रामलीला मंचन को लेकर दो सभाओं में ठनी

Karnal Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
करनाल। सैकड़ों बरसों से शहर के रामलीला भवन में होने वाली रामलीला इस बार श्री रामलीला सभा और श्री रामायण पाठक सभा के बीच तकनीकी कारणों की वजह से उलझे विवाद के कारण नहीं हो पाएगी। एक ओर जहां रामलीला सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि वह लोग अपनी इस कोशिश में है कि पुरानी सभ्यता के अनुसार रामलीला भवन के मंच पर कलाकारों द्वारा रामलीला खेली जाए। हां अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह लोग एलसीडी के साथ बडे़ परदे पर रामानंद सागर द्वारा निर्मित की गई संपूर्ण रामायण दिखाई जाएगी।
दूसरी ओर श्री रामायण पाठक सभा के अध्यक्ष नरेश गुप्ता का कहना है कि वह लोग उन्हें इस बात को लेकर इंकार कर चुके हैं। वह तकनीकी कारण दूर नहीं कर सके। इस कारण वह लोग नावल्टी रोड पर जनता अनाज मंडी में अलग से रामलीला करेंगे। शहर के रामलीला भवन में सैकड़ों बरसों से रामलीला का मंचन होता रहा है। इस बार वहां रामलीला नहीं होने की बात सामने आ रही है।
सारा स्पेस कर दिया कवर
श्री रामलीला सभा ने अमर उजाला को बताया कि पिछले बरसों में रामलीला भवन के मंच पर रामलीला खेली जाती थी। रामलीला भवन में कुर्सियों की व्यवस्था के अलावा आम लोगों के बैठने के लिए फ्लोर स्टेप बनाए हुए थे। रामलीला भवन का मंच इससे दो फुट ऊंचा था। पूरा स्पेस खुला था। अब यह स्पेस कवर कर दिया गया है। मंच और नीचे का स्पेस बराबर कर मारबल वाला बनवा दिया गया है। ऐसे में कलाकारों द्वारा कहा गया कि मंच आम मैदान के बराबर हो गया है। दूसरी ओर आवाज अधिक गूंजती है। ऐसे मेें वहां रामलीला होना संभव नहीं है। इस बात को लेकर श्री रामलीला सभा और श्री रामायण पाठक सभा के बीच ठनी हुई है। दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाने में लगे है।
पुरानी संस्कृति को न तोड़ा जाए
श्रीरामलीला सभा के अध्यक्ष कपिल गर्ग और सचिव संजीव गर्ग का कहना है कि उन लोगों का प्रयास है कि श्री रामायण पाठक सभा के कलाकार रामलीला करें। बरसों पुरानी संस्कृति को नहीं तोड़ा जाए। श्री रामायण पाठक सभा के कलाकारों से कल बात होना बाकी है। वह लोग मान गए तो देख लेंगे अन्यथा बडे़ परदे पर एलसीडी के जरिए रामलीला दिखाई जाएगी। इन लोगों के अनुसार बारिश के दिनों में रामलीला भवन में मंच के नीचे के स्पेस में दो फुट तक पानी भर जाता था। बारिश में सब लोग भीग जाते थे। इस दिक्कत को दूर करने का काम कराया तो मंच और नीचे का स्पेस बराबर हो गया। ऐसा होने पर कलाकारों ने रामलीला करने में दिक्कत बताई है। फिर भी उन लोगों की कोशिश है मान गए तो रामलीला पुराने स्टाइल में ही होगी।
रामलीला करने की नहीं रही जगह
श्री रामायण पाठक सभा के अध्यक्ष नरेश गुप्ता ने कहा कि वह हर साल रामलीला भवन के किराए के तौर पर श्री रामलीला सभा को 11 हजार रुपये देते थे। श्री रामलीला सभा के लोगों ने रामलीला भवन के स्वरूप को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। मंच और चेयर स्पेस और फ्लोर स्टेप को समतल कर दिया। ऐेसे में रामलीला के कलाकारों को दिक्कत आती है। उन लोगों को कहा गया कि वह लोग मंच दो फुट ऊंचा करा दें और आवाज हाल में नहीं गूंजे। इसकी व्यवस्था करा दे। श्री रामलीला सभा की ओर से ऐसा नहीं करने के लिए कहा गया है। ऐसे में उन लोगों ने जनता मंडी में रामलीला करने के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है। उन लोगों का मतलब रामलीला के जरिए पैसा कमाना नहीं है। वह केवल संस्कृति को जिंदा रखना चाहते हैं।

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