बलदेव सिंह ने शाहाबाद को दिलाया हाकी नर्सरी का दर्जा

Karnal Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। भारत के राष्ट्रीय खेल हाकी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले कोच बलदेव सिंह का कार्यकाल एक वर्ष और बढ़ा दिया गया है। हरियाणा में लड़कियों को हाकी में एक अलग पहचान दिलाने में कोच बलदेव सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। हालांकि द्रोणाचार्य अवार्डी कोच बलदेव सिंह अभी तक भारत को इंटरनेशनल स्तर की 36 महिला खिलाड़ी और 11 पुरुष खिलाड़ी दे चुके है। हाकी में हरियाणा की ओर से ओलंपिक खेलने वाले खिलाड़ियों को भी कोच बलदेव सिंह द्वारा तैयार किया जाता रहा है। कोच बलदेव सिंह ने शाहाबाद को पूरे विश्व में महिला हाकी नर्सरी के रूप में अंकित करवाया गया है। 62 साल के कोच बलदेव सिंह का जन्म 1950 में पटियाला में हुआ, जिसके छह साल बाद वे लुधियाना में अपने परिवार के साथ रहने लगे। लुधियाना के मालवा खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल को याद करते हुए कोच बलदेव सिंह बताते हैं कि इसी स्कूल ने उनके जीवन में बदलाव लाया और उनका झुकाव हाकी की तरफ हो गया। इसी स्कूल के पीटीआई के बार-बार कहने पर बलदेव सिंह ने 9वीं कक्षा में हाकी स्टिक को पकड़ा और इसी बदौलत वे आज इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं। एक साल के अंतराल में ही वे स्कूल की अंडर-18 हाकी टीम का हिस्सा बन गए थे। इसी दौरान उन्होंने पंजाब स्टेट स्कूल चैंपियनशिप के साथ-साथ आल इंडिया स्कूल चैंपियनशिप भी जीती। इसके पश्चात 1971 में कोच बलदेव सिंह जीजीएन खालसा कालेज लुधियाना की टीम में शामिल हुए और यहां भी हाकी में जीत की पताका फहरानी शुरू की। कालेज हाकी प्रतियोगिता में पंजाब यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले सभी कालेजों में से उनके कालेज की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। पारिवारिक आर्थिक स्थित मजबूत नहीं होने के कारण उन्होंने 1978 में मास्टर डिग्री दूरवर्ती शिक्षा से की। वहीं, 1981 में हरियाणा खेल विभाग द्वारा उनकी पहली ज्वाइनिंग कुरुक्षेत्र में बतौर सीनियर हाकी कोच के रूप में हुई। यहां दो साल काम करने के बाद जनवरी 1982 में शाहाबाद बदली हो जाने के कारण वहां हाकी की कोचिंग देनी शुरू की। इस दौरान सवा चार साल में उन्होंने लड़कियों को हाकी में लेकर आने के लिए अथक प्रयास किए। उन्हाेंने शाहाबाद में लड़कियों के लिए सरकार की मदद से ग्राउंड की व्यवस्था करवाई। लड़कियों को हाकी के लिए प्रोत्साहित किया और आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को हाकी खेलने के लिए प्रेरित किया। लड़कियों की रुचि खेल की ओर बढ़ाने के लिए आर्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल बिमला चोपड़ा ने उनकी बहुत मदद की, जिससे शाहाबाद जैसे छोटे से कस्बे में भारी संख्या में लड़कियों ने इस खेल में रुचि दिखाई। यह सब कोच बलदेव सिंह की समर्पण भावना के कारण ही संभव हो पाया है।

भीम और द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित हैं बलदेव
कोच बलदेव सिंह द्वारा हाकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सरकार ने उन्हें भीम और द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित किया है। इंडिया को एक से बढ़कर एक धुरंधर खिलाड़ी देने वाले कोच का लगातार चौथी बार हरियाणा सरकार ने कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, जिससे शाहाबाद हाकी खिलाड़ियों में खुशी का माहौल है।

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