होम्यो चिकित्सा में बढ़ने लगा है लोगों का विश्वास

Karnal Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। होम्यो चिकित्सा में भले ही मीठी चीनी की छोटी-छोटी गोलियों का प्रयोग किया जाता हो, लेकिन अब लोगों की विश्वसनीयता होम्यो चिकित्सा में बढ़ने लगी है। इसका कारण यह भी है कि होम्योपैथिक बीमारी को दबाने की नहीं, बल्कि खत्म करने के सूत्र पर कार्य करती है। यह चिकित्सा समरूपता के सिद्धांत पर आधारित है। इस चिकित्सा के जरिए व्यक्ति की इम्युनिटी पावर और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा दिया जाता है, जिससे व्यक्ति को जिस कमी से बीमारी होती है, उसकी सहन क्षमता को बढ़ा दिया जाता है। एमडी होम्योपैथिक डा. पंकज गुप्ता ने बताया कि होम्यो के बारे में यह भ्रांतियां है कि होम्योपैथिक केवल पुराने असाध्य रोगों में ही कारगर है, जबकि रोजमर्रा की घातक बीमारी जैसे बुखार, खांसी, जुकाम और दस्त में भी यह तेजी से काम करती है।

रोगी को समझ कर दी जाती है दवाई
एमडी होम्योपैथिक डा. पंकज गुप्ता ने बताया होम्यो चिकित्सा में रोग नहीं, बल्कि रोगी को समझ कर टेल्ड मेड या कस्टम मेड इलाज की तरह कार्य करती है, जिसमें दवा देने के लिए केवल रोग की पहचान काफी नहीं होती, बल्कि रोगी के वे लक्षण लिए जाते हैं, जो उसे इस बीमारी से पीड़ित अन्य रोगियों से अलग करते हैं। उसके लक्षणों को समझा जाता है और रोग के कारण क्या है, कब हुआ, रोग होने के बाद क्या-क्या बदलाव रोग में हुए को समझते हुए दवाई दी जाती है।

मिट्टी और कांच से भी तैयार होती है होम्यो दवा
आपको यह जानकर बेहद हैरानी होगी कि होम्यो में दवाई जीवन में प्रयोग होने वाली प्रत्येक वस्तु से बनाई जाती है। इसके अलावा रसोई में प्रयोग होने वाली प्रत्येक वस्तु जैसे खाने पीने की रोजमर्रा के सामान से भी दवाई बनाई जाती है। यहां तक की मिट्टी, कांच, जहर, जीवाणु और पौधों से भी टिंचर तैयार किए जाते हैं।

नहीं होता कोई दुष्प्रभाव
डा. गुप्ता ने बताया कि यदि किसी योग्यता प्राप्त चिकित्सक की देखरेख में इनका प्रयोग किया जाए तो इस चिकित्सा के दौरान मरीज को दवाओं से किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं होता। उनके अनुसार यह एक बहुत ही सुलभ चिकित्सा है। इस चिकित्सा में रोगी और चिकित्सक को थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है। पहले रोग के लक्षणों को पहचान कर फिर ही उस रोगी को रोगमुक्त करवाया जा सकता है।

एलोपैथिक और होम्योपैथिक में अंतर
एलोपैथिक में दवा केवल भौतिक स्तर पर असर करती है। उनका रासायनिक स्तर पर असर देखा जाता है, जबकि होम्यो में दवाएं डायनामिक स्तर पर असर करती है, जिसमें दवा का असर उस रोगी पर लक्षणों पर प्रमाणित कर देखा जाता है।
2. होम्योपैथिक में दवा की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए दुष्प्रभाव की संभावना न के बराबर होती है। परंतु एलोपैथिक में ऐसा नहीं होता।
3. होम्योपैथिक दवाएं शरीर के माध्यम को इस्तेमाल करके बीमारी को हमेशा के लिए जड़ से खत्म करती है, परंतु एलोपैथिक में प्राय: ऐसा देखने को नहीं मिलता।

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