आरबीआई की फर्जी साइट बनाकर ठगी

Karnal Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। आपके मोबाइल या ई-मेल आईडी पर अगर रातोंरात करोड़पति बनाने का मैसेज आ रहा हो, तो सावधान हो जाएं। करोड़पति बनने की लालसा आपको संकट में डाल सकती है। प्रदेश में लुभावने आफर देकर ठगी करने वाला गिरोह सक्रिय है। ऐसे कारनामों को अंजाम देने वाले लोग इतने शातिर और हैं कि उन्होंने आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) की फर्जी वेबसाइट भी बना रखी है।
लोगों को उन पर संदेह न हो, इसलिए शातिर अंदाज में हाईटेक तकनीक के जरिये उन्हें जाल में फांसा जा रहा है। लोगों को ठगी का आभास तब होता है, जब लाखों रुपये की चपत लग जाती है। इतना ही नहीं यदि आप सोच रहे हैं कि बैंक अधिकारी या पुलिस आपकी सहायता करेगी तो इसे भी आप अपने दिमाग से निकाल दें। बेशक यह संगीन जुर्म है, पर बैंक और पुलिस अधिकारी पूरी तरह से बेपरवाह हैं।

करनाल का अनिल हुआ ठगी का शिकार
अनिल निवासी पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस ने पुलिस को शिकायत दी है कि 22 सितंबर को मेल पर मैसेज आया कि कोका कोला प्रोमो में उसने 70 हजार पाउंड जीते हैं। राशि प्राप्त करने के लिए औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ेंगी। मेल पर पूरा पता और मांगे गए कागजात भेज दिए गए। फिर मैसेज आया कि पार्सल विदेश से भेजा जाएगा। इसलिए भारत में इसे प्राप्त करने के लिए कस्टम ड्यूटी लगेगी। रुपये जमा कराने के लिए एसबीआई और आईसीआईसीआई के खाता धारक कैंग तू पैन, मोहम्मद आसीम, सन्नी शर्मा और अभय प्रताप नाम के चार लोगों का खाता नंबर दिया गया। चूंकि खाते विश्वसनीय बैंक में थे, इसलिए एक लाख 60 हजार 320 रुपये जमा करा दिए गए। बताया गया कि रिजर्व बैंक के माध्यम से यह राशि दी जाएगी।

शक होने पर अनिल ने की कार्रवाई
इसके बाद तीन लाख रुपये और मांगे गए। शक होने पर आरबीआई की वेबसाइट पर संपर्क किया गया तो पता चला कि ठगों ने आरबीआई की फेक वेबसाइट बना रखी है और अपने मोबाइल नंबर डाल रखे हैं। इसके बाद आरबीआई अधिकारियों से संपर्क किया गया तो पता चला कि वेबसाइट बनाकर उनके नाम पर फ्राड किया जा रहा है। अनिल अपने एक दोस्त के साथ जनहित सोशल वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट जीतेंद्र राणा के पास पहुंचा और आपबीती बताई। जीतेंद्र ने उन्हें पुलिस अधीक्षक के पास भेज दिया।

कुछ यूं चल रही है पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में उपस्थित न होने की वजह से वे एक डीएसपी से मिले, तो उन्होंने सिविल लाइन थाना प्रभारी को जांच मार्क कर दी और पांच दिन के अंदर रिपोर्ट देने को कहा। अनिल का कहना है कि पुलिस ने इसे साइबर क्राइम का मामला बताकर उन्हें थाने से वापस भेज दिया। वे फिर डीएसपी से मिले, तो उन्होंने फिर सिविल लाइन पुलिस को जांच करने के निर्देश दिए। जीतेंद्र का कहना है कि आरबीआई और एसबीआई का नाम सामने आने के बाद लोग विश्वास कर लेते हैं और झांसे में आ जाते हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

नहीं लगा खाताधारकों का पता
अनिल ने बताया कि पुलिस एक माह में खाताधारकों का पता भी नहीं लगा सकी है। अभी तक यह भी पता करने का प्रयास नहीं किया गया कि आरबीआई के नाम पर फ्राड करने वाले कौन हैं। एडवोकेट जीतेंद्र राणा का कहना है कि बैंक में खाता खोलते वक्फ पूरी तरह से पारदर्शिता रखी जाती है, इसलिए ठगी करने वाले गिरोह तक पहुंचना असंभव नहीं है। यदि पुलिस और बैंक ऐसे ही सुस्त रहे तो लोगों का विश्वास उठ जाएगा।

मामले की चल रही है जांच
डीएसपी ने जांच के आदेश दिए थे। मामले की जांच चल रही है। लोगों को झांसे में नहीं आना चाहिए। बल्कि ऐसे मामलों से बचना चाहिए। इस मामले में भी जांच की जा रही है। अभी कुछ पता नहीं चला है।
गुरविंदर सिंह, थाना प्रभारी सिविल लाइन

आखिर कैसे खुल गया खाता
बैंक में खाता खुलवाने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। जो व्यक्ति हस्ताक्षर नहीं कर सकता उसके दो सिनाख्ती और एक गवाह, जिसका उसी बैंक में खाता हो, तीन फोटो, राशन कार्ड और पहचान पत्र की कापी (पेन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र) लिया जाता है। जो व्यक्ति हस्ताक्षर कर सकता उसके लिए एक गवाह, जिसका उसी बैंक में खाता हो, दो फोटो, राशन कार्ड और पहचान पत्र की कापी (पेन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र) लिया जाता है। तस्दीक करने के लिए असल कागजात भी देखे जाते हैं।
प्रेम सेठी, मैनेजर, पंजाब नेशनल बैंक

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