समाज में परिवर्तन लाने के लिए साहस दिखाना जरूरी

Karnal Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
पिहोवा। हरियाणा की छोरियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न खेलों में अपना साहस दिखाया है। वहीं, समाज में परिवर्तन लाने के लिए भी साहस दिखाए छोरियां कालम से लड़कियां लगातार अपने विचार साझा कर रही है। ज्यादातर छात्राओं के मन में यही सवाल है कि आज भी हमारे समाज में यदि कोई बेटी उत्कृष्ट कार्य करती है, तो उसकी तुलना यह कहकर की जाती है कि यह हमारी बेटी नहीं बेटा है, क्यों? पिहोवा डीएवी स्कूल में भी छात्राओं से बात करने पर छात्राओं ने समाज की मानसिकता बदलने की बात कही।

समस्याओं से निपटने की क्षमता हो
छात्रा शिवानी ने बताया कि स्कूलों में छात्राओं को स्कूल प्रबंधन द्वारा समय-समय पर समाज में फै ली बुराइयों से अवगत कराया जाना चाहिए, ताकि वे उनसे निपटने के लिए पहले से तैयार हों।

भेदभाव की मानसिकता को बदले समाज
छात्रा आरती ने कहा कि अभी भी यदि समाज में लड़कियों के प्रति रवैया नहीं बदला गया तो समाज का तानाबाना हिल जाएगा। आज लड़कियां प्रत्येक क्षेत्र में लड़कों के बराबर है, लेकिन बावजूद समाज में लड़कियों के प्रति भेदभाव की मानसिकता बनी हुई है। लड़कियों पर ज्यादा पाबंदियां है, जबकि लड़कों को पूरी आजादी है। लड़कियों को अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा सजग रहना चाहिए।

मां को बनाएं सहेली
छात्रा सीमा ने बताया कि मां को लड़कियों के साथ एक सहेली का रिश्ता रखना चाहिए, ताकि वह अपनी मां से सारी समस्या साझा कर सके। साथ ही परिवार द्वारा लड़की को हमेशा बहादुर बनने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

सोच बदलने की जरूरत
छात्रा रंजना सांगवान ने कहा कि देश आजाद होने के बावजूद महिलाएं आज भी गुलाम है। लड़कियों को पढ़ाया जरूर जाता है, लेकिन पुरानी सोच को बदलने के लिए लड़कियों को स्वयं भी आगे आना चाहिए।

लड़कियों को करें प्रोत्साहित
छात्रा नेहा ने बताया कि महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए पुलिस को सख्त कदम उठाने चाहिए। समय-समय पर स्कूल और कालेजों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करवाने चाहिए, जिसमें छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़े और वे अपनी समस्याओं को एक-दूसरे से साझा कर सके।

कानून हो कड़े
डीएवी स्कूल की अध्यापिका सुखवंत कौर ने कहा कि समाज में फैली इस बुराई को खत्म करने के लिए मानसिकता बदलनी होगी। राजनैतिक लोगों को भी इस बारे कडे़ कदम उठाने चाहिए। पीड़ित की सहायता के लिए सामाजिक संस्था को आगे आना चाहिए। जो पुलिसकर्मी अनदेखी करे, उनके खिलाफ कार्रवाई हो।

तुरंत कार्रवाई की जाए
प्रिंसिपल एनसी बिंदल ने कहा कि जब तक आरोपी लोगों को सख्त से सख्त सजा नहीं मिलेगी, इस बुराई को खत्म नहीं किया जा सकता। कानून कडे़ हो, ताकि असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके। इसके अलावा किसी भी संस्थान में लड़कियों व महिलाओं के साथ छेड़खानी करने वाले व्यक्ति को तुरंत प्रभाव से संस्थान से निकाल देना चाहिए। स्कूलों में प्रबंधन कमेटी द्वारा एंटी ह्रासमेंट सेल बनने चाहिए, जिसमें केवल महिलाएं ही सदस्य हो।~

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