बिना तैयारी फिल्में भारी

Karnal Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
कैथल। बाल फिल्म महोत्सव अध्यापकों और बच्चों के लिए जी का जंजाल बन गया है। जिले में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण विभाग की संस्था बाल चित्र समिति की ओर से 19 से 29 अक्तूबर तक महोत्सव शुरू किया गया है। इसमें दो लाख बच्चों को 28 फिल्में दिखाई जानी हैं। अधिकारियों ने फिल्म दिखाए जाने के आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन अध्यापक इन आदेशों को लेकर पसोपेश में हैं। अधिकतर स्कूलों में डीवीडी, जेनरेटर होने की स्थिति में तेल के लिए कोई स्पष्ट आदेश नहीं हैं। यही नहीं कई स्कूलों में तो बैठने की जगह तक नहीं है। ऐसे में कैसे बच्चों को फिल्में दिखाई जाएंगी। यह सवाल खड़े हो गए हैं।

दो लाख बच्चों को दिखाई जानी हैं फिल्में
समिति की ओर से जिले के सरकारी एवं निजी स्कूलों के दो लाख से अधिक बच्चों को फिल्में दिखाई जानी हैं, लेकिन सभी बच्चे कैसे ये फिल्में देख पाएंगे। इस बारे में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है।

कई स्कूलों में डीवीडी ही नहीं पहुंची
प्रशासन की ओर से 19 अक्तूबर से पहले कुछेक स्कूल मुखियाओं को डीवीडी एवं सीडी वितरित कर दी गई थी, लेकिन कई स्कूलों में अब तक ये डीवीडी ही नहीं पहुंची है। गांव के स्कूल तो दूर शहर में स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जहां दोनों विद्यालयों में 6 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अब तक न तो डीवीडी, न ही जेनरेटर तक चलाए जाने से जुड़ा कोई मार्गदर्शन मिला है। तीन नंबर विद्यालय में 135 बच्चों को लैपटॉप पर फिल्म दिखा दी गई है, लेकिन इसी एक कमरे में चल रहे विद्यालय नंबर 5 के अध्यापक डीवीडी, जेनरेटर एवं बिजली सुविधा न होने के कारण विचार कर रहे हैं कि विद्यालय के 150 बच्चों को फिल्म कैसे दिखाएं।

अधिकारियों को बता दीं समस्याएं
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल सतीश कक्कड़ ने कहा कि बच्चों के बैठने के लिए बड़ा हाल न होना, डीवीडी न पहुंचने, तेल आदि के खर्च एवं विद्यालय में बच्चों की अधिक संख्या के चलते 10 दिनों में सभी बच्चों को पूरी फिल्में न दिखाए जाने सहित अन्य समस्याओं के बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इसी प्रकार से राजकीय कन्या स्कूल की प्रभारी बिमला मदान का कहना है कि फिल्म दिखाए जाने के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं।

अध्यापक संघ के नेता दलबीर राठी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर स्कूलों में जेनरेटर नहीं हैं। इस कारण बिजली न होने से फिल्में दिखाई ही नहीं जा सकतीं, जिन स्कूलों में जेनरेटर हैं, उनमें तेल डालकर चलाने संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गई है। अध्यापक अपने स्तर पर ही तेल डलवाकर चला रहे हैं।

ये हैं मुख्य समस्याएं
- अधिकतर स्कूलों में डीवीडी और सीडी ही नहीं पहुंची
- जिन स्कूलों में जनरेटर नहीं, वहां दिन में बिजली न होने से गहराया संकट
- जहां जनरेटर हैं, उनमें तेल डालने के लिए विभाग से कोई फंड नहीं मिला
- स्कूलों में इस समय उत्तर पुस्तिकाओं की जांच एवं कई स्कूलों में परीक्षा केंद्र बने हैं, जहां पहले ही पढ़ाई बाधित है। ऐसे में फिल्म कैसे और कब दिखाई जा सकेंगी

कोट
जिन स्कूलों में डीवीडी और अथवा अन्य साधन नहीं पहुंचे हैं, वे अपने खंड के बीईओ से मिलकर साधन ले सकते हैं। यदि इसके बावजूद साधन नहीं मिलते हैं, तो किराये पर लेकर बच्चों को फिल्म दिखा दें, बाद में उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा। जहां बिजली नहीं हैं, वहां अध्यापक जेनरेटर चलाएं, जेनरेटर के लिए तेल का खर्च बाद में बिल देने पर दे दिया जाएगा। अभी विभाग के पास समिति की ओर से स्वीकृत 6 लाख रुपये नहीं पहुंचे हैं।
रफिया राम, जिला उप शिक्षा अधिकारी

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