आटो रिक्शा चालकों तीन से पांच रुपये प्रति रूट बढ़ाया किराया

Karnal Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। डीजल की मार का असर अब आम लोग पर सीधा पड़ने जा रहा है। रोजाना आटो का इस्तेमाल करने वाले लोगों की जेब पर तीन से पांच रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। आटो चालकों ने शहर में किराया बढ़ा दिया है। इससे रोजाना करीब एक लाख लोग प्रभावित होंगे। किसी ना किसी रूप में रोजाना जिले भर में एक लाख लोग आटो का प्रयोग करते हैं। इस हिसाब से औसतन रोजाना तीन से पांच लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ लोगों पर डीजल के रुप में पड़ा है, जबकि आटो चालक कहते हैं कि किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी है और डीटीओ का तर्क है कि उनके पास नियंत्रण की कोई पावर नहीं।
शहर समेत ग्रामीण इलाकों के सभी रूटों पर आटो चालकों ने किराया बढ़ा दिया है। पांच से सीधा दस रुपये कर भाड़ा बढ़ाया गया है। इससे जहां लोगों में नाराजगी है, वहीं उनकी जेब पर डीजल का डाका पड़ गया है।

निर्मल कुटिया से बस स्टैंड के दस रुपये
जिले के सभी रूटों पर करीब पांच हजार आटो रोजाना करीब 50 से 100 रूटों पर चलते हैं। प्रतिदिन करीब एक लाख लोग किसी ना किसी रुप में आटो का प्रयोग करते हैं। अधिकतर रूटों पर आटो चालकों ने मनमर्जी से ही पिछले कई दिनों से किराया बढ़ा दिया है। करनाल शहर का ही जिक्र करें तो शहर में करीब 1200 आटो रोजाना चलते हैं। निर्मल कुटिया से बस अड्डा जाने तक जाने के लिए पांच से सात रुपया लिया जाता था। अब इस रूट पर दस रुपया प्रति सवारी वसूला जाता है।

कही उतरो किराया दस रुपये
व्यक्ति चाहे सचिवालय के मोड़ पर उतरे, चाहे अस्पताल चौक, पुलिस लाइन उसे दस रुपये देने ही होंगे। ऐसे ही बस अड्डा से शिव कालोनी जाने के लिए अब दस रुपये देना पड़ता है। कुछ आटो चालकों के अनुसार रेलवे रोड पर उतरने के लिए सात रुपये और हांसी रोड ओवर ब्रिज के पार जाने पर दस रुपया किराया वसूला जाता है। ऐसे ही दूसरे रूटों पर चुपचाप मनमाने ढंग से बढ़ोत्तरी की गई है। ऐसे में किराए में कहीं बढ़ोतरी कहीं अधिक तो कहीं कम भी मान ले तो औसत रोजाना तीन से पांच लाख रुपया आम लोगों की जेब से डीजल की महंगाई के नाम पर निकल रहा है।

डीजल महंगा होने से बढ़ाए रेट
अनुमान के तौर पर करीब पांच हजार आटो जिले में है। कई रूटों पर किराया मामूली बढ़ाया गया है। कई रूटों पर अभी नहीं बढ़ाया गया है। इसके अनुसार आटो चालक रोजी रोटी के लिए यह काम कर रहे हैं। वरना तो वह लोग अपनी पूंजी आप ही समाप्त करने में लगे हैं। करीब पोने दो लाख रुपये में आटो खरीदा जाता है। एक साल के बाद उसकी कीमत आधे से भी कम रह जाती है। डीजल सरकार ने महंगा कर दिया है। वह लोग भी मजबूर है।
सुभाष सरदाना, उपाध्यक्ष
ऑटो चालक यूनियन, करनाल

चेकिंग की पावर, किराए में दखल नहीं
वह लोग चेकिंग हर वाहन की कर सकते हैं। सहकारी समिति की बसों में वह सरकारी बस के बराबर किराया वसूल सकते है, लेकिन आटो के किराए के मामले में वह लोग दखल नहीं कर सकते। सरकार की ओर से उन लोगों के पास कोई गाइड लाइन नहीं है। ऐसे में वह लोग किराए के संबंध में आटो चालकों को निर्देश देने में असमर्थ हैं।
विक्रम मलिक, डीटीओ, करनाल


फिर से अभिभावकों की आई शामत
पिछले ही साल कम बच्चों के नियम को लेकर आटो व कैब चालकों ने बच्चों से वसूला जाने वाला किराया बढ़ाया था। अब डीजल बढ़ने से फिर से स्कूलों में लगी गाड़ियों ने किराया बढ़ाने को कह दिया है। अभिभावकों ममता, सुमन, प्रीती, ललिता, अजमेर सिंह, यशपाल सिंह आदि का कहना है कि उनके लिए तो यह परेशानी बढ़नी ही है। मुश्किल से पहले एडजेस्ट किया था, अब फिर से वही चिकचिक। कैसे मैनेज करें महंगाई और बजट को।

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