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लड़कियों को खुद ही उठाना होगा सुरक्षा का जिम्मा

Karnal Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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कुरुक्षेत्र। वर्तमान में हमारे समाज में स्थिति यह है कि हर कोई बदलाव और जागरूकता की बात कर रहा है, लेकिन जब छेड़छाड़, महिला अपराध और उत्पीड़न की घटनाऐं होती हैं तो कहीं न कहीं जागरूकता की कमी नजर आती है। इस तरह की घटनाओं के विरोध में अब लड़कियों ने सख्य रुख अख्तियार कर लिया है। छात्राओं ने अनुसार उन्हें ही आगे आकर अब ऐसे आपराधिक तत्वों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा।
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सुरक्षा का काम प्रशासन का
केयू में एजूकेशन विभाग की बीएड स्पेशल की छात्रा रीना ने कहा कि लड़कियों को सुरक्षा प्रदान करने का कार्य प्रशासन का है, जब प्रशासन अपना काम सही तरीके से करना शुरू कर देगा तो शोषण, अत्याचार व छेड़छाड़ जैसी घटनाएं अपने आप कम हो जाएंगी।


खुद मजबूत बनना होगा
यूनिवर्सिटी कालेज में बीए फाइनल की छात्रा मनीषा ने बताया कि लड़कियों को आगे आना है, तो उन्हें खुद मजबूत बनना होगा। विरोध करना जरूरी हो गया है अन्यथा लड़कियों का शोषण ऐसे ही होता रहेगा।

समाज का दृष्टिकोण बदलना होगा
संत निश्चित सिंह पब्लिक स्कूल लाडवा की प्राचार्य अमरजीत कौर के अनुसार लड़का-लड़की एक समान, ये बातें केवल किताबों और विज्ञापनों तक ही सीमित हैं। महिलाओं के प्रति बढ़ता अत्याचार और दुराचार समाज के नकारात्मक दृष्टिकोण का परिणाम है। इन घटनाओं को रोकने के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता समाज का दृष्टिकोण बदलने की है।

विरोध नहीं कर पातीं
यूनिवर्सिटी कालेज में बीए फाइनल की छात्रा विनती हुड्डा ने बताया कि लड़कियां सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण लड़कों का विरोध नहीं कर पातीं। यदि माता-पिता और परिवार के लोग लड़कियों को सहयोग दें तो निश्चित रूप से वे सामना कर पाएंगी।

जाम लगाना ठीक नहीं
यूनिवर्सिटी कालेज में बीए फाइनल की छात्रा सुलेखा नैन के अनुसार किसी बड़ी घटना के विरोध में जाम लगाना, कानून हाथ में लेना और सरकारी संपत्ति का नुकसान करना सही नहीं है। एकजुटता के साथ इस तरह की घटनाओं का विरोध करना चाहिए।

नहीं मिल पाया समानता का दर्जा
यूनिवर्सिटी कालेज में बीए फाइनल की छात्रा निशा हुड्डा ने बताया कि सामाजिक बदलाव के दौर में कहीं न कहीं हमारा समाज अपने आपको पूर्ण रूप से नहीं बदल पाया है। सामाजिक परिवेश में आज भी लड़कियों को समानता का दर्जा पूरी तरह से नहीं मिल पाया है, जिसके कारण लड़कियां छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का विरोध नहीं कर पातीं। अब लड़कियों को यह हिम्मत खुद उठानी होगी।

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