लड़कियों की चुप्पी छेड़छाड़ के लिए जिम्मेदार

Karnal Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
करनाल। बढ़ती छेड़छाड़ की घटनाओं के लिए बहुत हद तक लड़कियों की चुप्पी जिम्मेदार है। अगर वह सामने आकर इसका विरोध करें, तो इस तरह के मामले कम हो सकते हैं। इसके लिए जरूरत है कि लड़कियों में आत्मविश्वास पैदा करने की और उन्हें न्याय के लिए जागरूक करने की। तभी इस सामाजिक बुराई पर रोक संभव है।
राजकीय महाविद्यालय घरौंडा की छात्रा दीप्ति का कहना है कि हमारी चुप्पी ही अपराधियों के हौसले बुलंद करती है। अगर हमें विरोध करने का मादा हो, तो इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सकती है। इसके लिए लड़कियों को ही आगे आना होगा, तभी कोई दूसरा उनकी मदद को तैयार होगा। इसी कालेज में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा सपना कहती हैं कि चुप रहने की बजाए आगे आकर विरोध जताना होगा। जब एक बार विरोध होगा, तो मनचलों का मनोबल कम होगा और इससे इस अपराध पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
इसी तरह कल्पना, अदिति, वंदना और पारुल का कहना है कि छेड़छाड़ रोकने के लिए जरूरी है कि लड़कियों को अलग से प्रशिक्षित किया जाए। साथ ही उन्हें कैंप लगाकर मानसिक तौर पर मजबूत किया जाए और उनके अंदर छिपी संकोच की भावना व भय को बाहर निकालना होगा। इसके बिना वह आगे आ ही नहीं सकती है। इसके लिए स्कूल, कालेज, परिवार और समाज हर स्तर पर सहयोग की जरूरत है। तभी छेड़छाड़ पर रोक लगाई जा सकती है।

लड़कियों के लिए आयोजित होंगे शिविर
फाइट फार जस्टिस क्लब के प्रधान एडवोकेट हरीश आर्य का कहना है कि ये सामाजिक अपराध है और इसे रोकने के लिए भी सामाजिक स्तर पर ही प्रयास करने होंगे। सबसे जरूरी है कि लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाया जाए और मन में छिपे भय को निकले, ताकि वह शर्म और संकोच को त्याग कर आप बीती की शिकायत करें। इस तरह का जैसे ही मामला संज्ञान में आए, तो परिवार तथा समाज दोनों को आगे आकर इसमें कार्रवाई करनी चाहिए, तभी छेड़छाड़ जैसे अपराध को रोका जा सकता है।

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