पांच साल से अटका गेहूं

Karnal Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
कैथल। गेहूं के भंडारण की समस्या से निजात दिलाने के लिए ढांड के गांव सोलू माजरा में अदानी ग्रुप द्वारा बनाए गए साईलोज में पिछले पांच वर्षों से भंडारित किए जा रहे गेहूं का उठान नहीं हो पा रहा है। इस कारण जिले में गेहूं को खुले में भंडारित करना पड़ रहा है। पिछले पांच वर्षों में यहां से काफी कम मात्रा में गेहूं का उठान हो रहा है।

सोलू माजरा में बने अत्याधुनिक साईलोज
गांव सोलूमाजरा के नजदीक स्थित अदानी एग्रीलोजिस्टिक की अनाज भंडारण की क्षमता 2 लाख 25 हजार टन है। इसमें किसानों से सीधा गेहूं खरीद करके खुले में भंडारित किया जाता है। यह गेहूं इस तरह से भंडारित होता कि साईलोज में से सीधा ट्रेन के बॉक्स में चला जाता है। यहां भंडारण करने की विशेषता यह है कि इसमें अनाज न केवल मेकेनिकल हैंडल करते हैं, बल्कि रखरखाव में भी सुविधा होती है। यहा सभी कार्य यांत्रिक मेकेनिकल तरीके से किए जाते हैं और अन्य गोदामों के मुकाबले ज्यादा लंबे समय तक अनाज को सुरक्षित रखा जाता है। अभी भी अदानी साईलोज में वर्ष 2008-09 के सीजन से लेकर अभी तक अनाज संभालकर रखा हुआ है, जो देखने में अच्छी हालत में है।

ये है इस समय स्टॉक
वर्ष 2008-09 21 हजार टन
2009-10 34 हजार 400 टन
2010-11 56 हजार टन
2011-12 53 हजार टन
2012-13 43 हजार टन

ये हुआ है भंडारण
2007-08 में 5 हजार टन
2008-09 में 1 लाख 50 हजार टन
2009-10 में 34 हजार 400 टन
2010-11 में 56 हजार टन
2011-12 में 53 हजार टन
12-13 में 43000 हजार टन

ये रही निकासी की दर
2008-09 में 48 हजार 800 टन
2009-10 में 24 हजार 400 टन
2010-11 में 47 हजार टन
11-12में 36 हजार हजार टन
12-13 में 24 हजार टन
(आंकड़े अदानी ग्रुप से मिली जानकारी के अनुसार )

ये है जिले में गेहूं के भंडारण की स्थिति
उधर, एफसीआई से मिली जानकारी के अनुसार कैथल जिले में सीजन के समय लगभग सात लाख टन के आसपास गेहूं खरीदा जाता है। इसमें से सवा दो लाख टन यदि इन साईलोज में चला जाता है, तो शेष को कवर्ड में रखने के बाद काफी कम मात्रा में गेहूं को खुले में भंडारण के लिए बचेगा, लेकिन इन साईलोज के खाली न होने के कारण जिले में कैथल, ढांड, गुहला-चीका में इस समय खुले और कवर क्षेत्र में लगभग 4.50 टन गेहूं पड़ा है। इसमें से डेढ़ से 2 लाख टन खुले में पड़ा है। कलायत में करोड़ों रुपये का गेहूं बारिश और बाढ़ के कारण ही खराब हुआ है।

एफसीआई के प्रबंधक आरके सिंह का कहना है कि साईलोज से गेहूं की निकासी काफी धीमी है। यदि यहां से प्रति वर्ष सवा दो लाख गेहूं की निकासी हो जाए तो कैथल में भंडारण की दिक्कत नहीं रहेगी। पांच साल पुराने गेहूं में कहीं न कहीं न्यूट्रीशियन वैल्यू भी प्रभावित हो सकती है, लेकिन इस बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। जैसे-जैसे विभागीय आदेश मिलते हैं, उसी अनुसार निकासी की जाती है। अब साईलोज से गेहूं की निकासी करवाई जा रही है।

चालीस करोड़ रुपये दिया जा रहा किराया
जानकारी के अनुसार अदानी ग्रुप द्वारा बनाए गए इस गेहूं भंडारण के लिए अदानी ग्रुप को 2400 रुपये प्रति टन प्रति वर्ष के हिसाब से लगभग 40 करोड़ रुपये का किराया प्रतिवर्ष दिया जा रहा है। पिछला गेहूं उठान न होने के कारण करोड़ों रुपये का किराया राशि देने के बावजूद गेहूं खुले में भी भंडारित है।

कोट
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. राजेंद्र सिंह का कहना है कि पांच वर्षों में कुछ हद तक तो न्यूट्रीशियन वैल्यू प्रभावित हो सकती है, लेकिन यदि संभाल कर रखा जाए तो गेहूं खराब नहीं होता।
कोट
अदानी ग्रुप के साईलोज के प्रबंधक प्रदीप सभ्रवाल का कहना है कि यहां भंडारित गेहूं पूरी तरह से सुरक्षित एवं साफ-सुथरा है।

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