गरीबों की जमीन पर बना दीं कोठियां

Karnal Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। सही कहते हैं कि गरीबों को हक सिर्फ कागजों में मिलता है। इनका स्तर ऊंचा उठाने और सुविधाएं मुहैया कराने के दावे भी फाइलों में दब कर रह जाते हैं। हकीकत यह है कि गरीबों के हक पर अमीर डाका डाल रहे हैं। हुडा (अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) में गरीबों को सस्ते दाम पर रिहायसी सुविधा देने के नाम पर बड़े गोलमाल का खुलासा हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा का दावा है कि यदि किसी एजेंसी से जांच कराई जाए तो विभाग के कई अधिकारी भी बेनकाब होंगे।
स्थिति यह है कि हुडा में गरीबों के लिए आरक्षित जमीन पर बहुमंजिला इमारत बन चुकी हैं और विभाग उनके नक्शे भी पास कर चुका है, लेकिन इसको लेकर कभी किसी ने आपत्ति नहीं जताई। यह कारनामा हुडा कार्यालय से महज 500 मीटर दूरी पर हुआ है। नियमानुसार ये प्लाट रिज्यूम हो सकते हैं, पर अधिकारियों ने आंख बंद कर गरीबों का हक छीनने दिया।

प्लाटों के निकाले थे ड्रा
एडवोकेट राजेश शर्मा की ओर से मांगी गई आरटीआई में यह खुलासा हुआ है। दरअसल, हुडा सेक्टर-12 में गरीबों के लिए सरकार ने रियायती दर पर प्लाट देने की योजना बनाई थी। गरीबों को बेहतर आवासीय सुविधा देने का दावा किया गया था और दो व तीन मरले के प्लाटों के ड्रा निकाले गए। प्लाटों की कुल संख्या 62 रखी गई। स्कीम को (ईडब्ल्यूएस) इकोनॉमिकली विकर सेक्शन नाम दिया गया। दावा किया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए नियमानुसार 59 प्लाट अलाट कर दिए गए। इसमें तीन का किसी वजह से ड्रा नहीं निकाला। योजना में तीन मरले के 39 और दो मरले के 20 प्लाट निर्धारित किए गए।

दस साल तक नहीं बिक सकता प्लाट
सरकार ने नियम भी बना दिया कि प्लाट धारक 10 साल तक न तो प्लाट बेच सकेगा और न ही किसी के नाम ट्रांसफर करा सकेगा। भूमाफिया ने इसका भी तोड़ निकाल लिया और गरीबों से जीपीए और फुल पेमेंट एग्रीमेंट पर प्लाट खरीद लिए। भले ही इस जमीन पर किसी गरीब ने झोपड़ी ना बनाई हो पर देखते ही देखते ईडब्ल्यूएस सेक्शन के इन प्लाटों पर आलीशान बहुमंजिले भवन खड़े हो गए हैं। हुडा अधिकारियों ने प्लाट धारकों के बजाए खरीदारों के नाम नक्शे भी पास कर दिए। विभाग के पास उन्हें बेचे जाने की सूचना भी पहुंच गई, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया गया। यह सब विभागीय अधिकारियों की देखरेख में हुआ है।

बिना आक्यूपेशन सर्टीफिकेट रह रहे
एक नियम यह भी है कि विभाग से बिना आक्युपेशन सर्टीफिकेट लिए मकान में नहीं रह सकते, पर किसी भी व्यक्ति ने विभाग से सर्टीफिकेट नहीं लिया। किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने उनके बिना अनुमति के रहने पर आपत्ति नहीं जताई। जिन लोगों के नाम प्लाट निकले थे, वे इन्हें बेचकर जा चुके हैं।

मामला संज्ञान में है, कार्रवाई अभी नहीं
करीब सात साल पहले इन प्लाटों का ड्रा निकाला गया था। 10 साल से पहले प्लाट बेचा नहीं जा सकता और न ही इसे किसी के नाम ट्रांसफर किया जा सकता। गरीबों को हुडा में रिहायसी सुविधा देने के लिए सरकार ने पॉलिसी बनाई थी, पर जिन लोगों के नाम प्लाट अलाट हुए हैं, उन्होंने बेच दिए। जीपीए के आधार पर नक्शे पास किए गए हैं। हमें इस मामले का पता है, पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
केवल कृष्ण, जेई हुडा विभाग करनाल।

इसकी जांच होगी

मेरी जानकारी में अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं आया है। अगर ऐसा हुआ है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। गरीबों के हक पर डाका नहीं डलने दिया जाएगा।
रेनू फुलिया, डीसी करनाल।

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