कालेज कैंपस में कम, रास्ते में ज्यादा परेशानी

Karnal Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
कैथल। शहर में छेड़छाड़ के बढ़ते मामले के कारण छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छात्राओं की कहना है कि कालेज कैंपस में कम सड़कों पर इस तरह के मामले ज्यादा होते हैं। इसके लिए प्रशासन के साथ-साथ संबंधित अथारिटी को भी ध्यान देना चाहिए।
बीएससी आईटी की छात्रा जाह्ण्वी ने बताया कि छेड़छाड़ की घटनाएं कैंपस में कम होती है। लेकिन घर से कालेज आने- जाने के दौरान शरारती तत्व अधिक परेशान करते हैं। इसे रोकना प्रशासन का काम है। इसके अलावा इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होनी चाहिए।
बीकॉम की छात्रा पूजा ने बताया कि गांव से आते समय शहर के बस स्टैंड से कालेज तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। छात्राओं को बस अड्डे से कालेज तक बस सुविधा मिलनी चाहिए। ताकि सड़क पर होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं से मुक्ति मिल सके। छेड़छाड़ के मामले में प्राचार्य भी अधिक रुचि नहीं लेते हैं। उनका रवैया भी मामले को दबाने वाला होता है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
छात्रा ऋतु ने बताया कि शहर के प्रमुख चौक पर लड़कों के बड़े-बड़े समूह छात्राओं के घर से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे होते है। पुलिस कर्मचारी सब कुछ देखकर भी इसे अनदेखा करते है। प्रशासन द्वारा शहर के प्रमुख चौकों पर पुलिस कर्मचारियों को पहरा होना चाहिए ताकि वे सुरक्षित कालेज तक का सफर तय कर सके।
बीएससी अंतिम वर्ष की छात्रा बबीता शर्मा ने बताया कि छेड़छाड़ की घटना के समय आरोपी का विरोध करना अनिवार्य है। छेड़छाड़ का मामला होने पर कालेज प्रशासन भी इस बात को बड़े हल्के में लेता है जिसके कारण लड़कियों को कई गलत कदम उठाने पड़ते है।
बीकॉम की छात्रा आरती ने बताया कि लड़कियां परिजनों के डर के कारण भी छेड़छाड़ विरोध नहीं करती है। विरोध करने पर लड़कियों को ही अपमान सहना पड़ता है। जिसके कारण कई बार उसकी पढ़ाई भी रूकवा दी जाती है।
बीसीए की छात्रा शीतल ने बताया कि छेड़छाड़ के अधिक मामले कॉलेज के बाहर के विद्यार्थी ही करते है। जो विद्यार्थी कॉलेज होते है वे कॉलेज से निलंबित होने का डर होता है। प्रशासन द्वारा इनके खिलाफ एक मुहिम के तहत कार्य करने की आवश्यकता है।
प्राचार्य और महिला सेल को जानकारी जरूरी
डा. भीमराव अंबेदकर कालेज की महिला प्रकोष्ठ सेल की अध्यक्ष राजकला पूनिया का कहना है कि छेड़छाड़ की घटना होने की सूचना छात्राओं को प्राचार्य और महिला सेल के सदस्यों को जरूर देनी चाहिए। ताकि समस्या का समाधान तुरंत किया जा सके। किसी भी घटना के पीछे अनेक तथ्य छिपे होते है उनका जानकारी जुटानी चाहिए।
सामाजिक संगठन पहल करें
आरकेएसडी कालेज के प्रोफेसर डा. अशोक आत्रेय ने कहा कि छेड़छाड़ के मामले शिकायतों से कम नहीं हो सकते है, इनको सामाजिक जागरूकता से कम किया जा सकता है। सामाजिक संगठनों को पहल करने की आवश्यकता है। कॉलेज व प्रशासन द्वारा बनी शक्तियों को भी अपना सही कार्य करने की आवश्यकता है।
रोक के लिए जानकारी देना आवश्यक
इंदिरा गांधी महिला कॉलेज की लीगल लिटरेसी सेल की इंचार्ज प्रोफेसर शशि गुलाटी ने बताया कि लड़कियों को ऐसी घटना होने पर अधिकारियों को बताना चाहिए। कई छात्राओं की समस्या होती है कि वे घर पर नहीं बता सकती है। लेकिन छात्रा को यदि समस्या है तो वह कालेज के प्राचार्य व अन्य अधिकारियों के सामने जरूर रखें। ताकि वे इस समस्या का समाधान करवा सकें।

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