एससी-एसटी आयोग की टीम पहुंची कलसी

Karnal Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
कलसी गांव (करनाल)। कलसी गांव के कमलेश हत्याकांड में पुलिस व प्रशासन पर लगाए जा रहे देरी से कार्रवाई के आरोपों की जांच करने शनिवार को एससी-एसटी आयोग की टीम पहुंची। टीम ने पीड़ित परिवार के सदस्यों से बातचीत की और उनकी शिकायत पर सुनवाई की। आयोग की टीम ने परिवार सदस्यों की शिकायत पर प्रशासन व पुलिस की जमकर खिंचाई की और उन्हें हर संभव मदद के लिए निर्देश दिए। पीड़ित पक्ष ने बार-बार एक ही बात कही कि उन्हें न्याय टुकड़ों में मिल रहा है।
राहुल गांधी को लिखा था पत्र
परिवार की ओर से न्याय के लिए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को पत्र भेजा गया था। यही पत्र बाद में आयोग के पास पहुंचा और टीम जांच के लिए करनाल आई। टीम में आयोग के रिसर्च अधिकारी एमआर बाली और पीएस मेहता शामिल रहे। सुबह करीब 11 बजे टीम कलसी गांव पहुंची और पीड़ित परिवार से बातचीत की। कमलेश के पति धर्मपाल ने टीम को बताया कि वो पहले दिन से ही सदमे में है। उन्होंने न्याय के लिए पुलिस के दरवाजे पर कई बार दस्तक दी, लेकिन किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की। इतना ही नहीं कमलेश 3 सितंबर को लापता हुई थी और रिपोर्ट पुलिस ने 5 सितंबर को दर्ज की, जबकि इससे पहले उनकी बेटी को अगवा कर उसे दो युवकों ने अपनी हवस का शिकार बनाया था।
आरोपी जांच अधिकारी के रिश्तेदार
इसको लेकर पीड़ित परिवार न्याय के लिए गुहार करता रहा, परंतु पुलिस ने जांच अधिकारी तक को नहीं बदला। पीड़ित पक्ष ने टीम को बताया कि आरोपी युवक जांच अधिकारी के ही रिश्तेदार थे और आखिर दिन तक वह उन्हें बचाने का प्रयास करता रहा। उन्हें जो सरकार की ओर से सहायता दी जानी थी, वह भी समय पर नहीं दी गई। टीम ने सारे मामले में जांच के बाद पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों से बात की और कार्रवाई पर असंतोष जाहिर किया। दोनों अधिकारियों ने कहा कि कहीं ना कहीं मामले में चूक साफ दिखती है। इसके बाद टीम वहां से रवाना हो गई।

यह था मामला
3 सिंतबर को कलसी गांव की दलित महिला कमलेश अपने घर से दवा लेने के लिए निकली थी, लेकिन वह वापस घर नहीं लौटी। कमलेश के पति धर्मपाल ने पुलिस से पत्नी की गुमशुदगी की बात कही पर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया और उसे टकराते रहे। 5 सितंबर को जब मामला दर्ज हुआ, तब तक कमलेश की हत्या हो चुकी थी। कमलेश का शव रेलवे लाइन के पास मिला। इस मामले में पुलिस ने कोई खासी दिलचस्पी नहीं दिखाई। पहले दिन से ही परिजन गांव के दो युवकों पर आरोप लगा रहे थे। इन्हीं युवकों पर परिजनों ने बेटी को अगवा कर दुराचार करने का भी आरोप लगाया था। परंतु पुलिस ने 17 अक्तूबर को इस मामले में एससी एसटी की धारा जोड़ी और बाद में ही मुआवजा दिया।

ये हैं पुलिस से तीन बड़े सवाल
परिजनों ने आयोग की टीम के सामने तीन बड़े सवाल उठाए हैं। इनमें परिजनों ने पुलिस व प्रशासन को कटघरे में खड़े करने का प्रयास किया है।

1 हत्याकांड की जांच करने वाले एएसआई रामप्रकाश की भूमिका संदिग्ध रही है। दोनों आरोपी रामप्रकाश के रिश्तेदार हैं और वह आखिर समय तक इस मामले में उनका बचाव करता रहा। उसी ने मामले को दबाए रखा और परिजन न्याय के लिए भटकते रहे। इस समय भी रामप्रकाश जलमाना चौकी में तैनात है। उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
2 पहले दिन से पता था कि यह दलित उत्पीड़न का मामला है। मां की हत्या हुई और बेटी की इज्जत तार-तार, लेकिन पुलिस ने आखिर तक रिपोर्ट में एससी/एसटी की धारा नहीं जोड़ी। बाद में जब आयोग तक मामला पहुंचा तो पुलिस ने आनन-फानन में 17 अक्तूबर को इसमें एससी-एसटी की धारा जोड़ दी।
3 सरकार की ओर से दुराचार व हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को दी जाने वाली सहायता राशि समय पर नहीं मिली। 19 अक्तूबर की रात प्रशासन ने सहायता राशि पीड़ित परिवार को दी। ऐसा क्यों किया गया।


आयोग ने माना, कहीं न कहीं हुई चूक
करनाल। एससी/एसटी आयोग के रिसर्च अधिकारी पीएस मेहता ने कहा कि आयोग की टीम ने पीड़ित परिवार से बातचीत की है। इसके अलावा प्रशासन से भी उनका पक्ष जाना गया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद ये तो साफ हो गया है कि कहीं ना कहीं चूक रही है। उन्होंने कहा कि आयोग के अध्यक्ष के सामने वह अपनी रिपोर्ट रखेंगे और इसके बाद आयोग बताएगा कि इसमें आगामी क्या कार्रवाई होगी। मेहता यहां कर्ण लेक पर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह के आरोप परिजनों ने लगाए हैं, वह बेहद संगीन है और इसकी जांच की जा रही है। इसमें किसी तरह का झोल नहीं रहने दिया जाएगा। मेहता ने बताया कि उन्होंने पीड़ित पक्ष और प्रशासन दोनों के तर्क और बयान सुने हैं। इसमें क्या सच है और आयोग को क्या महसूस हुआ है, इस पर जांच की जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जो आरोप परिजनों ने लगाए हैं, वह प्रशासन के तर्क की कसौटी पर कितने खरे हैं, इसी की जांच की जानी है। इस मौके पर उनके साथ डीसी रेनू फुलिया, एसपी शशांक आनंद, तहसीलदार हरिओम अत्री, एसडीएम गिरीश अरोड़ा, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

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