूमदार रहीं। उन्होंने कहा कि अब जीवन भर बांझपन का जख्म झेलने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए अब भारत में भी किराए की कोख से बच्चा पैदा कर अपने घर आंगन को खुशहाल बनाया जा सकता है। उन्होंने शादी और बच्चे पैदा करने की आयु 21 से 29 वर्ष तक हर लिहाज से अनुकूल बताई।
महिलाओं में बांझपन को दूर करने के लिए आधुनिक तकनीक अब प्रयोग की जा रही है। इन तकनीकों में आईयूआई, टेस्ट ट्यूब व दवाओं से अंडा बनाने के तरीकों को प्रयोग किया जा रहा है। नई तकनीक आने के बाद अब लोगों को उपचार के लिए करनाल से दिल्ली नहीं भागना पड़ेगा। हरियाणा में इस काम के लिए करीब 25 से तीस सेंटर हैं, लेकिन अभी तक मात्र नौ सेंटर को ही मान्यता दी गई है।
सर्वप्रथम कुछ बीमारियां भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। धूम्रपान का प्रयोग तथा पुरुष में शुक्राणु की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा महिला के शरीर में भी कमी हो सकती है। वह सब जांच के बाद ही सामने आता है। युवाओं में कैरियर बनाने की दौड़ भी कुछ हद तक जिम्मेदार हो सकती है।

अब देश में भी किराए की कोख का इंतजाम
दिल्ली में भी इस प्रकार के कई केस सामने आए हैं। अधिकतर तौर पर पैसा मिलने पर कुछ महिलाएं नौ महीने के लिए कोख किराए पर देती हैं। नियम के अनुसार एक महिला अपने तीन बच्चों और दो बार किराए की कोख से बच्चे को जन्म देने से अधिक बच्चों को जन्म नहीं दे सकती है। केवल पांच बच्चों को जन्म दिया जा सकता है। अब इस नियम में बदलाव होने जा रहा है। अब तीन बच्चों से अधिक को जन्म नहीं दिया जा सकेगा।
देश के कई हिस्सों से सम्मेलन में पहुंचे डाक्टरों में शामिल डा. श्वेता मित्तल, डा. अशोक खुराना तथा डा. उमेश जिंदल, डा. राजीव गुप्ता समेत काफी डाक्टरों ने कई घंटे तक इस विषय पर अपनाई जा रही तकनीक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

तकनीक का लाभ लें दंपति
इंडियन सोसायटी फॉर एस्सिटेड रिप्रोड्क्शन की हरियाणा शाखा की चेयरपर्सन एवं सचिव डा. ज्योति गुप्ता ने कहा कि अब समय आ गया है। समाज की बातों की ओर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। अपने सूने घर में किलकारियों को गूंजाने के लिए नि:संतान लोगों को नई तकनीकों का लाभ लेना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हरियाणा में ऐसा सम्मेलन पहली बार किया गया, जो सभी डाक्टरों के बीच सराहा गया है। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद लोगों का आभार प्रकट किया।

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