नक्शे में गली थी तो कैसे बन गया मकान

Karnal Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। वार्ड नंबर-27 कल्याण नगर में गली को लेकर विवाद गर्माता जा रहा है। कालोनीवासियों के नक्शों में गली होने के बावजूद नगर परिषद ने मकान की रजिस्ट्री के साथ-साथ मकान नंबर भी जारी कर दिया। इसी बात को लेकर कोर्ट से केस भी नगर परिषद जीत चुकी है। इसके बाद निर्माणाधीन मकान को नगर परिषद के अधिकारियों ने तहस नहस भी कर दिया था, लेकिन समय बीतता गया। परंतु गली को लेकर आज भी कालोनी वासियों में खुनस है। कुछ कालोनीवासियों ने गली को लेकर परिषद से आरटीआई भी मांगी, परंतु अब तक इस आरटीआई का विभाग ने कोई भी उत्तर नहीं दिया। वहीं, पार्षद ने गली बनाने के लिए डी प्लान के तहत स्पेशल ग्रांट ली है। गली बनाने के लिए निर्माण सामग्री काफी समय से गली में डाली हुई है, परंतु विवाद के चलते न तो गली बनी और न ही आपस में कालोनी वासियों की सहमति हो सकी। कालोनी के राजेश कुमार ने बताया कि 14 नंबर 2009 को गली को लेकर कोर्ट में केस डाला गया था। इसके बाद 18 अक्तूबर 2011 को परिषद केस जीत चुकी है। केस जीतने के बाद परिषद के अधिकारियों ने मकान को तहस नहस भी कर दिया था। परंतु मलबे को नहीं उठाया गया। इतना ही नहीं कुछ समय बाद कब्जाधारियों ने यहां पर खूंटे लगाकर पशुओं को बांधना भी शुरू कर दिया। राजेश के अनुसार जब कालोनीवासी इस रास्ते से गुजरते हैं तो कब्जाधारी उन्हें भला बुरा कहते हैं। राजेश ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को मिल चुके हैं, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी है। कालोनी के जोगिंद्र सिंह का कहना है कि गली के कारण काफी गुटबाजी हो रही है। इसका खामियाजा अन्य कालोनीवासियों को भुगतना पड़ता है। बरसात के दौरान इस गली में दो-दो फुट पानी भर जाता है, जिसके कारण मकानों में दरारें आनी शुरू हो गई है। कालोनी वासी अशोक कुमार ने बताया कि कालोनीवासियों के साथ मिल कर उन्होंने डीसी को शिकायत की थी। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हाेंने नगर परिषद से आरटीआई मांगी। इसका उत्तर उन्हें आज तक नहीं मिला। गली न बनने से 60 घर प्रभावित हैं।

नहीं है स्टे, फिर भी नहीं बनती गली
कालोनीवासियों ने बताया कि गली पर न तो कोई स्टे है और न ही कोई कानूनी अड़चन फिर भी नगर परिषद इस गली को बनाने में आनाकानी कर रही है। गली में निर्माण सामग्री काफी समय से आई है, परंतु विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जबकि नगर परिषद द्वारा पास किए गए नक्शों में गली दिखाई गई है। यह गली अंबेडकर कालोनी और कल्याण नगर को जोड़ती है।

गली थी तो क्यों की मकान की रजिस्ट्री
अंबेडकर कालोनी वासी गौरव कुमार ने बताया कि यदि यह गली है तो नगर परिषद ने उनकी रजिस्ट्री क्यों की। गौरव का कहना है कि परिषद द्वारा उन्हें मकान का नंबर भी जारी किया हुआ है। इसके अलावा नगर परिषद द्वारा टेक्स का लेटर भी कई बार उनके पास आ चुका है। गौरव ने बताया कि यह गली नहीं है, बल्कि उनके मकान का प्लाट है, जिसे कुछ कालोनीवासियों ने मिलकर तुड़वाया है। गौरव कुमार ने बताया कि अभी इसका मामला कोर्ट में चल रहा है। गौरव कुमार और उनके परिजनों ने कालोनीवासियों द्वारा लगाए गए कब्जे के आरोपों को निराधार बताया। उन्हाेंने बताया कि वे पिछले 65 वर्षों से इस जगह पर रह रहे हैं।

डी-प्लान के तहत मांगी गई है स्पेशल ग्रांट
वार्ड-27 की पार्षद नवनीत टेका ने बताया कि एडीसी कार्यालय से इस गली को बनाने के लिए डी-प्लान के तहत स्पेशल ग्रांट ली गई है। उन्होंने बताया कि 26 मार्च को एडीसी कार्यालय से 6 लाख रुपये नगर परिषद को भेजे जा चुके हैं। गली को बनाने के लिए निर्माण सामग्री भी गली में आ चुकी है, परंतु राजनीति के कारण गली अधर में लटकी है। पार्षद की माने तो कालोनी में कुछ नक्शे गलत पास किए गए हैं।

दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की जाएगी
नगर परिषद के ईओ एमएस जगत ने बताया कि उनके संज्ञान में मामला है और वे जल्द ही दोनों पक्षों को कार्यालय में बुलाकर बातचीत करेंगे। a

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