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आरटीआई कार्यकर्ता को उपभोक्ता अदालत से राहत

Karnal Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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करनाल। फीस जमा करने के बावजूद एचएसएससी (हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन) से निर्धारित समय में जानकारी नहंी मिलने पर एक आरटीआई कार्यकर्ता को उपभोक्ता कोर्ट से न्याय मिला है। सूचना नहीं देने पर उपभोक्ता कोर्ट ने एचएसएससी पर बीस हजार रुपये जुरमाना लगाने के साथ पांच हजार रुपये कानूनी खर्च देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने जुरमाने और कानूनी खर्च की राशि 30 दिन के अंदर देने के आदेश दिए हैं। पहली बार एक आरटीआई कार्यकर्ता को उपभोक्ता अदालत से न्याय मिलने के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप की स्थिति है। सुनवाई के दौरान उपभोक्ता अदालत ने प्रार्थना पत्र की फीस भरने पर प्रार्थी को उपभोक्ता की श्रेणी में रखा है। इस प्रकार सूचना का अधिकार-2005 के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
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यह जानकारी मांगी थी
एडवोकेट राजेश शर्मा ने 27 अप्रैल 2009 को एचएसएससी से भर्ती रिकॉर्ड नष्ट करने की प्रक्रिया, नियम और मापदंड की जानकारी मांगी थी। साथ ही विज्ञापन नंबर 15/2007 कैटेगरी नंबर-25, जिसके जरिये पुलिस इंस्पेक्टर की भर्ती हुई थी, उनका रिकॉर्ड नष्ट करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया, किन लोगों से इजाजत ली गई, किस तारीख को रिकॉर्ड नष्ट किया गया, कौन से कानून के तहत यह रिकॉर्ड नष्ट किया, इसकी जानकारी मांगी थी।

जानकारी उपलब्ध नहीं कराई
एचएसएससी ने इस संबंध में तय समय पर जानकारी नहीं उपलब्ध कराई। केवल यह सूचना दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मद्देनजर रिकॉर्ड नष्ट किया गया है। इस पर राजेश शर्मा ने प्रथम अपील दायर की, लेकिन प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी सूचना उपलब्ध कराने के बजाय अपील ही खारिज कर दी और पूर्व में दी गई सूचना को सही ठहराया। राजेश शर्मा ने इसके बाद राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। राज्य सूचना आयुक्त परमवीर सिंह ने सूचना अधिकारी को 30 दिन के भीतर बिंदुवार सूचना देने के आदेश दिए। इसके बाद भी एचएसएससी ने पूरी सूचना मुहैया नहीं कराई।

कोर्ट ने एचएसएससी को लगाई फटकार
उन्होंने 21 जुलाई 2010 को उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कहा कि सूचना पाने के लिए तय 50 रुपये फीस जमा कराई गई है, इसलिए वे उपभोक्ता की श्रेणी में आते हैं। एचएसएससी ने उनको फीस के एवज में कानून के मुताबिक 30 दिन के अंदर सूचना नहीं दी। उन्होंने सूचना नहीं देने को सेवा में त्रुटी बताया। इस पर अदालत ने अपनी मोहर लगा दी। उपभोक्ता अदालत के प्रेसीडेंट एमएम शर्मा ने इस आशय पर कड़ा संज्ञान लेकर एचएसएससी के सूचना अधिकारी को तलब कर सुनवाई के बाद उसे दोषी करार देकर 20 हजार रुपये का जुर्माना और पांच हजार रुपये कानूनी खर्च देने के आदेश दिए। शर्मा ने अपील की थी कि सूचना नहीं मिलने पर उनको शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना हुई है। इसको कोर्ट ने भी वाजिब करार दिया और एचएसएससी को फटकार लगाई। एचएसएससी को मुआवजा 30 दिन के अंदर देने के आदेश दिए गए हैं।
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