ईंट की बढ़ती कीमतों से निर्माण पर ब्रेक

Karnal Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
कैथल। ईंट भट्ठों के बंद होने के कारण पिछले डेढ़ माह में प्रति हजार ईंटों की कीमतों में 1000 से लेकर 1500 रुपये तक का इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर मकान के निर्माण पर पड़ा है। अधिकतर लोगों ने ईंटों की कीमतों में इजाफे के कारण अपनी घर बनाने की योजनाओं को कुछ समय के लिए टाल दिया है। भट्ठे अगर बंद रहे तो आशंका जताई जा रही है कीमतों में इजाफा 2500 रुपये प्रति 1000 ईंटों तक जा सकती है। उधर, सरकारी ठेकेदार सुशील शर्मा ने बताया कि कीमतों में इजाफे के कारण होने वाले नुकसान को देखते हुए ठेकेदारों ने नए काम लेने बंद कर दिए हैं।
30 जून से बंद पड़े हैं ईंट भट्ठे
जिले में ईंट भट्ठे पिछले 30 जून से बंद पड़े हैं। अमूमन अक्तूबर माह के मध्य तक नई ईंटें आ जाती थीं। लेकिन इस बार भट्ठों पर ईंटों की पथेर भी शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में पिछले सीजन की ईंटों की ही बिक्री हो रही है। जो ईंटें जुलाई माह में 3500 रुपये प्रति 1000 थीं, वे इस समय 4500 से लेकर 5000 रुपये प्रति हजार बिक रही हैं। यदि भट्ठे संचालन संबंधी समस्या का समाधान नहीं हो पाया तो ईंटों की कीमत 6000 रुपये प्रति हजार भी जा सकती है। शहर वासी विजय कुमार सैनी, बाबू राम, भगवानदास आदि का कहना है कि ईंटाें के महंगा होने के कारण उन्हें घर बनाने की अपनी योजना को ही स्थगित करना पड़ रहा है।
सरकारी ठेकेदार संदीप कुमार का कहना है कि पिछले एक माह में ईंटों के महंगा होने के कारण निर्माण कार्य में लागत बढ़ी है। ईंटों की कीमत लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में यह लागत ओर भी बढ़ने के आसार बने हुए हैं। ठेकेदार को नुकसान भी बढ़ सकता है। ऐसे में नए काम लेना ही बंद करना पड़ सकता है।
माईनिंग एवं मिनरल एक्ट में शामिल किया गया है ईंट भट्ठों को
एसोसिएशन के अध्यक्ष रामप्रसाद बंसल के अनुसार ने ईंट भट्ठों को पूर्व में लघु उद्योग की श्रेणी से निकाल कर माइनिंग एवं मिनरल एक्ट में शामिल कर दिया है। जिस कारण उन्हें कई विभागों से अलग-अलग एनओसी लेनी पड़ रही हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार ईंट भट्ठों को चलाए रखना उनके लिए संभव ही नहीं हैं। इसी कारण इस समय अधिकतर ईंट भट्ठे बंद पड़े हुए हैं। भट्ठों के साथ-साथ प्रदेश में सीमेंट, लकड़ी, लोहा, सरिया, राज मिस्त्री, आरा उद्योग सहित कई ट्रेड जुड़ी हुई हैं। जिनमें प्रदेश में करीब तीन करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अब इस सीजन में यदि ईंट भट्ठे बंद रहे तो इन 3 करोड़ लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
एसोसिएशन ने बुधवार को एसडीएम हवा सिंह पचार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर भट्ठा मालिकों को राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि भट्ठा मालिकों को जमींदारों ने प्रति वर्ष के हिसाब से एग्रीमेंट करना होता है, जबकि विभाग उनसे पांच साल के लिए एनओसी लेने की बात कर रहा है। जो तर्क संगत नहीं है। उन्हें इस एक्ट से बाहर रखते हुए लघु उद्योग की श्रेणी में रखा जाए। ताकि वे भट्ठों को चला सके। इस अवसर पर एसोसिएशन के प्रधान जिला रामप्रसाद बंसल, महासचिव प्रेमचंद, मुख्य सलाहाकार सुमेर चंद जैन, कोषाध्यक्ष कृष्ण खुरानिया, सचिव मोहन बंसल, मुख्य सलाहकार राजेंद्र बंसल, रामफल चहल, जिला परिषद सदस्य बिल्लू बरसाना, धर्मपाल राणा, दलबीर सजूमा, बीरा राम चौशाला, सुभाष, बीरा, रामफल, शीला सहित भारी संख्या में ईंट भट्ठा एसोसिएशन के सदस्य मौजूद थे।

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