महिलाएं ही रहीं हैं समाज का आइना

Karnal Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। पुराणों में वर्णित यह वाक्य मिथ्या नहीं है। पुरुष प्रधान समाज में इतिहास गवाह रहा है कि देश पर जब-जब संकट आया, नारियों ने पुरुषों की भांति अपनी भूमिका निभाई है और कदम पीछे नहीं हटाया, स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी बहुमुखी प्रतिभा की धनी नारियां हमारे समाज का आइना रही है। इन्हें याद करकेे हम अपनी छाती गर्व से चौड़ी करते हैं, लेकिन नारी अपराध और लड़कियों से छेडछाड़ जैसी घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। समाज की इस मानसिकता को सुधारने में अमर उजाला की मुहिम का हिस्सा बनी छात्राओं के अपने विचार साझा किए।

घटनाओं से सबक लें
यूनिवर्सिटी कालेज की बीकॉम की छात्रा सादिया ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को कम करने के लिए लड़कियों को तीखा विरोध करना चाहिए। सबसे पहले लड़कियों को मानसिक रूप से अपने आप को दृढ़ निश्चयी बनाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटना होने पर विरोध कर सकें। हमें और हमारे समाज को वर्तमान में हो रही इस तरह की छेड़छाड़ और अप्रिय घटनाओं से सबक लेना चाहिए और अपने स्तर पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करना चाहिए।

दोषियों को सजा मिले
यूनिवर्सिटी कालेज की बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा किरण ने कहा कि पुलिस प्रशासन को तुरंत प्रभाव से इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई करनी चाहिए और सजा भी देनी चाहिए। यदि तुरंत न्याय मिलेगा, तो और लोगों को भी डर होगा। कानून हाथ में लेकर, जाम लगाकर सरकारी कामकाज में बाधा नहीं डालनी चाहिए। घटना के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

सार्वजनिक स्थानों पर तैनात हो पुलिस
संस्कृत विभाग की एमए की छात्रा सीमा ने कहा कि ज्यादातर लड़कियां जवाब देने और कार्रवाई करने से डरती है। प्रशासन को भी चाहिए कि सार्वजनिक स्थानों पर महिला पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं।

अधिकारों की रक्षा हो
केयू हॉस्टल में रहने वाली छात्रा पूजा ने कहा कि कालेज और स्कूलों में महिला सशक्तीकरण के लिए एक महिला विंग का गठन होना चाहिए। जिससे समाज में छात्राओं को एक सोशल सिक्योरिटी मिल सके और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

बुराइयों को मिटाया जाए
पूंडरी वासी सोनिया ने बताया कि छेड़छाड़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए लड़कियों को यूनिटी में रहना चाहिए। परिवार, समाज, सगे संबंधियों द्वारा लड़कियों को इस विषय पर विरोध करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि समाज में फैली इस बुराई को मिटाया जा सके।

कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए
यूनिवर्सिटी कालेज के टूरिज्म मैनेजमेंट विभाग की हेड डा. रेणु मालरा ने बताया कि पहले की अपेक्षा आज बहुत बदलाव आ गया है, अब लड़कियां इस तरह की घटनाओं का विरोध जताने लगी है। लड़कियों पर बहुत सी बंदिशें हैं, पुरुषों का समाज पर आज भी वर्चस्व है। लड़कियों को आज छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का तुरंत विरोध करना चाहिए और अपनी रक्षा के लिए आत्मविश्वास होना चाहिए। बड़ी घटना के विरोध में कानून हाथ में लेने और रोड जाम नहीं करना चाहिए।

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